शहर की सुंदरता का जतन और धरोहर की आभा का पतन

Gopal Bajpai

Publish: Dec, 08 2017 11:12:26 (IST)

Shajapur, Madhya Pradesh, India
शहर की सुंदरता का जतन और धरोहर की आभा का पतन

शहर की सुंदरता बढ़ाने के लिए कलेक्टर श्रीकांत बनोठ ने गत दिनों अधिकारियों की बैठक प्लान तैयार करने को कहा था।

शाजापुर. शहर की सुंदरता बढ़ाने के लिए कलेक्टर श्रीकांत बनोठ ने गत दिनों अधिकारियों की बैठक प्लान तैयार करने को कहा था। इसके बाद प्लान तैयार हुआ और उस पर काम भी शुरू हो गया, लेकिन इस कवायद के बीच शहर की धरोहर की ओर कोई भी ध्यान नहीं दे रहा है। शहर की पहचान मुगल कालीन किले की जर्जर हालत की अनदेखी से दिनों दिन ये अस्तित्व खोती जा रही है। पिछले करीब 5 साल से इसकी गिरी हुई दीवार की मरम्मत को लेकर पुरातत्व विभाग रुचि नहीं दिखा रहा है।

गौरतलब है कि सन 16 40 में शहर में मुगल बादशाह शाहजहां ने किले का निर्माण कराया गया था। शुरुआती दौर में किले की आभा देखकर शहर का नाम खाकराखेड़ी से बदलकर शाहजहांपुर कर दिया गया। इसके बाद बोलचाल की भाषा में शाहजहांपुर से शाजापुर हो गया। कुछ साल पहले तक ये मुगलकालीन किला शहर की पहचान हुआ करता था, लेकिन बाद में इसकी ओर जिम्मेदारों ने ध्यान देना बंद कर दिया। परिणाम यह हुआ कि ये किला धीरे-धीरे जर्जर होने लग गया। 2013 में तेज बारिश के चलते किले की दीवार का एक हिस्सा भरभराकर गिर गया था। इसके बाद तत्कालीन समय से लेकर आज तक कई बार इसकी मरम्मत करने की मांग होती रही, लेकिन कोई लाभ नहीं हो पाया।

अस्तित्व खोने की कगार पर किला
पुरातत्व विभाग ने तो इस किले की ओर ध्यान ही नहीं दिया। ऐसे में धीरे-धीरे करके जर्जर होकर गिरी दीवार का हिस्सा और भी ज्यादा जर्जर होकर दिनों दिन गिरता जा रहा है। वर्तमान में हालत ये हो गई है कि जिस स्थान पर दीवार का कुछ हिस्सा गिरा था, लेकिन अब यहां काफी बड़े स्थान पर दीवार का हिस्सा गिर चुका है।यदि अब भी इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में किले का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा।

हादसे का बना रहता है खतरा
किला परिसर में 4 शासकीय स्कूलों के साथ गल्र्स डिग्री कॉलेज और दो शासकीय विभाग के भी कार्यालय स्थित हंै। जिस जगह पर किले की दीवार टूटी हुई हंै उसके ठीक पास में ही स्कूल के बच्चें मैदान में से होकर गुजरते हंै। किसी भी दिन यहां पर गंभीर हादसा हो सकता है। उक्त स्कूलों के स्टॉफ सहित बच्चें भी किले की दीवार की मरम्मत की मांग कर चुके है, लेकिन अभी तक किसी की भी सुनवाईनहीं हुई।

शहरवासियों को कलेक्टर से आस
शहर की सुंदरता बढ़ाने के लिए चौक चौराहों का सौंदर्यीकरण करने के लिए कलेक्टर ने अधिनस्थों को निर्देश जारी किए है। ऐसे में शहरवासियों को किले की मरम्मत की भी आस है। शहर के नागरिकों का कहना है कि शहर की पहचान किला अपना स्वयं का अस्तित्व खो रहा है। इसकी ओर जिला प्रशासन को ध्यान देकर इसकी मरम्मत कराना चाहिए। ताकि आने वाले समय में किले का पुराना अस्तित्व लौट आए।

चारों दरवाजों की मरम्मत कराएगी नगर पालिका
जिस समय किले का निर्माण हुआ था उसी समय शहर में चार दरवाजों का भी निर्माण कराया गया था। कालांतर में ये दरवाजे भी जर्जर होने लग गए। दीवारें कमजोर हो गई। कई बार इन दरवाजों की मरम्मत की मांग उठी, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। हालांकि कुछ समय पहले नगर पालिका की परिषद की बैठक में उक्त चारों दरवाजों की मरम्मत कराने का प्रस्ताव पारित किया गया। नगर पालिका मुगलकालीन चारों दरवाजों की मरम्मत तो कर रही है, लेकिन किले की मरम्मत नहीं कर सकती। क्योंकि उक्त किला पुरातत्व विभाग के अंतर्गत आता है। किले में किसी भी तरह की मरम्मत का कार्य पुरातत्व विभाग ही कर सकता है।

किला राज्य पुरातत्व विभाग के अधिन है, इस कारण इसमेें स्थानीय स्तर से कोई मरम्मत का कार्यनहीं किया जा सकता। इसकी जर्जर हालत को देखते हुए इस संबंध में पुरातत्व विभाग से इसकी मरम्मत के लिए चर्चा की जाएगी। किला शहर के लिए महत्वपूर्ण है, इसकी स्थिति सुधारने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
श्रीकांत बनोठ, कलेक्टर-शाजापुर

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