मध्यप्रदेश की मांग के बाद भी पानी देने को तैयार नहीं राजस्थान, नहर में मेंटेनेंस का बहाना, सूख रही फसलें

नहर में पानी छोडऩे की मांग को लेकर किसानों की अनिश्चितकालीन धरने की तैयारी आज से

By: rishi jaiswal

Published: 15 Sep 2020, 09:53 PM IST

श्योपुर. बारिश के अभाव में खरीफ की फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गई हैं, ऐसे में अब चंबल नहर के पानी की दरकार बनी हुई है। बावजूद इसके नहर में पानी छोडऩे को लेकर असमंजस बना हुआ है। हालांकि 1500 क्यूसेक पानी की डिमांड मध्यप्रदेश के अफसरों ने दे भी दी, लेकिन राजस्थान के अफसर फिलहाल पानी छोडऩे के मूड में नहीं है। राजस्थान के अफसर नहरों में मेंटेनेंस की आड़ लेकर पानी छोडऩे से पूरी तरह इंकार कर रहे हैं।


यूं तो बीते एक पखवाड़े से राजस्थान के कोटा बैराज से चंबल नहर में पानी छोड़े जाने की मांग उठ रही है, लेकिन अब बीते एक सप्ताह से बारिश नहीं होने और तेज धूप पडऩेे से फसलें सूखने लगी हैं। यही वजह है कि किसानों की टकटकी चंबल नहर की ओर लग गई है। दो राज्यों के बीच फंसी चंबल नहर में फिलहाल पानी आने को लेकर असमंजस ही बना हुआ है। किसानों की मांग के बाद मध्यप्रदेश के जलसंसाधन विभाग के अफसरों ने चंबल कमिश्नर के मार्फत 1500 क्यूसेक पानी की डिमांड भेजी थी, लेकिन उसके बाद से मध्यप्रदेश के अफसरों ने न तो बात की है और न ही रिमाइंडर भेजा है। वहीं राजस्थान के अफसर तो अभी पानी देने को तैयार ही हैं।

राजस्थान के अफसरों का तर्क है कि अक्टूबर में रबी सीजन के लिए नहरों का मेंटेनेंस किया जा रहा है, इसलिए फिलहाल पानी छोडऩे की संभावना कम है। लेकिन ऐसे तर्कों के इतर धरातलीय स्थिति यह है कि किसानों की खरीफ की फसल सूख रही है, तो फिर रबी फसलों के भविष्य की चिंता करना बेमानी है। जबकि चंबल के बांधों में पर्याप्त पानी भी है।


नहर में पानी नहीं आया तो सूख जाएगी धान
इस बार जिले में सामान्य औसत की 67 फीसदी ही बारिश हुई है और सितंबर माह का पहला पखवाड़ा तो सूखा ही निकल रहा है। जबकि जिले में 1 लाख 38 हजार हेक्टेयर में खरीफ फसलें बोई है, जिसमें 42 हजार हेक्टेयर तो अकेला धान है। ऐसे में किसान चिंतित है और पानी के अभाव में धान की फसल सूख रही है। किसानों कहना है कि बड़ौदा क्षेत्र के ललितपुरा, बिचगांवड़ी, धर्मपुरा, धानोद, बासोंद, बेहड़ावद, बाजरली, पहाड़ली, पनवाड़, कालूखेड़ली, राजौरा, राजपुरा, राधापुरा सहित कई गांवों में पानी के अभाव में धान की फसल सूख रही है, लेकिन न तो बारिश हुई है और न ही शासन-प्रशासन नहर में पानी छुड़वा पा रहा है। किसान घनश्याम मीणा बिचगावड़ी का कहना है कि यदि दो चार दिन में नहर में पानी नहीं आया तो क्षेत्र की धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी।

अभी नहरों में चल रहा है मेंटेनेंस का कार्य
किसानों की मांग तो है और हमारे क्षेत्र में भी मांग आ रही है, लेकिन रबी सीजन के लिए अभी नहरों में मेंटेनेंस किया जा रहा है। मुख्य नहर में ताथेड़ के पास क्रॉस रेग्युलेटर खराब हो गया है, लिहाजा उसका काम चल रहा है, उसके पूरा होने में ही 15-20 दिन लगेंगे। इसके अलावा अन्य काम भी चल रहे हैं, लिहाजा नहर में पानी छोडऩे की संभावना फिलहाल शून्य ही है।
राजीव कुमार, एसई, सीएडी कोटा

डिमांड भेजी हुई है
हमने तो अपनी ओर से डिमांड भेजी हुई है। चूंकि पानी राजस्थान के कोटा बैराज से छोड़ा जाना है, लिहाजा वे अभी पानी छोडऩे को तैयार नहीं हैं।
सुभाष गुप्ता, कार्यपालन यंत्री, जलसंसाधन विभाग श्योपुर

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