पति ने शराब पीना बंद किया, बच्चों और पत्नी को मिली खुशहाली

लॉक डाउन के बीच आदिवासी बस्तियों में दिख रहा सुखद बदलाव, कई बस्तियों में पुरुषों ने छोड़ी शराब, शराब नहीं मिलने से कई परिवारों में लौटी खुशहाली

By: jay singh gurjar

Published: 10 May 2020, 08:00 PM IST

श्योपुर,
पहले शराब आसानी से मिल जाती थी, लेकिन अब लॉकडाउन के चलते बीते डेढ़ माह से शराब नहीं मिल रही है तो मेरे पति ने पीना ही बंद कर दिया। जिसके चलते अब परिवार में भी खुशहाली है और बच्चों का लालन-पालन भी बेहतर हेा रहा है। ये कहना है, डोब गांव की महिला कैलाशी की आदिवासी का। ऐसी कहानी केवल कैलाशी की ही नहीं बल्कि डोब में कई अन्य आदिवासी महिलाओं की भी है, जिनके पतियों ने शराब से दूरी बना ली है।

जहां एक ओर राजकोष भरने के नाम पर देश भर में शराब की दुकानें खोलने को लेकर बहस छिड़ी हुई है, वहीं इस लॉकडाउन में शराब नहीं मिलने से आदिवासी बस्तियों में न केवल खुशियां लौट रही है, बल्कि पुरुष अपने परिवार को पूरा समय भी दे रहे हैं। कोरोना संकटकाल में आदिवासी विकासखंड कराहल के ग्राम डोब में ऐसा ही कुछ सुखद बदलाव दिख रहा है। यहां की महिलाओं ने बताया कि गांव के अधिकांश पुरुषों ने शराब पीना बंद कर दिया है, जिससे अब घर में लड़ाई-झगड़े नहीं होते, वहीं वे परिवार के लालन-पालन पर भी ध्यान दे रहे हैं। पहले तो पुरुष मजदूरी के पैसे शराब पर खर्च कर देते थे, लेकिन अब परिवार पर खर्च हो रहा है। महिलाओं का कहना है कि शराब तो पूरी तरह बंद ही हो जाना चाहिए। प्रथम दृष्टया लगभग 80 घरों की ये डोब की आदिवासी बस्ती लॉकडाउन में शराबमुक्त नजर आती है। गांव के लालाराम आदिवासी का कहना है कि बीते एक माह से शराब नहीं पी है। वहीं आसपास के गांवों में गेहूं कटाई से मिली मजदूरी से आजीविका चला रहा है।

उल्लेखनीय है कि जिले के आदिवासी विकासखंड कराहल में शराब विक्रय प्रतिबंधित है, लेकिन इन क्षेत्रों में चोरी छिपे शराब बेची जाती रही है। वहीं आदिवासी बस्तियों में कच्ची शराब का भी प्रचलन है। लेकिन लॉकडाउन के चलते सुदूर जंगल में स्थित आदिवासी बस्तियों में फिलहाल शराब नहीं पहुंच रही है। जिससे इस लॉकडाउन में भी सुखद बदलाव दिख रहा है।

फील्ड विजिट में गृहभेंट के दौरान हमने देखा है कि कई आदिवासी बस्तियों में अब लोग शराब नहीं पी रहे हैं। डोब गांव में तो अब कोई भी शराब नहीं पीता है। ये खुद हमने जाकर देखा है। पुरुष अपने परिवार के साथ समय बिता रहे हैं। बच्चों के लालन-पालन भी पिता ध्यान दे रहे हैं, जिससे बच्चे स्वस्थ हैं।
सुषमा सोनी
सेक्टर सुपरवाइज, महिला बाल विकास विभाग श्योपुर

jay singh gurjar Reporting
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