प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा नेताओं में भी हुई तू-तू, मैं-मैं

प्रदेश सरकार की नाकामी उजागर करने भाजपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया के सवालों पर उखड़े भाजपाई, आपस में भी उलझे

By: jay singh gurjar

Published: 03 Dec 2019, 12:00 PM IST

श्योपुर,
प्रदेश सरकार की नाकामियों को उजागर करने सोमवार को भाजपा द्वारा प्रदेशव्यापी कार्यक्रम तहत श्योपुर में भी प्रेस-कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। जिसमें भाजपा की विपक्ष के रूप में भूमिका श्योपुर में नगण्य रहने जैसे सवालों पर भाजपा नेता उखड़ गए तो वहीं आपस में एक दूसरे से उलझते भी नजर आए।


हुआ यूं कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए प्रदेश नेतृत्व द्वारा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य धैर्यवद्र्धन शर्मा को मुख्य वक्ता के रूप में भेजा। हालांकि शर्मा ने प्रदेश नेतृत्व द्वारा दी गई ब्रीफिंग तो कर दी, लेकिन जब मीडियाकर्मियों ने शर्मा सेे सवाल शुरू किए तो बीच में पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष महावीर सिंह सिसौदिया उखड़ते हुए बोल उठे। इस पर जिला महामंत्री रामलखन नापाखेड़़ली ने उन्हें रोका तो सिसौदिया बोले तुम कौन होते हो मुझे रोकने वाले, ये नहीं चलेगा। इस पर कुछ देर दोनों के बीच बहस हुई, जिसे धैर्यवद्र्धन शर्मा ने बीच-बचाव कर शांत कराया। इस दौरान जब भाजपा नेताओं से पूछा गया कि श्योपुर में बिजली बिलों, स्वास्थ्य विभाग आदि मुद्दों पर भाजपा ने कुछ नहीं किया तो जहां भाजपा जिालध्यक्ष डॉ.गोपाल आचार्य ने कहा कि हमने समय-समय पर मामले उठाए हैं। वहीं मुख्य वक्ता धैर्यवद्र्धन शर्मा ने कहा कि पिछले दो-तीन माह से संगठनात्मक चुनाव चल रहे थे, लेकिन अब आगामी दिनों में प्रदेश सरकार की नाकामी को उजागर किया जाएगा और जनता की लड़ाई लड़ी जाएगी। हालांकि इस दौरान भाजपा नेताओं ने माना कि स्थानीय मुद्दों पर विपक्ष की भूमिका सही नहंीं हो पाई।


प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिले के एकमात्र भाजपा विधायक सीताराम आदिवासी के नहीं होने पर जब मीडियाकर्मियों ने सवाल किया तेा सभी भाजपा नेता निरुत्तर नजर आए। इस दौरान कैलाश नारायण गुप्ता, कविता मीणा, महावीर मीणा, बिहारी सिंह सोलंकी, नरेंद्र वैष्णव भी मौजूद रहे।


करप्शन और कालाबाजारी की है कांग्रेस सरकार-धैर्यवद्र्धन
प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश कार्य समिति सदस्य धैर्यवद्र्धन शर्मा ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार करप्शन और कालाबाजारी की सरकार की हेा गई है। आमजन और किसान परेशान हैं, लेकिन कांग्रेस के नेता और मंत्री अपने लिए सात पीढिय़ों का इंतजाम करने में लगे हैं। एक साल बाद भी किसानों को न तो कर्जमाफी हुई है और न ही बोनस की राशि मिली है। आपदा प्रबंधन और मुआवजा तो दूर की बात है।

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