अल्प सूचना पर भी रक्तदान करने पहुंच जाते हैं लोग

अल्प सूचना पर भी रक्तदान करने पहुंच जाते हैं लोग

Gaurav Sen | Publish: Jun, 14 2018 02:55:11 PM (IST) Sheopur, Madhya Pradesh, India

समाजसेवी महावीर गुप्ता ने स्वयं 14 साल में 29 बार रक्तदान कर पेश की नई मिसाल

श्योपुर. लोगों को रक्त के लिए अस्पतालों में भटकता देख, रक्तदान के प्रति जागरूक करने का बीड़ा उठाया और स्वयं रक्तदान की पहल करते हुए रक्तदान शिविरों की शृंखला शुरू की। यही वजह है कि स्वयं भी बीते 14 सालों में 29 बार रक्तदान कर एक नई मिसाल पेश कर चुके हैं। इसी का परिणाम है कि श्योपुर जैसे जिले में लोग रक्तदान के लिए सोशल मीडिया पर मिलने वाली एक अल्पसूचना पर पहुंच जाते हैं।


ये अद्वितीय पहल की है श्योपुर निवासी समाजसेवी महावीर गुप्ता ने, जो श्योपुर में रक्तदान जागरुकता के 'रक्तदान पुरुषÓ बन चुके हैं। 19 फरवरी 2004 को हृदयाघात से अपने भाई मुकेश गुप्ता की असमय मृत्यु के बाद उन्होंने श्योपुर में हृदय रोग का चिकित्सा शिविर लगाने के प्रयास शुरू किए, तो गुप्ता ने इस दौरान कोटा के अस्पतालों में देखा कि श्योपुर के कई मरीज रक्त के लिए परेशान होते हैं।

यही वजह है रही कि अपने भाई स्व.मुकेश गुप्ता की स्मृति में 19 फरवरी 2005 में हृदय रोग चिकित्सा शिविर के साथ ही श्योपुर का पहला रक्तदान शिविर भी आयोजित किया और स्वयं रक्तदान किया। पहले शिविर में ही 61 यूनिट रक्तदान होने पर गुप्ता ने शिविरों की शृंखला शुरू की और बीते 14 सालों में अन्य समाजसेवी संस्थाओं के सहयोग से अभी तक 40 शिविर आयोजित करवा चुके हैं। शिविरों में एकत्रित रक्त कोटा और श्योपुर के ब्लड बैंकों में रखा जाकर जरुरतमंदों को निशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। गुप्ता द्वारा जिले में रक्तदान जागरुकता के लिए उठाए बीड़े का असर ये हुआ कि कराहल, ढोढर और बड़ौदा जैसे कस्बों में भी रक्तदान शिविर हुए। यही नहीं जिला अस्पताल में मरीज की आवश्यकता पर जब सोशल मीडिया पर सूचना पोस्ट होती है तो रक्तदाता अल्पसूचना पर अस्पताल पहुंच जाते हैं और रक्तदान करते हैं।

डोनर बढ़े तो श्योपुर में बन गई ब्लड बैंक
स्व.मुकेश गुप्ता स्मृति सेवा न्यास का गठन कर शिविरों की एक शृंखला शुरू होने के बाद शुरुआत में तो रक्त कोटा के ब्लड बैंकों में रखा जाता था। लेकिन रक्तदाताओं की बढ़ती संख्या और श्योपुर में भी रक्त की निरंतर आवश्यकता के मद्देनजर जिला अस्पताल में पहले ब्लड स्टोरेज यूनिट स्वीकृत हुई, जिसे बाद में जिला ब्लड बैंक में तब्दील कर दिया गया। यही वजह है कि शिविरों में एकत्रित रक्त अब कोटा के साथ ही यहां भी रखवाया जाता है।

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