पहली बार भगवान आदिनाथ के जन्म व दीक्षा दिवस पर भव्य रथयात्रा का आयोजन

प्रथम जैन तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के जन्म व दीक्षा दिवस के उपलक्ष्य में नगर में आयोजित तीन दिवसीय महोत्सव के अंतर्गत अंतिम दिन नगर में विशाल रथयात्रा का आयोजन किया गया।

By: Lalit Saxena

Published: 29 Mar 2019, 01:09 PM IST

शाजापुर. प्रथम जैन तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के जन्म व दीक्षा दिवस के उपलक्ष्य में नगर में आयोजित तीन दिवसीय महोत्सव के अंतर्गत अंतिम दिन नगर में विशाल रथयात्रा का आयोजन किया गया। शहर में पहली बार आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम के अंतर्गत यात्रा मार्ग पर सभी नगरवासियों को प्रभावना स्वरूप लड्डुओं की प्रसाद का वितरण भी किया। जिसे ग्रहणकर शहरवासियों ने भी जय-जय श्री आदिनाथ का जयकारा लगाकर धार्मिक महोत्सव में अपनी सहभागिता दर्ज कराई।

चौबीस जिनालय धाम से प्रारंभ हुई

अनुयोगाचार्य मालव विभूषण विजय जी की प्रेरणा एवं जैनसाध्वी कल्पलता व कल्परसा के सानिध्य में जैन श्वेतांबर युवक महासंघ के बैनर तले आयोजित समारोह के दौरान रथयात्रा सुबह 9 बजे चौबीस जिनालय धाम से प्रारंभ हुई। यह नगर के आजाद चौक, कपड़ा मार्केट, सोमवारिया बाजार, नागनागिनी रोड, टॉकीज चौराहा व नई सड़क होती हुई ओसवालसेरी स्थित जैन उपाश्रय पहुंची। रथयात्रा के दौरान भजनों की धुनों पर थिरकती युवाओं की टोलियां, जय-जय श्रीआदिनाथ का जयघोष करते समाजजन, बग्घी में सवार होकर वर्षीदान करते लाभार्थी परिवारजन तथा प्रभु जन्म की खुशियां मनाकर नगर में लड्डु बांटती युवाओं की टोलियां आकर्षण का मुख्य केंद्र रही। वर्षी दान के लाभार्थी प्रकाशचंद्र रांका करेड़ी वाले रहे।

मंत्रोच्चार से रजत कलशों से प्रभु का अलौकिक अभिषेक

इसके पूर्व जन्मोत्सव का प्रारंभ चौबीस जिनालय धाम पर सुबह 6 :30 बजे हो गया था। इसमें मंत्रोच्चार से रजत कलशों से प्रभु का अलौकिक अभिषेक तथा जल-चंदन-पुष्प-धूप-दीप-अक्षत, फूल, नैवेद्य, आरती, मंगल दीपक के साथ अष्ट प्रकारी विधान संपन्न की गई। रथयात्रा पश्चात आयोजित धर्मसभा की शुरुआत लोकेंद्र नारेलिया एवं रविंद्र छाजेड़ ने मंगलाचरण के साथ की। इसके बाद पंकज जैन एवं सलोनी जैन ने गीत की प्रस्तुति दी। शैलेंद्र जैन व सौरभ नारेलिया ने कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान सुनील नाहर एवं अखिल भारतीय जैन श्वेतांबर युवक महासंघ प्रदेश उपाध्यक्ष सपन जैन का सम्मान समाज के ट्रस्ट मंडल ने किया। कार्यक्रम का संचालन अजीत जैन ने किया तथा आभार मनोज जैन ने माना।

अरिहंत असीम पुण्य के स्वामी है

विशाल धर्मसभा में मालव विभूषण विजय जी ने कहा कि अरिहंत असीम पुण्य के स्वामी है। सिद्ध अनंत सुख के स्वामी हैं। प्रभु के पुण्य का ही प्रभाव है कि 56 दिग्कुमारी तथा 6 4 इंद्र उनका जन्मोत्सव मनाते हैं। पंच रूप धरकर प्रभु को ले जाते इंद्र की 10 आंखे, सिर्फ प्रभु की दो आंखों को निहार रही है।

Lalit Saxena
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