गर्मी आने से पहले ही गिरा भूजल, 736 हैंडपंप दे गए जवाब

श्योपुर जिले में भूजलस्तर गिरने से ग्रामीण इलाकों में गहराने लगा जलसंकट, हैंडपंपों का समय पर नहीं हो रहा संधारण, नलजल योजना बनी शोपीस, ग्रामीण हो रहे परेशान

By: jay singh gurjar

Published: 24 Feb 2021, 08:28 PM IST

श्योपुर,
अभी ग्रीष्मकाल सही तरीके से शुरू भी नहीं हुआ है, उससे पहले ही जिले में भूजलस्तर तेजी से गिरने लगा है। जिसके चलते गांवों में पेयजल संकट गहराने लगा है। स्थिति यह है कि जिले में 736 हैंडपं बंद हो गए हैं, जिनमें से 76 फीसदी तो केवल भूजल गिरने से बंद हैं। वहीं जिले में 14 नलजल योजनाएं बंद पड़ी हैं। ये आंकड़े तो स्वयं पीएचई विभाग के हैं, लेकिन धरातल पर स्थितियां और भी भयावह होती जा रही है। बावजूद इसके जिला प्रशासन और पीएचई अभी तक ठोस कदम नहीं उठा सके हैं।


लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले की 225 ग्राम पंचायतों में 6 हजार 350 सरकारी हैंडपंप हैं, जिनमें से 5 हजार 614 ही वर्तमान में चालू स्थिति हैं, जबकि 736 हैंडपंप बंद पड़े हैं। इन बंद पड़े हैंडपंपों में 561 तो ऐसे हैं जो भूजलस्तर गिरने से बंद पड़े हैं, जबकि 152 हैंडपंप लाइन गिरने, लाइन फंसी होने, भरापटा या सूखा होने से बंद बताए गए हैं, वहीं 23 हैंडपंप सामान्य खराबी से बंद बताए गए हैं। चूंकि आगामी दिनों में गर्मी शुरू हो जाएगी और ऐसे में समय रहते इन हैंडपंपों में पाइप नहीं बढ़ाए गए या सिंगल फेस की मोटर नहीं डाली गई तो गांवों में पेयजल को हालात भयावह नजर आएंगे।


14 गांवों में नलों में नहीं आ रहा पानी
गांवों में बड़ी संख्या में हैंडपंप बंद होने के साथ ही कई गांवों में नलजल योजनाएं भी नहीं चल रही है। पीएचई विभाग के मुताबिक ही 14 गांवों में नलजल येाजनाएं बंद पड़ी है। जिले में 209 पेयजल योजनाएं(नलजल, स्थलजल, मुख्यमंत्री पेयजल योजना आदि) संचालित हैं, जिनमें से 195 चालू है, जबकि 14 बंद हैं। इन बंद में भी 8 तो स्रोत सूखने से बंद हैं, जबकि 4 मोटर पंप खराब होने से और 2 पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने से बंद होना बताया गया है।

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