हर माह 3 लाख से अधिक एलम पर खर्च, फिर भी शहरवासियों को नहीं मिल रहा साफ पानी

अधिकारी कह रहे बारिश से बन रही स्थिति, जल्द होगी समस्या दूर

By: Gopal Bajpai

Published: 20 Jul 2018, 10:00 PM IST

शाजापुर.
शहर में साफ, शुद्ध समय पर जलप्रदाय करने के लिए नगर पालिका विभिन्न संसाधनों पर लाखों रुपए खर्च करती है। बावजूद शहरवासियों को साफ पानी नहीं मिल पा रहा है। शहरवासियों को समय पर पानी नहीं मिलना और मटमेले पानी की शिकायत हमेशा से बनी हुई है। लेकिन इस समस्या से शहरवासियों को अभी तक कोई निजात नहीं मिली है। जबकि पानी साफ करने वाली एलम पर प्रतिमाह लाखों रुपए खर्च किया जाता है। एक आंकड़े के मुताबिक बारिश के दिनों में हर घंटे 4 एलम की सिल्ला, हर दिन 80-85 सिल्ला यानी एक दिन में एलम का आंकड़ा लगभग दो हजार किलो तक पहुंच जाता है। जिसकी अनुमानित कीमत 12 हजार रुपए से अधिक है। एक माह में एलम पर 3 लाख रुपए से अधिक खर्च होता है। बावजूद शहरवासियों को साफ पानी नहीं मिल रहा है।
शहर में जलप्रदाय का मुख्य स्रोत चीलर बांध है। जिसके पानी से सालभर शहरवासियों को जलप्रदाय किया जाता है। चीलर बांध से नहर, नहर से नदी और नदियों से वाटर वकर््स तक पानी पहुंचता है। लेकिन वाटर वक्र्स तक पहुंचते-पहुंचते चीलर का पानी गंदा व मलमेला हो जाता है। यहां विभिन्न उपकरण सहित एलम से पानी की सफाई की जाती है। इसके बाद पाइप लाइन के माध्यम से शहर में जलप्रदाय किया जाता है। वाटर वक्र्स में पानी साफ करने के लिए महज एलम की सिल्लाओं पर प्रतिमाह ३ लाख रुपए से अधिक राशि खर्च की जाती है। जनता इतना पैसा लगाने के बाद भी नगर पालिका शहरवासियों को साफ पानी पिलाने में विफल नजर आती है। इधर अधिकरियों का तर्क है कि बारिश के दिनों में नदी में पानी की हलचल तेज रहती है, जिससे पानी अधिक मटमेला रहता है। जो ठीक से साफ नहीं हो पाता है। ये स्थिति बारिश के दोरान रहती है। बारिश को देखते हुए प्रतिदिन एलम की एक सिल्ला सफाई के लिए बढ़ाई गई है। लेकिन वह भी साफ पानी नहीं दे पा रही है। बता दें कि पूर्व में घटिया एलम सप्लाई करने वाले ठेकेदार को भी ब्लैक सिस्टेड किया गया था।

ऐसे समझे एमल पर खर्च
प्रतिघंटा एलम - 4 सिल्ला, कुल वजन 88 किलो
प्रतिदिन एलम - 80-88 सिल्ला
प्रतिदिन एलम - 2 टन एलम खर्च
एलम कीमत - 6000-7000 रुपए टन
एक माह में खर्च एलम- तीन लाख से अधिक

वाल्व की रॉड बदली, तीन घंटे देरी से हुआ जलप्रदाय
शहर में देरी से जलप्रदाय होने की समस्या लगभग हर सप्ताह सामने आ रही है। इसके साथ मटमेला पानी भी शहरवासियों के लिए परेशानी बना हुआ है। शुक्रवार को खराब हो चुके वाल्व की रॉड बदलने से कहीं एक घंटा तो कहीं तीन घंटे तक जलप्रदाय देरी से हुआ। बावजूद शहरवासियों को मटमेला पानी का सामना करना पड़ा। शुक्रवार को जिस क्षेत्र में जलप्रदाय होना था, उस लाइन में दो वाल्व में खराबी थी, जिससे वॉल्व की रॉड को बदला गया। जिससे कहीं 1 घंटा तो कहीं ३ घंटे तक जलप्रदाय देरी से हुआ। इधर पानी के लिए घंटों इंतजार के बाद भी शहरवासियों की परेशानी दूर नहीं हुई और फिर से गंदा पानी सप्लाय किया गया। रहवासियों के मुताबिक जब उनके बर्तनों में जब पानी आया तो उसमें से बदबू भी आ रही थी और मटमेला भी दिखाई दे रहा था जिसे उपयोग करना भी संभव नहीं था। शहरवासी अपने-अपने माध्यम से पानी को साफ कर इस्तेमाल कर रहे हैं।

प्रतिदिन नहीं होता जलप्रदाय
बता दें कि शहर में 10 साल पहले तक प्रतिदिन जलप्रदाय किया जाता था। लेकिन बारिश की खेंच और चीलर बांध में पानी की कम होने के चलते दो दिन में एक बार जलप्रदाय किया जाना शुरू किया गया। जिसके बाद आज तक शहरवासी प्रतिदिन जलप्रदाय को तरस रहे हैं। अब चीलर बांध पूर्ण भराने के बाद भी नगर पालिका शहरवासियों को प्रतिदिन जलप्रदाय नहीं कर पाता। जबकि नपा चुनाव में प्रतिदिन जलप्रदाय के वायदे भी किए जाते हैं। चीलर बांध में अधिक पानी होने के बाद भी शहरवासियों को पानी के लिए तरसना पड़ता है। ऐसे में वाल्व खराबी, पाइप लाइन का फूटना सहित अन्य खराबी के चलते आए दिन जलप्रदाय देरी से होता है। जिससे शहरवासियों को जलसंकट का सामना करना पड़ता है। मामले में नपा अधिकारियों का तर्क है कि पाइप लाइन की अव्यवस्था के चलते पूरे शहर में एक साफ पानी का सप्लाई नही किया जा सकता है। जिसके चलते एक दिन छोडक़र पानी दिया जाता है।

इनका कहना
नलों में गंदे पान की समस्या एक-दो दिन में दूर हो जाएगी। बारिश की वजह से भी मटमेला पानी आया था।
- भपूेंद्रकुमार दीक्षित, सीएमओ नपा
बारिश में मटमेले पानी की समस्या रहता है। इसलिए प्रतिदिन एक एलम बढ़ा दी गई है। अब मटमेले पानी की समस्या दूर हो जाएगी। कई बार पाइप लाइन के सुधार कार्य के दोरान भी मटमेला पानी आता है। प्रतिदिन ८०-८५ एलम से पानी की सफाई की जाती है।
- अरूण गौड़, सब इंजीनियन नपा

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Gopal Bajpai Editorial Incharge
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