बड़ौदा के पांच सरकारी स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था होगी स्मार्ट

सीएम राइज योजना के तहत चिह्नित सरकारी स्कूलों का होगा कायाकल्प, बड़ौदा संकुल के पांच स्कूलों का भी हुआ चयन

By: rishi jaiswal

Published: 11 Jan 2021, 10:52 PM IST

श्योपुर/बड़ौदा. निजी स्कूलों की तर्ज पर अब सरकारी स्कूलों में भी न केवल सर्वसुविधाएं उपलब्ध होंगी, बल्कि शिक्षण व्यवस्था भी स्मार्ट होगी। ये सब होगा शासन की नई सीएम राइज योजना के तहत। जिसमें चिह्नित सरकारी स्कूलों का कायाकल्प किया जाएगा। इसके लिए बड़ौदा संकुल क्षेत्र में पांच सरकारी स्कूलों का चयन कर लिया गया है। बल्कि जनपद शिक्षा समिति से भी अनुमोदन हो गया है।

बताया गया है कि सीएम राइज योजना में वे स्कूल चयनित किए गए हैं, जिनमें खेल मैदान, कक्ष, कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी सहित अन्य कार्यों के लिए पर्याप्त भूमि की उपलब्धता है। पूर्व में चयनित सूची के भौतिक सत्यापन के बाद अब अंतिम रूप दे दिया है। अब इन विद्यालयों में काम कराए जाएंगे। इसके पश्चात यहां पर नर्सरी से 12वीं तक कक्षाएं संचालित होंगी। बताया गया है कि सीएम राइज के इन स्कूलों में कक्षा पहली से नहीं, बल्कि नर्सरी से प्रवेश मिलेगा। सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए नर्सरी से केजी-1 व केजी-2 जैसे तीन सीखने के प्लेट फार्म तैयार होने से उनकी दक्षता की नींव मजबूत होगी। वर्तमान में स्कूल चलो अभियान जैसे कार्यक्रम में नामांकन को बढ़ाने के लिए स्कूलों से दूर बच्चों को नामांकन रजिस्टर से जोड़ दिया जाता था। कक्षा पहली से पढ़ाई की शुरुआत होती थी। इसमें ऐसे बच्चे होते थे जिन्हें अक्षर ज्ञान भी नहीं होता था।

बड़ौदा के इन स्कूलों का हुआ चयन
बड़ौदा तहसील क्षेत्र के जिन पांच स्कूलों का सीएम राइज योजना में चयन हुआ है, उनमें शासकीय उमा विद्यालय बड़ौदा के साथ ही शासकीय माध्यमिक विद्यालय रतोदन, शासकीय माध्यमिक विद्यालय अलापुरा, शासकीय माध्यमिक विद्यालय पनवाड़ और शासकीय माध्यमिक विद्यालय पहाड़ली शामिल हैं। इस योजना के अंर्तगत चयनित स्कूलों में आसपास के तीन किमी के प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालय के बच्चे व शिक्षक एक ही चयनित विद्यालय में मर्ज हो जाएंगे। यही नहीं एक किलोमीटर से ज्यादा दूरी वाले बच्चों को वाहन से लाया जाएगा।

सीएम राइज विद्यालयों का उद्देश्य

-नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक समग्र-एकीकृत विद्यालय संचालित कर बच्चों की संख्या बढ़ाना और ड्रापआऊट दर को कम करना है।

-स्कूलों में 21वीं शताब्दी की क्षमताओं-दक्षताओं को विकसित करने के लिए आधुनिक उपकरण और तकनीक से लैस करना।

-बच्चों के समग्र विकास के लिए एक ही विद्यालय परिसर में खेलकूद, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक गतिविधियों को आयोजित कर उपयुक्त वातावरण का निर्माण करना है।

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