अब आर-पार के मूड में क्षेत्र के किसान, बोले-बांध के टेंडर नहीं हुए तो आंदोलन

मूंझरी बांध सिंचाई परियोजना को लेकर कांकड़ के हनुमान मंदिर पर जुटे किसान
15 सदस्यीय समिति गठित की, आज सीएम के नाम कलेक्टर को दिया जाएगा ज्ञापन

श्योपुर/बड़ौदा. दो साल से स्वीकृत होने के बाद भी बीते 10 माह से टेंडर नहीं होने से अधर में लटके मूंझरी बांध को लेकर क्षेत्र के किसान अब आर-पार के मूड में नजर आ रहे हैं। यही वजह है कि बुधवार को क्षेत्र के दो दर्जन गांवों के किसान कांकड़ के हनुमान मंदिर पर जुटे और एक स्वर में बोले कि मूंझरी बांध बनाने की दिशा में प्रक्रिया शुरू नहीं की और टेंडर नहीं हुए तो आंदेालन किया जाएगा।


महाराजपुरा रोड रतोदन के कांकड़ के हनुमान मंदिर पर मूंझरी बांध संघर्ष समिति के आह्वान पर जुटे किसानों ने मुद्दे पर मंथन किया और एक 15 सदस्यीय समिति का भी गठन किया जो इस मुद्दे पर काम करेगी। इसके साथ ही बैठक में निर्णय लिया गया कि 3 सितंबर को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन श्योपुर कलेक्टर को दिया जाएगा और बांध के टेंडर लगाने की मांग बुलंद की जाएगी। किसानों ने बताया मूंझरी बांध की मांग चार दशक पुरानी है, बावजूद इसके शासन-प्रशासन गंभीर नहीं है। इस बार भी अल्पवर्षा के चलते भूजलस्तर लगातार गिर रहा है, ऐसे में फसलें प्रभावित हो रही है। ऐसे में अब मंूझरी बांध की आवश्यकता महसूस हो रही है। लिहाजा बांध के टेंडर लगाकर जल्द धरातल पर भी काम शुरू कराया जाएगा। बैठक में श्योपुर विधायक बाबू जंडेल भी शामिल हुए। उल्लेखनीय है कि बड़ौदा और कराहल क्षेत्र के बीच अहेली नदी पर 400 करेाड़ रुपए की लागत से मूंझरी बांध बनना है, लेकिन 10 माह से उसके टेंडर नहीं हो पाए हैं।


ये सदस्य किए गए समिति में शामिल


मूंूझरी बांध और आंदोलन की रूपरेखा के लिए तैयार की गई समिति में 15 सदस्य शामिल किए गए हैं। इनमें गिर्राज नागर, योगेश मीणा, अशोक मीणा, निर्मल गुर्जर, दूधाराम गुर्जर, बंटू शर्मा, भरत मीणा, बंशीलाल नागर, सुग्रीव मीणा, सीताराम सुमन, जगत उपाध्याय, राजेंद्र वर्मा, दीनदयाल सुमन, महावीर मीणा, राजू मीणा शामिल हैं, जबकि सलाहकार समिति में लखन सिंह जाट, प्रेमचंद नागर, रामनिवास रावत, बाबूलाल नागर, मोहनलाल कुशवाह, मांगीलाल विजयवर्गीय शामिल किए गए है।


विधायक बोले-बजट जारी होना था, लेकिन हमारी सरकार गिर गई


किसानों की बैठक में पहुंचे श्योपुर विधायक बाबू जंडेल ने कहा कि मूंझरी बांध के लिए हमारी कांग्रेस की सरकार ने सारी प्रक्रिया पूरी कर ली थी और बजट जारी होना था, लेकिन एक रात में सरकार गिर गई और मामला लटक गया। अब भाजपा सरकार बजट नहीं दे रही है, लेकिन ये तीन-चार महीने की सरकार है और फिर हमारी सरकारी आएगी और मूंझरी बांध बनेगा, लेकिन यदि विपक्ष में भी रहा तो किसानो के साथ हूं और आप की लड़ाई लड़ूंगा। मैंने अभी इसको लेकर विधानसभा भी लगाई है, जिसमें उत्तर आना बाकी है। विधायक जंडेल ने कहा कि मैं इस काम को करवाऊंगा और जैसे नहर का गेट तोड़ा, उस तरह यदि विधानसभा का गेट तोडऩा पड़े और जेल भी चला जाऊं तो भी किसानों की लड़ाई लड़ूंगा।

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महेंद्र राजोरे Desk
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