सरसों में माहू तो चने में इल्ली का प्रकोप

सरसों में माहू तो चने में इल्ली का प्रकोप

Gopal Bajpai | Publish: Jan, 14 2018 07:30:00 AM (IST) Shajapur, Madhya Pradesh, India

इस बार अल्पवर्षा के चलते पहले ही रबी सीजन की रकबा ५० हजार हेक्टेयर लगभग घट चुका है।

शाजापुर. इस बार अल्पवर्षा के चलते पहले ही रबी सीजन की रकबा ५० हजार हेक्टेयर लगभग घट चुका है। पानी के कमी के चलते किसानों ने अपना रुख सरसों और चने की ओर किया, लेकिन सरसों और चने में लगी कीट फसलों को चट करने में लगी हुई है। ऐसे में आसमान पर छाए बादल किसानों के जख्म पर नमक छिड़क रहे हैं। वहीं सरसों की फसल में माहू का प्रकोप भी देखा जा रहा है। साथ ही माहू के चपेट में मसूर भी आ चुकी है।
इस बार ६० हजार से अधिक हेक्टेयर में बोई गई चने की फसल पर इल्ली का प्रकोप दिख रहा है। इसके चलते किसान काफी चिंता में नजर आ रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार बादल छाने से माहू और इल्लियों का प्रकोप और बढ़ जाता है, ऐसे में किसानों को और अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।
गिरवर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र पर कृषि वैज्ञानिक माहू और इल्लियों से फसलों को बचाने के लिए किसानों को सलाह दे रहे हैं। लेकिन आसमा में छाए बादलों ने किसानों की चिंता और अधिक बढ़ा दी है।

कृषि वैज्ञानिक डॉ. एके मिश्रा ने बताया कि इस दिनों में रबी सीजन की फसल में कीट का प्रकोप है। गेहूं अच्छी स्थिति में है, लेकिन सरसो में बड़ी मात्रा में माहू का प्रकोप नजर आ रहा है। वहीं काला माहू मसूर पर के लिए खतरनाक बन रहा है। चने में इल्लियां नुकसान पहुंचा रही हैं तो आलू में लीट ब्लाइट सफेद धब्बा रोग लगने लगा है। तापमान बढ़ा होने से पाले का असर नहीं है। उन्होंने कहा कि किसान भाईघबराए नहीं फसलों में विभिन्न बीमारियों से संबंधी जानकारी कृषि विज्ञान में दी जा रही है।

सरसों का ऐसे करें बचाव
जिले में करीब १२-१५ हजार हेक्टेयर में सरसो की फसल बोई है। सरसो में हरे माहू का प्रकोप देखा जा रहा है। जो सरसो में आने वाले फलो का रस चूस लेते है। इसी तरह मसूर में काला माहू का प्रकोप है। जिससे मसूर को नुकसान हो रहा है। बादल छाने से इनका प्रकोप और बढ़ जाता है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. मिश्रा ने बताया कि माहू से फसलों को बचाने के लिए इमिडा क्लोरोपिड २.५ एमएल एक लीटर पानी में घोकर फसलों पर छिड़काव करें।

ऐसे करें चने की सुरक्षा
अल्प वर्षा के चलते किसानों ने कम पानी वाली फसल चना अधिक मात्रा बोई है। जिले में ६० हजार हैक्टेयर से अधिक में चना बोया गया है। इन दिनों चने में इल्ली का प्रकोप शुरू हो चुका है। कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि चने को इल्ली से बचाने के लिए १ बीघा में १०-१२ स्थानों पर लकड़ी की टी बनाए, जिससे टी पर चिडिय़ां बैठेंगी और इल्लियों को खाएंगी। रासायनिक नियंत्रण में बताया कि कोनालफास दवा २.५ एमएल प्रति लीटर पानी घोल बनाकर १ बीघा खेत में ५-७ पंप का छिड़काव करें।

ऐसे बचाएं आलू की फसल
आलू में लीट ब्लाइट यानी धब्बा रोग देखने में आया है। इसके नियंत्रण के लिए सेफीलायजर नामक दवा २.५ ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। साथ ही आलू के अच्छे निर्माण के लिए क्रं. ००५० उर्वरक या घुलनशील उर्वरक का उपयोग करें।

प्याज-लहसून बचाने ये करें
प्याज लहसून में बाकुडिया रोग का प्रकोप चल रहा है। वहीं थ्रीप्स नामक कीड़ा भी प्याज पर नजर आ रहा है। बाकुडिया के नियंत्रण के लिए फफूंदनाशी ढाई ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से छिड़काव करें। साथ ही घोल में चिपको का उपयोग करें। थ्रीप्स कीड़ा के प्रकोप से बचाने के लिए फीप्रोनील कीटनाशी दवा ढाई एमएल प्रति हेक्टर से छिड़काव करें।
सरसों और मसूर में माहू का प्रकोप है, चने में इल्लियों का प्रकोप देखने को मिला है। किसानों को माहू और इल्लियों से फसलों को बचाने के तरीके बताए जा रहे हैं।
डॉ. एके मिश्रा, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र

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