श्योपुर में शराब बिक्री पर ब्रेक, एक साल में घटी 54 हजार लीटर की खपत

श्योपुर में शराब बिक्री पर ब्रेक, एक साल में घटी 54 हजार लीटर की खपत
आदिवासी समाज में शराबबंदी को लेकर हुई बैठकों और अन्य समाजों द्वारा चलाए अभियान का दिखा असर, वर्ष 2017-18 के मुकाबले 2018-19 के वर्ष में कम हुई देशी शराब और बीयर की खपत

By: jay singh gurjar

Published: 10 Apr 2019, 08:36 PM IST

श्योपुर,
बीते वर्ष में आदिवासी समाज में हुई शराबबंदी और अन्य समाजों में लगातार चल रहे जागरुकता कार्यक्रमों का असर अब श्योपुर जिले में दिखने लगा है। इसी का परिणाम है कि जिले में न केवल नशामुक्ति के प्रति जागरुकता आई है बल्कि बीते एक साल में शराब की खपत भी घटी है। आबकारी विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो बीते वित्तीय वर्ष में देशी शराब की खपत 54 हजार लीटर तक कम हुई है।

बदलते माहौल के बीच बढ़ते शराब के कारोबार के बावजूद जिले में देशी शराब की घटती खपत एक सुखद खबर देती है। आबकारी विभागीय आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2017-18 में 13 लाख 84 हजार 434 लीटर देशी शराब(मशाला व प्लेन) की खपत हुई। जबकि एक सप्ताह पूर्व ही खत्म हुए वित्तीय वर्ष 2018-19 में 13 लाख 30 हजार 221 लीटर देशी शराब बिकी है। यानि एक साल में 54 हजार 213 लीटर की शराब बिक्री कम हुई है। वहीं बीते एक वर्ष में बीयर की बिक्री में भी काफी कमी आई है। जिसमें वर्ष 2017-18 में जहां 3 लाख 50 हजार 950 लीटर बीयर खपत हुई थी, वहीं 2018-19 में ये खपत घटकर 2 लाख 89 हजार 902 लीटर रह गई। यानि इसमें 61 हजार 48 लीटर की कमी आई है।

आदिवासी समाज ने गत वर्ष की बैठकें, जुर्माने भी लगाए
आदिवासी समाज में फैली कुरीतियों और बुराईयों को दूर करने लिए गत वर्ष समाज के पंच-पटेलों ने दर्जन भर बैठकें की और न केवल शराबबंदी का निर्णय लिया, बल्कि जुर्माने की भी व्यवस्था की। आदिवासी समाज की 84 महापंचायत के तत्वावधान में 7 जनवरी 2018 को खिरखिरी तालाब में पहली बैठक के बाद कई गांवों में बैठकें हुई। जिसके चलते समाज के कई लोग शराब छोड़ चुके हैं। वहीं कईयों ने कच्ची शराब बनाना भी बंद कर दिया है। इसके साथ ही गत वर्ष गोरस में आए संत हरिगिरी महाराज ने भी गुर्जर समाज सहित सर्वसमाज के लोगों ने शराब त्यागने की अपील की। इसका भी असर अब समाज में दिख रहा है।

कमी आई है
वर्ष 2017-18 वित्तीय वर्ष के मुकाबले बीते वित्तीय वर्ष में देशी शराब की खपत में कमी आई है। इसे विभिन्न समाजों में हुई शराबबंदी का असर कह सकते हैं।
योगेश काम्ठान
जिला आबकारी अधिकारी, श्योपुर


समाज में दिख रहा असर
हमने 7 जनवरी 2018 को पहली बैठक की, उसके बाद कई गांवों में बैठकें हुई और शराबमुक्ति का निर्णय लिया है। जिसका असर अब समाज में दिख रहा है और कई लोग शराब छौड़ चुके हैं।
टुंडाराम लांगुरिया
आदिवासी समाज के नेता, कराहल

jay singh gurjar
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned