एक-एक हजार रुपए किराया देकर जेसलमेर से श्योपुर पहुंचे 563 मजदूर

राजस्थान सरकार ने रोडवेज बसें भेजने के बजाय निजी बसों से भेजे मजदूर

श्योपुर. भले ही सरकारें प्रवासी मजदूरों को घर लाने के तमाम दावे करें और तमाम दंभ भरें, लेकिन हकीकत में मजदूरों की परेशानियां कम होने के नाम नहीं ले रही हैं। श्योपुर जिले के साढ़े पांच सैकड़ा मजदूरों की भी कुछ ऐसी ही कहानी है, जो डेढ़ माह से रोजगार तो दूर भोजन-पानी के लिए की भी जद्दोजहद कर रहे थे, उन्हें जेसलमेर से श्योपुर तक आने के लिए एक-एक हजार रुपए का किराया चुकाना पड़ा। हालांकि राजस्थान बॉर्डर से उनके गांवों तक को इन मजदूरों को श्योपुर प्रशासन अपनी बसों से भेजा, लेकिन राजस्थान की बसों ने इनसे किराया वसूला।


बताया गया है कि श्योपुर सहित प्रदेश के हजारों मजदूर राजस्थान में फंसे हुए हैं। पिछले दिनों तक इन मजदूरों को राजस्थान सरकार अपनी राज्य परिवहन सेवा (रोडवेज) की बसों से निशुल्क मध्यप्रदेश बॉर्डर तक भेज रहा था, लेकिन जेसलमेर की मोहनगढ़ तहसील के पीटीएम चौराहा, सुल्ताना आदि इलाकों में साढ़े पांच सैकड़ा मजदूरों को छोडऩे के लिए वहां से अफसरों ने हाथ खड़े कर दिए और निजी बसें उपलब्ध करा दीं, लेकिन जेसलमेर से श्योपुर बॉर्डर तक आईं इन आठ निजी बसों ने श्योपुर के 563 मजदूरों से एक-एक हजार रुपए किराया वसूला।


राजस्थान के जेसलमेर में बड़ी संख्या में श्योपुर के मजदूर फंसे हुए थे। हमने जैसे-तैसे वहां इनके भोजन-पानी की व्यवस्था करवाई, लेकिन जब इन्हें लाया गया तो राजस्थान ने रोडवेज बसें नहीं भेजी और निजी बसें भेज दी, जिनमें एक-एक हजार रुपए प्रति मजदूर किराया लिया गया।
जयसिंह जादौन, प्रबंधक, महात्मा गांधी सेवा आश्रम श्योपुर

महेंद्र राजोरे Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned