मंडी में रखी 2 हजार क्विंटल सरसों भीगीं, 20 लाख का नुकसान

- दो घंटे से अधिक हुई बरसात से कराहल कृषि उपज मंडी में रखी सरसों भींग गई
- मंडी प्रशासन की लापरवाही को लेकर व्यापारी और किसानों में रोष

श्योपुर/कराहल
कराहल क्षेत्र में सोमवार की शाम दो घंटे हुई बारिश से कृषि उपज मंडी में रखी दो हजार क्विंटल सरसों भींग गई। मंडी में टीनशेड न होना इसका कारण बना। इससे व्यापारियों को करीब 20 लाख का नुकसान हुआ है। मंडी में करीब 60 लाख की सरसों रखी थी। मंडी में अव्यवस्थाओं के चलते हर बार व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ता है। मंगलवार को व्यापारियों ने मजदूर लगा कर सरसों को सुखाने के लिए मंडी चबूतरों पर डालवा दिया। वहीं मंडी में रखीं किसानों की 25 ट्राली सरसों में भी पानी भर गया। मंडी प्रशासन की अनदेखी और टीनशेड को लेकर लापरवाह बने रहने से व्यापारियों और किसान में रोष है। सुविधाओं के अभाव में हर साल व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। ।

दो साल पहले अगस्त माह में कृषि उपज मंडी के प्लेटफार्म पर टीनशेड लगाने के लिए ठेकेदार को वर्कआर्डर मिल गया था, लेकिन अब तक टीनशेड नहीं लग पाए। टीनशेड के लिए 50 लाख रुपए स्वीकृत हुए थे। यही वजह है कि सोमवार को कराहल में हुई अचानक बरसात से एक दर्जन व्यापारियों की सरसों भींग गई। व्यापारी बीते साल भी 50 लाख रुपए का नुकसान झेल चुके हैं। सुविधाएं बढ़ाए जाने की मांग को लेकर व्यापारी और किसान कई दफा आंदोलन कर चुके हैं। बीते साल भीगीं सरसों के बाद हुए नुकसान को लेकर व्यापारियों ने किसानों से खरीद बंद कर हड़ताल कर दी थी। इसके बाद मंडी प्रशासन ने 6 माह में उपज मंडी के चबूतरों पर टीनशेड लगाने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन दो साल बाद भी टीनशेड का काम अधर में लटका हुआ है।

मंडी सचिव को व्यापारी और किसानों ने घेरा, तो भाग खड़े हुए सचिव
बरसात होने से पहले कराहल कृषि उपज मंडी के सचिव शिवप्रताप सिंह सिकरवार मंडी पहुंचे। व्यापारी और किसानों ने मंडी में व्याप्त समस्याओं से सचिव को अवगता कराया। व्यापारी और किसान अपनी बात रख रहे थे तभी सचिव से कहासुनी होने लगी। इसी बीच मंडी सचिव सिकरवार महज 10 मिनट भी मंडी में नहीं रूके और चले गए। मौसम खराब होने पर व्यापारियों द्वारा किसानों की उपज नहंी खरीदने को लेकर विवाद की स्थिति भी बनी थी।

भीगीं थी एक करोड़ की फसल, 50 लाख का हुआ था नुकसान
कराहल मंडी में दो साल पहले 50 लाख की टीनशैड की स्वीकृति हो गई। ठेकदार को वर्क आर्डर भी मिल गया। बावजूद इसके टीनशेड लगाने का कार्य नहीं हो सका। मंडी प्रशासन की इस लापरवाही से दो साल पहले भी व्यापारी और किसान की करीब एक करोड़ रुपए की फसल भीगीं थी। जिसमें 50 लाख का नुकसान हुआ था।

एमडी ने किया था निरीक्षण, दिए थे टीनशेड लगाने के निर्देश
तत्कालीन राज्य कृषि विपणन बोर्ड के प्रबंध संचालक एवं मंडी सहआयुक्त फैज अहमद किदवई ने 10 माह पहले कराहल कृषि उपज उपमंडी का निरीक्षण कर मंडी के चबूतरों पर टीनशेड का कार्य करने के निर्देश दिए थे। साथ ही वर्क ऑर्डर होने के बाद भी टीनशेड का निर्माण नहीं करने पर नाराजगी जताई थी। इसके बाद भी मंडी में अव्यस्थाएं हैं। इस मामले की व्यापारी और किसानों ने भी शिकायत दर्ज कराई थी।

इनका कहना है
कृषि उपज उप मंडी में व्यापारी और किसानों को होने वाली असुविधा और टीनशेड का निर्माण अब तक न हो पाने को लेकर मंडी सचिव से बात करना हूं। वस्तुस्थिति जानने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। व्यापारी और किसानों की समस्या का हल किया जाएगा।
रूपेश उपाध्याय
मंडी प्रशासक, श्योपुर

Anoop Bhargava Bureau Incharge
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