बीते साल से 500 रुपए कम मिल रहा किसानों को धान का भाव

धान के कम भावों ने बढ़ाई किसानों की चिंता,
1800 से 2000 रुपए क्ंवटल ही बिक रहा धान
गत वर्ष 2500 रुपए के ऊपर थे धान के भाव

By: rishi jaiswal

Published: 17 Oct 2020, 10:46 PM IST

श्योपुर. जिले में धान की कटाई शुरू हो गई और विक्रय के लिए किसान कोटा मंडी में जाने भी लगे हैं, लेकिन इस बार धान के कम भावों ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी है। स्थिति यह है कि इस बार धान के भाव 2000 रुपए प्रति क्ंिवटल से भी कम मिल रहे हैं, जबकि गत वर्ष ये भाव 2500 रुपए क्ंिवटल के आसपास थे। जिससे किसानों को एक क्ंिवटल पर लगभग 500 रुपए की चपत लग रही है। ऐसे में भाव में सुधार नहीं हुआ तो जिले के किसानों को लगभग 105 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान होना तय है।

बताया गया है कि राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र की मंडियों से खरीद के बाद व्यापारियों द्वारा खाड़ी देशों में निर्यात किया जाता है। इस बार अभी निर्यात की डिमांड कम होने के चलते मंडियों में धान के भाव गत वर्ष की अपेक्षा कम है। चूंकि श्योपुर के 90 फीसदी धान उत्पादक किसान राजस्थान की कोटा मंडी में अपना धान बेचने जाते हैं, लिहाजा किसानों के दोहरी चपत लग रही है। किसानों के मुताबिक पिछले साल कोटा मंडी में औसतन भाव 2500 से 2600 रुपए प्रति क्ंिवटल थे, जो इस बार घटकर 1800 से 2000 रुपए प्रति क्ंिवटल ही मिल रहे हैं। किसानों का कहना है कि ऐसे में किसानों की आय कैसे दोगुनी होगी।

चार साल में आधे रह गए धान के दाम
ऐसा नहीं है कि धान के भावों में इस बार ही कमी आई है, बल्कि बीते चार सालों में भाव लगभग आधे रहे गए हैं। कोटा मंडी में वर्ष 2017 मेंं धान के औसतन भाव 3800 रुपए प्रति क्ंिवटल थे, जबकि इस वर्ष अभी ये 2000 के आसपास ही है। कोटा मंडी के व्यापारियों के मुताबिक निर्यात में डिमांड कम होने के कारण भावों पर असर पड़ा है, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

श्योपुर मंडी में भाव और भी कम
जहां एक ओर कोटा मंडी में वर्तमान में धान के भाव 1800 से 2000 रुपए प्रति क्ंिवटल तक चल रहे हैं, वहीं श्योपुर मंडी में तो ये 1300 से 1500 रुपए प्रति क्ंिवटल ही चल रही हैं। शनिवार को ही श्योपुर मंडी में धान 1250 से 1485 रुपए प्रति क्विंटल बिका है। हालंाकि यहां के 90 फीसदी किसान कोटा ही जाते हैं, लेकिन जो किसान श्योपुर मंडी में बेच रहे हैं, उन्हें भी वाजिब दाम नहीं मिल रहे।

विदेशों में निर्यात कम होने के कारण धान के भाव पर असर पड़ा है। पिछले साल की अपेक्षा इस बार भाव कम है। वहीं पिछले तीन-चार सालों में तो धान के भावों में एक से डेढ़ हजार रुपए की कमी आई है।
अशोक खंडेलवाल, धान व्यापारी

किसानों की आय दोगुनी करने के खोखले दावे सरकार कर ही है, लेकिन किसानों को उनकी उपज का पूरा दाम भी नहीं मिल पा रहा है। इस बार धान के भाव पिछले साल से भी कम होने से किसान परेशान हैं।
रामलखन हिरनीखेड़ा,किसान नेता

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