सहकारी संस्था के अध्यक्ष और प्रबंधक को 5-5 साल की जेल, 15-15 लाख का जुर्माना

कुहांजापुर सहकारी संस्था में खरीदी के दौरान 30 लाख के गेहूं का किया था गबन, न्यायालय ने पाया दोषी

By: jay singh gurjar

Published: 07 Sep 2021, 08:17 PM IST

श्योपुर,
लगभग छह साल पहले समर्थन मूल्य पर की गई गेहूं खरीदी में 30 लाख के गेहंू का गबन करने के मामले मेें अपर सत्र न्यायाधीश के न्यायालय ने मंगलवार को सेवा सहकारी संस्था कुहांजापुर के तत्कालीन प्रबंधक पूरनचंद शर्मा और अध्यक्ष हंसराज मीणा को 5-5 साल के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 15-15 लाख का जुर्माना भी ठोका है। मामले में अभियोजन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक राजेंद्र जाधव ने की।

मामले के मुताबिक वर्ष 2014-15 में हुई गेहूं खरीदी के दौरान सेवा सहकारी संस्था कुहांजापुर में घटती की शिकायत हुई, जिसके बाद सहायक आयुक्त सहकारिता द्वारा तत्कालीन वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक गंगाराम गुप्ता से जांच कराई गई। जांच में 2595 क्ंिवटल गेहूं की घटती पाई गई। यही नहीं जांच में 30 लाख 26 हजार 264 रुपए की राशि के गबन करने में संस्था के तत्कालीन प्रबंधक पूरनचंद शर्मा और तत्कालीन अध्यक्ष हंसराज मीणा को दोषी पाया गया। इसी आधार पर अध्यक्ष और प्रबंधक के खिलाफ बड़ौदा थाने में एफआइआर दर्ज कराई गई और विवेचना के बाद पुलिस ने आरोपीगणों द्वारा अमानत में खयानत का अपराध घटित करने से उनके विरुद्ध धारा 409 सहपठित धारा 34 भादवि के अंतर्गत न्यायालय में अभियोग पत्र पेश किया। जिस पर विचार ण करते हुए न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश श्योपुर ने आरोपी हंसराज मीणा पुत्र जगन्नाथ मीणा निवासी राजपुरा जिला श्योपुर (तत्कालीन संस्था अध्यक्ष) व पूरनचंद शर्मा पुत्र शंकर लाल शर्मा निवासी छोटा बाजार बड़ोदा को अमानत में खयानत का दोषी पाते हुए मंगलवार को 5-5 साल के सश्रम कारावास और 15-15 लाख रुपए के जुर्माना से दंडित किया।


बाबा रामदास की हत्या में शामिल फरार आरोपी को आजीवन कारावास
9 जुलाई 2016 में वीरपुर के भैरोबाबा मंदिर पर हुई बाबा रामदास की हत्या में शामिल रहे फरार आरोपी डिप्टी उर्फ रामसिंह आदिवासी को मंगलवार को न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इससे पहले न्यायालय ने इसी मामले में 4 आरोपियों को 9 मार्च 2021 को आजीवन कारावस की सजा सुना चुका है। बाद में विचारण के दौरान फरार आरोपी डिप्टी उर्फ रामसिंह आदिवासी निवासी ताल का सहराना, वीरपुर को विशेष न्यायालय ने आजीवन कारावास और 3 हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया। राज्य की ओर से पैरवी विशेष लेाक अभियोजक राजेंद्र जाधव ने की।

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