30 लाख मंडी टैक्स देने के बाद भी सुविधाओं को तरस रहे किसान, व्यापारी

- मौसम खराब होते ही बंद करना पड़ती है तुलाई
- 50 से 60 ट्रॉली सरसों की आ रही मंडी में, बिगड़े मौसम से व्यापारी और किसान परेशान

By: Anoop Bhargava

Published: 07 Mar 2020, 11:16 AM IST

श्योपुर/कराहल
एक तरफ सरकार मंडी में फसल का वाजिब दाम दिलाने के साथ ही किसानों को रात्रि विश्राम तथा सस्ता भोजन सहित कई सुविधाएं उपलब्ध कराने का ढिंढोरा पीट रही है, दूसरी तरफ ट्राइबल ब्लॉक कराहल में संचालित कृषि उपज मंडी में किसानों को छाया और पानी तक मयस्सर नहीं है। इतना ही नहीं बारिश में फसल को नुकसान से बचाने के लिए टीनशेड तक के लाले हैं। क्षेत्र के 52 गांव से उपज बेचने मंडी आने वाले किसानों को भारी अव्यवस्थाओं से जूझना पड़ रहा है। व्यापारियों को भी सुविधाओं के अभाव में घाटा उठाना पड़ रहा है।

मंडी में सुविधा के लिए प्रतिवर्ष 25 से 30 लाख का टैक्स चुकाने के बाद भी मंडी प्रशासन किसान व व्यापारियों को कोई सुविधा उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। मंडी में खरीदी के बाद फसल सुरक्षित रखने के लिए टीनशेड तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में बरसात होने पर फसल खराब होने से किसान व व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। बीते दिनों बरसात के चलते मंडी में खुले में पड़ी सरसों भींग गई जिससे व्यापारियों व किसानों को नुकसान उठाना पड़ा। जुलाई 2018 में 40 से 50 लाख रुपए विभिन्न कामों के लिए स्वीकृत हुए हैं। लेकिन अब तक ठेकेदार ने काम शुरू नहीं किया है।
व्यापारी जता चुके हैं नाराजगी
मंडी में सुविधाएं बढ़ाने को लेकर व्यापारी नाराजगी जता चुके हैं। इसके बाद भी मंडी प्रशासन ने सुधार के प्रयास शुरू नहीं किए। शुक्रवार को मौसम खराब होने पर व्यापारियों को खरीदी बंद करना पड़ी। खुले में पड़ी सरसों को बारिश से बचाने के लिए व्यापारियों को मशक्कत करना पड़ी। मंडी में उपज को रखने के लिए जगह न होने के कारण मौसम खराब होने पर अक्सर व्यापारियों को खरीदी बंद करना पड़ती है। जिससे किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। इधर किसानों को मंडी में रूकने के दौरान पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं होता।
अंधेरे में काटनी पड़ती है रात
मंडी में फसल बेचने आने वाले किसानों को अंधेरे में रात काटनी पड़ती है। पिछले दो साल से किसान मंडी में काम शुरू होने काइंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हो सका है। किसान व व्यापारी मंडी में सुविधाओं को लेकर मंडी प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन के अफसरों से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका है। इसके साथ ही क्षेत्रीय नेताओं ने भी मंडी को लेकर आवाज नहीं उठाई है।
खुले में पड़ी है सरसों, किसान व व्यापारी चिंतित
मौसम के खराब होने से खुले में पड़ी उपज को लेकर किसान व व्यापारी चिंतित हैं। मंडी में प्रतिदिन 50 से 60 ट्रैक्टर ट्रॉली उपज बेचने के लिए पहुंच रहे हैं। खरीदी गई व्यापारियों की उपज मंडी में चबूतरों पर फैली पड़ी। इधर किसान उपज बेचने के लिए मंडी में आ रहे हैं। वहीं भी बारिश होने होने को लेकर फसल को सुरक्षित रखने को लेकर परेशान हैं। किसानों का कहना है कि मौसम खराब होने पर व्यापारी ओने पौने दामों में सरसों खरीदना प्रारंभ कर देते हैं। किसान भी बरसात से सरसों खराब ना हो इस कारण जल्दबाजी में अपनी फसल बेचकर चला जाता है।
इनका कहना है
मंडी में काम करने वाले ठेकेदार ने श्योपुर में रोड का काम किया था उसका भुगतान अटक रहा है। इस कारण वह कराहल मंडी में कार्य नहीं कर रहा है जैसे ही उसका भुगतान जमा हो जाएगा कराहल मंडी में काम प्रारंभ कर देगा
अनूप श्रीवास्तव
सब इंजीनियर, कृषि उपज मंडी कराहल

Anoop Bhargava
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