scriptsheopur | बब्बर शेरों की राह में रोड़ा बने अफ्रीकी चीते | Patrika News

बब्बर शेरों की राह में रोड़ा बने अफ्रीकी चीते

-श्योपुर में 27 साल से चल रही सिंह परियोजना हुई गौण, अब कूनो में बब्बर शेरों की राह भी हुई कठिन
-एशियाई सिंहों के दूसरे घर के रूप में तैयार किया गया था कूनो, चीता आने से कूनो में एशियाई सिंहों की संभावना हुई कम

श्योपुर

Updated: September 09, 2022 02:47:56 pm

जयसिंह गुर्जर@ श्योपुर,
गुजरात में गिर में विचरण कर रहे एशियाई सिंहों के दूसरे घर के रूप में विकसित किए गए कूनो नेशनल पार्क अब अफ्रीकी चीतों की अगवानी के लिए तैयार है। ऐसे में अब 27 साल से चल रही सिंह परियोजना न केवल गौण हो गई है, बल्कि कूनो में अब बब्बर शेरों की राह भी कठिन नजर आ रही हैं। हालांकि विशेषज्ञों की माने तो चीते और शेर एक साथ जंगल में रह सकते हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी गुजरात कूनो में शेर देने को तैयार नहीं है और अब तो यहां चीते आने का बहाना मिल जाएगा।
बब्बर शेरों की राह में रोड़ा बने अफ्रीकी चीते
बब्बर शेरों की राह में रोड़ा बने अफ्रीकी चीते

श्योपुर के जंगल के 345 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को प्रदेश सरकार ने वर्ष 1981 में कूनो-पालपुर वन्यजीव अभयारण्य घोघित किया। यही वजह है कि कूनो अभयारण्य का बेहतर हेबीटेट होने के कारण वन्यजीव विशेषज्ञों ने गुजरात के गिर अभयारण्य के एशियाई सिंहों के दूसरे घर के रूप में कूनो को चिन्हित किया। जिसके बाद वर्ष 1995 में सिंह परियोजना शुरू की गई, जिसमें तीन चरणों में एशियाई शेर कूनो में पुनर्वासित किए जाने थे। लेकिन गुजरात सरकार ने हर बार अड़ंगा लगाया और आज तक कूनो में शेर नहीं आ सके हैं। विशेष बात यह है कि ये मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा और अप्रैल 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने भी 6 से 8 शेर कूनो में देने के आदेश दिए, लेकिन गुजरात ने शेर नहीं दिए। ऐसे में अब जब पिछले दो साल से कूनो को अफ्रीकी चीतों के लिए चयनित किया गया है तो सिंह परियोजना गौण हो गई है और अब जब 17 सितंबर को यहां चीते लाए जा रहे हैं तो कूनो में एशियाई शेरों की आने की संभावना भी धूमिल नजर आ रही है।

सिंह परियोजना में ही मिला राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा
वर्ष 1981 में कूनो वन्यजीव अभयारण्य को 37 साल बाद राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा मिला। एशियाई सिंहों की शिफ्ंिटग के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी की अनुशंसा के बाद प्रदेश सरकार ने वर्ष 2018 में कूनो को राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दे दिया। साथ ही इसका क्षेत्रफल भी 345 वर्ग किलोमीटर से बढ़ाकर अब 748 वर्ग किलोमीटर कर दिया गया है। कूनो वनमंडल के पूरे जंगल का कुल रकबा 1200 वर्ग किलोमीटर है।

सिंह परियोजना में विस्थापित किए 24 गांव
एशियाई शेरों के पुनवार्सन के लिए संरक्षित किए गए कूनो राष्ट्रीय उद्यान में दो दशक पहले 24 गांवों के 1545 परिवारों को विस्थापित किया गया और दूसरे गांवों में पुनर्वासित किया गया। वहीं अब क्षेत्रफल बढऩे के कारण 25वां गांव बागचा भी विस्थापित किया जाएगा, जिसके लिए प्रक्रिया चल रही है।

यंू आगे बढ़ी सिंह परियोजना
-वर्ष 1994 में वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया के वैज्ञानिकों ने किया शेरों को लेकर सर्वे।
-वर्ष 1995 में तीन चरणों की सिंह परियोजना की शुरुआत का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
-वर्ष 1996 में शुरू हुई 24 गांवों के पुनवार्सन की प्रक्रिया।
-वर्ष 1999 में हुआ गांवों का विस्थापन प्रारंभ।
-वर्ष 2013 में सुप्रीम कोर्टने सुनाया था शेरों की शिफ्ंिटग पर फैसला।
-वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात की रिव्यू पिटीशन को किया खारिज।
-वर्ष 2017 में बनाया कूनो को नेशनल पार्क बनाने का प्रस्ताव।
-वर्ष 2018 में कूनो नेशनल पार्क की मिली मंजूरी।

परियोजना बंद नहीं हुई
ये बात सही है कि अभी चीता प्रोजेक्ट पर फोकस है, लेकिन सिंह परियोजना बंद नहीं हुई। सहमति बनेगी तो यहां कूनो में एशियाई सिंह भी लाए जाएंगेे। एक साथ एशियाई सिंह और चीते रहने में कोई दिक्कत नहीं हैं, क्योंकि अफ्रीका में रहते भी हैं।
उत्तम शर्मा
सीसीएफ और संचालक, सिंह परियोजना शिवपुरी

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