कृषि कानूनों को लेकर किसानों के बीच पहुंचे भाजपा नेताओं के प्रतिनिधिमंडल का विरोध

Highlights

- भाजपा के मंत्री और कई नेता कृषि कानूनों पर किसानों से वार्ता करने शामली पहुंचे

- भैंसवाल गांव में किसानों ने भाजपा नेताओं का विरोध करते हुए जमकर मुर्दाबाद के नारे लगाए

- केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान बोले- विरोध करने वाले किसान नहीं, रालोद कार्यकर्ता

By: lokesh verma

Published: 22 Feb 2021, 11:19 AM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
शामली. भाजपा के मंत्री और कई नेता कृषि कानूनों पर किसानों से वार्ता करने के लिए शामली पहुंचे। जहां उन्होंने किसानों को कृषि कानूनों के फायदे गिनाए तो वहीं किसानों ने उन्हें खरी-खोटी सुनाई। इस दौरान किसान नेताओं ने गन्ने का भुगतान ना होने, बढ़ते डीजल-पेट्रोल के दाम, आरक्षण खत्म होने, गन्ने के दाम नहीं बढ़ने जैसे कई मुद्दों को सामने रखा। भैंसवाल गांव में किसानों ने भाजपा नेताओं का विरोध करते हुए जमकर मुर्दाबाद के नारे लगाए। उन्होंने कहा कि बॉर्डर पर धरना दे रहे 200 से ज्यादा किसानों की मौत हो चुकी है। वहां ये लोग नहीं गए, लेकिन गांव में आकर किसानों को भ्रमित कर रहे हैं। विरोध के बाद केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान ने कहा कि विरोध करने वाले किसान नहीं, बल्कि राष्ट्रीय लोक दल के कार्यकर्ता थे।

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गाजीपुर बॉर्डर पर कृषि कानूनों को लेकर जहां कई किसान संगठन धरने पर बैठे हैं। वहीं, अब भारत सरकार और प्रदेश सरकार के मंत्री ने किसानों से वार्ता करने का क्रम शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में केंद्र सरकार के मंत्री डॉ. संजीव बालियान और राज्य सरकार के मंत्री भूपेंद्र चौधरी, पश्चिम यूपी अध्यक्ष मोहित बेनीवाल, विधायक उमेश मलिक, विधायक तेजिंद्र निर्वाल किसानों को समझाने के लिए गांव लिसाढ़ पहुंचे। भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि कुछ समस्याएं हैं, जिनका समाधान कराया जाएगा। मैं भी किसान का बेटा हूं और कृषि कानून किसान के हित में हैं, जिससे आने वाले समय में किसान तरक्की करेगा। उन्होंने कहा कि कृषि कानून किसानों के हित में हैं। वहीं, बढ़ती महंगाई और गन्ने के भुगतान के बारे में उन्होंने कहा कि पहले की सरकार चीनी को आयात करती थी।

उन्होंने कहा कि गाजीपुर बॉर्डर पर चल रहे धरने के दौरान कुछ राजनीतिक पार्टियां किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर चला रही हैं। उन्होंने खाप चौधरियों की नाराजगी पर बताया कि आपस में कुछ खट्टी-मीठी बातें होती रहती है। उन्होंने किसान आंदोलन को राजनीतिक आंदोलन बताते हुए कहा कि जो लोग लोकतंत्र में विश्वास नहीं रखते वह लोग किसानों के कंधे पर रखकर निशाना साध रहे हैं। इनमें वामपंथी भी है, कांग्रेस भी है और रालोद भी है। हम लोग अपने घर परिवार के लोगों से मिलने के लिए आ रहे हैं। हम लोग बीते 10-12 साल से लगातार इस तरह परिवार में आ रहे है औऱ कुछ लोग आंदोलन के माध्यम से अपना राजनीतिक एजेंडा सेट कर रहे हैं।

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