नगर परिषद में जल प्रदाय व्यवस्था के नाम पर श्रमिकों की भर्ती में गड़बड़झाला

- विजयपुर नगर परिषद ने चहेतों को दी नौकरियां
- संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन ने नियुक्ति की थी अवैध

By: Anoop Bhargava

Published: 10 Jul 2020, 10:49 AM IST

विजयपुर
नगर परिषद में जल प्रदाय व्यवस्था के नाम पर फर्जी तरीके से की गई श्रमिकों की भर्ती का मामला तूल पकड़ रहा है। एक बार फिर इस मामले की शिकायत संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन के साथ अनुविभागीय अधिकारी विजयपुर तक पहुंची है। हालांकि इस मामले में एक शिकायत के बाद संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन ग्वालियर ने नियुक्तियों को अवैध बताते हुए निरस्त कर दिया था, लेकिन नगर परिषद पीआईसी ठहराव की दम पर नियुक्तियों को कागजी तौर पर चलाती रही। बिना विज्ञापन के चहेते लोगों को नियुक्ति दी गई। करीब 15 श्रमिकों की भर्ती नियम विरुद्ध की गई।

एक अप्रैल 2018 को तीन माह के लिए श्रमिकों की नियुक्तियां जल प्रदाय कार्य के लिए की गई थी, लेकिन अब तक इनको काम दिया जा रहा है। इतना ही नहीं नियुक्ति दिनांक से कोई दुकान तो कोई ठेकेदारी कर रहा है। इसके बावजूद नगर परिषद ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। नगर परिषद अध्यक्ष की शह पर इनको नियुक्त किया गया। अगर बात करें तो एक दो श्रमिक को छोडकर बांकी 1& श्रमिक कभी नगर परिषद कार्यालय नहीं नहीं गए। गड़बड़ी को लेकर विजयपुर नगर परिषद हमेशा ही सुर्खियों में रही है। चाहे फिर वो निर्माण कार्य हों या फिर भर्ती से लेकर दुकान आवंटन का मामला। ऐसा नहीं है कि इन मामलों में शिकायत के बाद जां़च में कोई दोषी नहीं पाया गया, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
तत्कालीन सीएमओ ने किया था इनकार
नगर परिषद विजयपुर में जल प्रदाय व्यवस्था को सुचारू रुप से संचालित करने के लिए श्रमिकों की भर्ती का प्रस्ताव आया था, लेकिन तत्कालीन सीएमओ ने भर्ती करने से इनकार कर दिया था। बावजूद इसके परिषद अध्यक्ष ने 15 लोगों की नियुक्ति कर डाली। इसके के लिए न विज्ञापन निकला गया और न ही विधिवत चयन प्रक्रिया अपनाई गई। इतना ही नहींं अपने चहेते लोगों की नियुक्ति कर डाली। जिनकी नियुक्ति की गई उनमें से दो को छोडकऱ दिया जाए तो बांकी सिर्फ भुगतान के लिए कार्यालय आते हैं।
हर साल लग रहा 9 लाख का चूना
नगर परिषद विजयपुर को हर साल लगभग 9 लाख रुपए का चूना इन नियुक्तियों के चलते लग रहा है। क्योंकि जल प्रदाय व्यवस्था के नाम पर रखे गए यह लोग काम पर नहीं आते है और न ही इनकी आवश्यकता है। इसके बाद भी इनको अब तक हटाया नहीं गया है। तत्कालीन सीएमओ ने शिकायत आने के बाद संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन ग्वालियर को नियुक्ति निरस्त का प्रतिवेदन भेजा था। इसके बाद संयुक्त संचालक ने जांच के बाद इन नियुक्तियों को अवैध बताते हुए नियुक्ति अमान्य कर दी थीं।
जलप्रदाय में पहले से है भरमार
जिस जगह पर इनकी नियुक्ति हुई है वहां पहले से ही काफी कर्मचारी है। इसके बाद भी नियुक्ति की गईं। अब जब काम नहीं है तो श्रमिक अपने घर के काम ही निपटाने में लगे रहते हैं। ललितमोहन शर्मा ने नगरपरिषद से आरटीआई के तहत इनकी नियुक्तियों की जानकारी मांगी तो पता चला कि यह तो फर्जी तरीके से भुगतान पा रहे हैं। जिससे नगर परिषद को हर साल 9 लाख रुपए का चूना लग रहा हैं। इसके बाद शिकायत कलेक्टर, एसडीएम सहित नगरीय प्रशासन ग्वालियर को गई है।

Anoop Bhargava Bureau Incharge
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