परिवार को बचाए रखने के लिए धैर्य संयम की नितांत आवश्यकता

- कराहल के सेसईपुरा में चल रही भागवत कथा में यह बात कथाव्यास ने कही

By: Anoop Bhargava

Published: 01 Mar 2021, 10:00 PM IST

कराहल
सेसईपुरा कस्बे के प्राचीन भगवान नरसिंह हनुमान मंदिर में आयोजित भागवत कथा के तीसरे दिन कथा सुनाते हुए कथा वाचक दीपक कृष्ण भार्गव ने बताया कि किसी भी स्थान पर बिना निमंत्रण जाने से पहले इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि जहां आप जा रहे है वहां आपका, अपने इष्ट या अपने गुरु का अपमान हो। यदि ऐसा होने की आशंका हो तो उस स्थान पर जाना नहीं चाहिए। चाहे वह स्थान अपने जन्म दाता पिता का ही घर क्यों हो। कथा के दौरान सती चरित्र के प्रसंग को सुनाते हुए भगवान शिव की बात को नहीं मानने पर सती के पिता के घर जाने से अपमानित होने के कारण स्वयं को अग्नि में स्वाह होना पड़ा।
कथा में ध्रुव चरित्र की कथा को सुनाते हुए समझाया कि ध्रुव की सौतेली मां सुरुचि के द्वारा अपमानित होने पर भी उसकी मां सुनीति ने धैर्य नहीं खोया जिससे एक बहुत बड़ा संकट टल गया। परिवार को बचाए रखने के लिए धैर्य संयम की नितांत आवश्यकता रहती है। भक्त ध्रुव द्वारा तपस्या कर श्रीहरि को प्रसन्न करने की कथा को सुनाते हुए बताया कि भक्ति के लिए कोई उम्र बाधा नहीं है। भक्ति को बचपन में ही करने की प्रेरणा देनी चाहिए क्योंकि बचपन क‘चे मिट्टी की तरह होता है उसे जैसा चाहे वैसा पात्र बनाया जा सकता है।
इधर जैनी में कृष्ण बाल लीला का हुआ प्रसंग
सोईकला क्षेत्र के जैनी में क्षेत्रपाल बाबा के मंदिर पर चल रही भागवत कथा में पांचवे दिन भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन हुआ। माखन चोरी मटकी फोड़ लीला दिखाई गई है और गोवर्धन महाराज की पूजा हुई। कथा वाचक पंडित सुरेन्द्र शास्त्री ने यह प्रसंग सुनाए।

Anoop Bhargava
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