श्योपुर में डेंगू की जांच सुविधा न उपचार, राजस्थान जाते हैं मरीज

मलेरिया विभाग के रिकॉर्ड में तीन साल में महज 22 डेंगू पॉजिटिव आए, लेकिन हर साल बड़ी संख्या में निकलते हैं डेंगू मरीज

By: Gaurav Sen

Published: 15 Jun 2018, 02:54 PM IST

श्योपुर । पिछले कुछ सालों में बारिश के सीजन में मलेरिया के साथ ही डेंगू भी विकराल रूप धारण कर लेता है। लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं से पिछड़े श्योपुर जिले में डेंगू के उपचार की व्यवस्था तो दूर जांच सुविधा भी उपलब्ध नहीं हैं। यही वजह है कि श्योपुर के मरीज राजस्थान के अस्पतालों में जाकर उपचार कराते हैं।


विशेष बात यह है कि पिछले सालों में जिले में डेंगू के बड़ी संख्या में मरीज सामने आने के बाद भी मलेरिया विभाग के रिकॉर्ड में तीन साल में महज 22 डेंगू पॉजिटिव मरीज ही दर्ज है। विभागीय अफसरों का तर्क है कि डेंगू की अधिकृत पुष्टि एलाइजा टेस्ट के बाद ही होती है और जांच किट से मान्य नहीं है। लेकिन स्थिति यह है कि पिछले तीन-चार सालों में जिले में बड़ी संख्या में डेंगू के मरीज सामने आए हैं।


लगभग सात लाख की आबादी वाले श्योपुर जिले में यूं तो मलेरिया व अन्य बीमारियों की जांच सुविधा तो है, लेकिन जिला बनने के बाद भी जिला अस्पताल में डेंगू की सुविधा प्रारंभ नहीं हो सकी। यही वजह है कि किसी मरीज को डेंगू के लक्षण होते हैं तो उसका ब्लड सैंपल लेकर एलाइजा टेस्ट के लिए ग्वालियर मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है और जब तक ग्वालियर से 2-3 दिन में रिपोर्ट आती है, तब तक मरीज का मर्ज बढ़ जाता है। जिसके चलते परिजन मरीज को राजस्थान के कोटा, जयपुर या सवाईमाधोपुर के अस्पतालों में ले जाने को मजबूर हो जाते हैं। यही वजह है कि विभाग के रिकॉर्ड में भी डेंगू की संख्या का आंकड़ा ज्यादा नहीं बढ़ता है। गत वर्ष भी विभागीय रिकॉर्ड में महज 5 पॉजिटिव मरीज हैं, लेकिन धरातलीय स्थिति पर दर्जनों मरीज सवाईमाधोपुर और कोटा उपचार कराकर लौटे हैं। विशेष बात यह है कि गत वर्ष श्योपुर के दो मरीजों की मौत राजस्थान के अस्पतालों में डेंगू से हुई, लेकिन विभागीय रिकॉर्ड में जिले में अभी तक एक भी मौत डेंगू से नहीं है।


डेंगू क्या होता है?
डेंगू बुखार एक प्रकार के वायरस (डेन वायरस) के कारण होता है। ये वायरस एडीज नामक मच्छर के काटने से फैलता है। यह मच्छर दिन के समय काटता है। एक बार शरीर में वायरस के प्रवेश करने के बाद डेंगू बुखार के लक्षण सामान्यता 5 से 6 दिन के पश्चात मालूम पड़ते हैं। डेंगू बुखार का अमूमन सीजन जिले में अगस्त से अक्टूबर तक रहता है। इस दौरान बारिश का पानी गड्ढों में भरा रहता है और मच्छर पनपते हैं।


डेंगू के लक्षण
सामान्यता बुखार 102 से 104 डिग्री फेरनाहाइट, जो लगातार 2 से 7 दिन अवधि तक रहता है। इसमें तेज सिरदर्द होना, आंखों के आसपास दर्द होना, मांसपेसियों तथा जोड़ों में दर्द, शरीर पर चकत्ते बनना व गंभीर मामलों में नाक व मुंह से खून आना आदि डेंगू के लक्षण है।


डेंगू का उपचार
डेंगू के लक्षण दिखाई देेने पर तुरंत शासकीय अस्पताल जाकर डॉक्टर को दिखाएं। निजी अस्पतालों की अपेक्षा शासकीय अस्पतालों में डेंगू का नि:शुल्क उपचार उपलब्ध है।

मलेरिया विभाग के रिकार्ड में डेंगू
वर्ष डेंगू पॉजिटिव
2017 04
2016 13
2015 05

एलाइजा टेस्ट ही मान्य
श्योपुर में डेंगू की जांच सुविधा नहीं है, लेकिन हम एलाइजा टेस्ट के लिए सैंपल ग्वालियर भेजते हैं। हां, हमारे यहां उपचार की पूरी सुविधा है और मरीज को आवश्यक दवाईयां दी जाती है। इस वर्ष हम डेंगू जांच के लिए मशीन खरीदने का प्रयास कर रहे हैं। रही बात राजस्थान में मरीजों को डेंगू निकलने की तो वे जांच किट से जांच करते हैं, जो मान्य नहीं है। उन्हीं मरीजों का जब हम एलाइजा टेस्ट कराते हैं तो वो ही रिपोर्ट निगेटिव आती है।
डॉ.एनसी गुप्ता, सीएमएचओ, श्येापुर

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