नहीं बैठे बागी, यहां बन रही त्रिकोणीय मुकाबले की स्थिति

बुधवार को दिनभर की खासी कशमकश के बाद शाम तक दोनों जिलों में चुनाव की तस्वीर साफ हो पाई।

By: Lalit Saxena

Published: 15 Nov 2018, 09:00 AM IST

शाजापुर/आगर-मालवा. बुधवार को दिनभर की खासी कशमकश के बाद शाम तक दोनों जिलों में चुनाव की तस्वीर साफ हो पाई। दोनों जिलों की पांच सीटों में से दो सीट (शाजापुर व सुसनेर) पर जहां त्रिकोणीय मुकाबला है वहीं तीन सीट (आगर, शुजालपुर व कालापीपल) में भाजपा-कांग्रेस में सीधा मुकाबला है। शाजापुर 15 वैध नामांकनों में से तीन उम्मीदवारों ने नाम वापस ले लिए।
इस प्रकार इस सीट पर 12 उम्मीदवार बचे हैं। इधर भाजपा से बागी होकर निर्दलीय नामांकन जमा करने वाले जेपी मंडलोई को लेकर अफवाहों का दौर चलता रहा कि वे नाम वापस लेने पहुंचेंगे। कोई कहता रहा भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय मंडलोई को लेकर नामांकन फॉर्म वापस लेने पहुंचेंगे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। अब शाजापुर से भाजपा, कांग्रेस, आप, शिवसेना, बसपा और भाजपा के बागी को मिलाकर 12 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।
नाम वापसी के दिन बुधवार को शाजापुर विधानसभा से तीन निर्दलीय ने नाम वापस लिए। शेफू (जिया लाला) पिता उमरखिताब खान निवासी ग्राम मोरटा जिला शाजापुर, रियाज खां पिता बाबू खां निवासी मगरिया शाजापुर और इब्राहीम खान (लाला) पिता अख्तर खान निवासी बेरछा मंडी शाजापुर शामिल रहे। इनके नामांकन वापस लेने के बाद अब 12 उम्मीदवार मैदान में हैं।
नाम वापसी के दौरान एसडीएम कार्यालय में पुलिस का खास पहरा लगा रहा। भाजपा से अरुण भीमावद, कांग्रेस से हुकुमसिंह कराड़ा और भाजपा से बागी होकर निर्दलीय के रूप में चुनाव मैदान में उतरे जेपी मंडलोई के बीच कड़े मुकाबले की स्थिति बन रही है।
६ राजनीतिक दलों से तथा २ निर्दलीय
आगर-मालवा. बुधवार को नामांकन वापसी प्रक्रिया के बाद विधानसभा चुनाव के दंगल में शामिल होने वाले प्रत्याशियों की स्थिति स्पष्ट हो गई है। भाजपा, कांग्रेस दोनों प्रमुख दलों के साथ इस बार आप पार्टी, प्रजातांत्रिक समाधान पार्टी, बहुजन संघर्ष दल, बसपा एवं दो निर्दलीय मैदान में रहेंगे। बुधवार को एक निर्दलीय राधुसिंह ने नामांकन वापस लिया।
नाम निर्देशन वापसी प्रक्रिया के बाद रिटर्निंग अधिकारी महेंद्र कवचे ने प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न आवंटित किए। बसपा के गोविंद सूर्यवंशी को हाथी, भाजपा के मनोहर ऊंटवाल को कमल, कांग्रेस के विपिन वानखेड़े को पंजा, आप के बाबूलाल मालवीय को झाडू, प्रजातांत्रिक समाधान पार्टी के राजेश गोयल को स्लेट, बहुजन संघर्ष दल के सुनील अस्ते को नारियल फार्म, निर्दलीय अमित फतरेड़ को बैटरी टार्च, निर्दलीय मधु गेहलोत को हल जोतता किसान चिह्न मिला है।
दिनभर चलती रही गहमा-गहमी
आगर विधानसभा में नामांकन के बाद चुनावी समीकरण भी बदलते हुए दिखाई दे रहे हैं। सपाक्स समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी मधु गेहलोत दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए आने वाले दिनों में खासी परेशानी खड़ी कर सकते हैं। गेहलोत २०१३ का चुनाव कांग्रेस से लड़े थे और हार गए थे।
इस बार टिकट न मिलने से निर्दलीय के रूप में सपाक्स के समर्थन से चुनावी मैदान में डटे हुए हैं। बुधवार को गेहलोत का पर्चा वापस करवाने के लिए कई बड़ी हस्तियों ने गेहलोत से संपर्क किया लेकिन किसी तरह की सफलता नहीं मिली। जब गेहलोत पर्चा वापस लेने रिटर्निंग अधिकारी कार्यालय पहुंचे तो निर्धारित समय समाप्त हो चुका था। ऐसी दशा में वे पर्चा वापस नहीं ले पाए। गेहलोत के साथ आए कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं को देख हर कोई हैरान रह गया। कांग्रेस के बागी से पर्चा वापस करवाने के लिए भाजपा के कार्यकर्ताओं को मशक्कत करते देख तरह-तरह की चर्चाएं होती रही।
सपाक्स व आप पार्टी बिगाडेंग़े समीकरण
दोनों दलों के लिए चुनावी वैतरणी पार करना फिलहाल आसान नजर नहीं आ रहा है। एक तरफ सपाक्स ने अपने समर्थित उम्मीदवार को निर्दलीय खड़ा कर दोनों के लिए परेशानियां बढ़ा दी हैं। आप प्रत्याशी द्वारा सबसे पहले अपना चुनावी अभियान आरंभ कर गांव-गांव में समीकरण गड़बड़ किए हैं। बसपा एवं बहुजन संघर्ष दल भी मतों का विभाजन करने में लगी हुई है।

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