MP Election 2018 : विधानसभा चुनाव का बिगुल : शुरू हुआ मान-मनोव्वल का सिलसिला

चुनाव की तारीख तय होते ही चुनावी बिसात बिछ चुकी है। प्रमुख पार्टियों ने भी अपने उम्मीदवार तय कर दिए हैं।

By: Lalit Saxena

Published: 09 Nov 2018, 11:19 AM IST

शाजापुर. चुनाव की तारीख तय होते ही चुनावी बिसात बिछ चुकी है। प्रमुख पार्टियों ने भी अपने उम्मीदवार तय कर दिए हैं। नामांकन भरने की आखिरी तारीख होने पर झंडे- ढोल के साथ प्रत्याशियों ने लोगों से मान-मनोव्वल का सिलसिला भी शुरू कर दिया है।

छोटी पार्टियों ने भी नामांकन करने की तैयारी कर ली
विधानसभा चुनाव के लिए छोटी पार्टी और निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपने नामांकन की तैयारी शुरू कर दी है। प्रमुख पार्टी के उम्मीदवारों के वोट काटने तो कोई छोटी पार्टी की उपस्थिति दर्ज कराने तो कोई समाज में नेता की छवि बनाने को लेकर चुनाव में उतरते हैं। ऐसे उम्मीदवार अपने दस्तावेज तैयार करने के साथ ही सही तरीके से नामांकन भरने वाले को तलाश रहे हैं, क्योंकि ऐसा न हो कि मैदान में उतारने से पहले ही इन उम्मीदवारों की उम्मीद खत्म हो जाए। हर चुनाव में ऐसे उम्मीदवार भी सामने आते हैं जो नामांकन भरने में ही फेल हो जाते है, निरस्त आवेदन के चले ये चुनावी मैदान में नहीं उतर पाते। वह अन्य पार्टी मान-मनोव्वल से अपना अपना आवेदन खींच लेते हैं।

मतगणना 11 दिसम्बर
बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में जिले तीनों विधानसभा में चुनाव लडऩे के लिए ५२ अभ्यर्थियों ने नामांकन भरा था। इनमें से १९ अभ्यर्थियों के नामांकन गलतियों के चलते निरस्त हो गए थे। वहीं ५ उम्मीदवारों ने अपना नामांकन वापस ले लिया था। इसके बाद कुल २८ उम्मीदवार चुनाव लड़े थे। इनमें से २१ उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी।

जनता नहीं देती तवज्जो, जमानत हो जाती जब्त
चुनावी मैदान में निर्दलीय उतरने वाले उम्मीदवारों को जनता ज्यादा तवज्जो भी नहीं देती है। वहीं भाजपा-कांग्रेस के अलावा तीसरी पार्टी के उम्मीदवार को भी मतदाताओं ने अभी तक मौका नहीं दिया है। जिले में पिछले विधानसभा चुनाव 2013 की बात करें तो यहां तीनों सीटों पर निर्दलीय व अन्य पार्टियों की जमानत जब्त हो चुकी है। शुजालपुर सीट से बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़े योगेंद्रसिंह बन्टी बना ने जरूर ३० हजार से अधिक मत हासिल किए और निर्दलीयों की लाज बचाई।

चुनाव कार्यक्रम
नाम निर्देशन दाखिल करने की अंतिम तिथि ०९ नवंबर
नाम निर्देशन पत्रों की संवीक्षा 12 नवंबर
नाम निर्देशन पत्र वापसी की अंतिम तारीख 14 नवंबर
मतदान की तारीख 28 नवंबर

इसलिए उतरते हैं मैदान में
संबंधित पार्टी के उम्मीदवारों के वोट काटना।
चुनाव में पार्टी की उपस्थिति दर्ज करवाना।
अपने समाज में नेता की छवि प्राप्त करना।
स्थानीय मुद्दों को लेकर चुनाव में खड़ा होना।
खुद का प्रचार पाने के लिए मैदान में उतरना।
पार्टी विशेष के रणनीति के तहत मोहरे के रूप में चुनाव में खड़ा होना।
मतपत्र पर अपना नाम व फोटो छपवाने के शौक।

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