शौचालय बनवाने के लिए इस बेटी ने छेड़ी पिता से जंग, रैली निकाली तब माने पिता

Gaurav Sen

Publish: Aug, 13 2017 02:24:00 (IST)

Sheopur, Madhya Pradesh, India
शौचालय बनवाने के लिए इस बेटी ने छेड़ी पिता से जंग, रैली निकाली तब माने पिता

आठवीं कक्षा की छात्रा ने घर में शौचालय न होने की पीड़ा जब अफसरों को बताई तो उन्होंने अनूठे तरीके से पिता को स्वच्छता और शौचालय निर्माण के लिए जागरूक क

श्योपुर। आठवीं कक्षा की छात्रा ने घर में शौचालय न होने की पीड़ा जब अफसरों को बताई तो उन्होंने अनूठे तरीके से पिता को स्वच्छता और शौचालय निर्माण के लिए जागरूक करने निर्णय लिया। यही वजह है कि छात्रा के साथ स्कूल के अन्य बच्चे और स्वच्छ भारत मिशन के अफसर एक जागरुकता रैली के रूप में छात्रा के पिता के घर पहुंचे और उन्हें समझाइश दी। यही नहीं बेटी ने भी शौचालय निर्माण की जिद की तो पिता मान गए और जल्द ही शौचालय निर्माण कराने को तैयार हो गए।


स्वच्छ भारत मिशन के लिए ये प्रेरणादायक कहानी है, बड़ौदा तहसील के ग्राम मेखड़ाहेड़ी गांव की। जिसमें बीते रोज स्वच्छ भारत मिशन के कार्यक्रम के तहत मॉर्निंग फॉलोअप में पहुंचे जिला पंचायत सीईओ ऋषि गर्ग ने जब स्कूल में बच्चों ने चर्चा की तो पाया कि सभी बच्चों के घर में शौचालय है, लेकिन एक आठवीं की छात्रा अमीषा के घर शौचालय नहीं है। पूछने पर छात्रा अमीषा ने बताया कि हमारे घर में शौचालय होना चाहिए, लेकिन पापा शौचालय नहीं बना रहे हैं।

 

इस पर सीईओ गर्ग ने मिशन के अधिकारियों को निर्देश दिए, साथ ही स्कूली बच्चों को भी अमीषा के घर जाकर उनके पिता को समझाने को कहा। यही वजह है कि अमीषा के साथ स्कूल के बच्चे, मिशन के जिला प्रेरक प्रमीत चौपड़ा व अन्य कर्मचारी खुले में शौच से आजादी के रूप में एक जागरुकता रैली के साथ उसके घर पहुंचे। यहां अमीषा ने सब के सामने अपने पिता नंदकिशोर से घर में शौचालय बनाने के लिए मांग की, साथ ही अन्य बच्चों ने भी उन्हें समझाया। वहीं एसबीएम के अधिकारी कर्मचारियों ने भी खुले में शौच के दुष्परिणाम बताए तो नंद किशोर ने जहां अपनी बेटी पर गर्व किया, वहीं शौचालय बनाने की हामी भरते हुए जल्द निर्माण शुरू करने की बात कही। इस दौरान पिता नंद किशोर का कहना है कि पैसे की थोड़ी दिक्कत थी, लेकिन अब जल्द शौचालय बनाएंगे। मुझे बेटी की समझदारी पर भी गर्व है।


गांव के स्कूल में पढऩे वाले सभी बच्चों के घरों में शौचालय हैं, केवल अमीषा के घर ही शौचालय नहीं है। लेकिन उसने खुलकर ये बात बताई और अपने पिता को भी शौचालय निर्माण के लिए मनाया है, जो एक मिसाल है।
प्रमीत चौपड़ा, जिला प्रेरक, स्वच्छ भारत मिशन श्योपुर

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