मशीनों से माफिया काट ले गए खैर की लकड़ी, वन अमले को पता नहीं

बड़ौदा रेंज के करीब सात किलोमीटर क्षेत्र से माफिया ने काटे पेड़

 

 

कराहल, श्योपुर. बड़ौदा रेंज के करीब सात किलोमीटर क्षेत्र से लकड़ी माफिया मशीन के जरिए खैर की लकड़ी के पेड़ काटकर ले गए। जिसकी वन अमले को भनक तक नहीं लगी। मामला जब मुख्य वन संरक्षक तक पहुंचा, तो वन विभाग के अफसर हांपते हुए मौके पर पहुंचे और पीओआर काटने की औपचारिकता पूरी कर मामले को रफादफा करने में लग गए। सात किलोमीटर क्षेत्र से खैर की लकड़ी के पेड़ मशीन द्वारा काट लिए जाने के बाद वन विभाग की लापरवाही उजागर हुई है। एक और जहां वन विभाग पौधरोपण और वनों की सुरक्षा के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च कर रहा है, वहीं विभाग के अफसर लापरवाही बरत कर माफियाओं को नजरअंदाज कर रहे हैं।

जंगल क्षेत्र में हर रोज हरे-भरे पेड़ों को काटा जा रहा है। कटे हुए पेड़ों को वाहनों के जरिए जंगल से निकाला जा रहा है। बावजूद इसके वन विभाग का अमले को इसकी जानकारी तक नहीं है। बडौदा रेंज में झिरन्या से लेकर चकमजीदपुर तक खैर के पेड़ों का सफाया कर दिया गया। बड़ौदा वन परिक्षेत्र के तहत आने वाली चकमजीदपुर और भुरवाड़ा बीट में पिछले कई दिनों से मशीनों से कटाई जारी है। अब तक लगभग दो ट्रक लकड़ी से ज्यादा माफिया परिवहन कर चुके हैं। इसकी गवाही जंगल में खड़े ठूंठ दे रहे हैं।

विशेष दल करेगा जांच

जंगल कटने की जानकारी के बाद भी वन विभाग द्वारा किसी तरह की कार्रवाई न किए जाने की शिकायत जब मुख्य वन संरक्षक ग्वालियर तक पहुंची, तो उन्होंने एक विशेष दल को श्योपुर भेजकर मामले की जांच कराने का निर्णय लिया है। दल के आने की खबर से के बाद से बड़ौदा रेंज सहित अन्य कटाई वाले क्षेत्रों मे पदस्थ वनकर्मियों मे हडक़ंप मचा गया है। निरीक्षण करने के बाद दल के सदस्य मुख्य वन संरक्षक को रिपोर्ट देंगे इसके बाद सीसीएफ कार्रवाई तय करेंगे।

कई दिनों से चल रहा है खेल

बड़ौदा रेंज में झिरन्या, भूरवाडा, चकमजीदपुर सहित जंगल के हनुमान ओर अहेली नदी के पास कई दिनों से मशीनों से पेड़ों की कटाई की जा रही है। इसकी वन अमले को भनक तक नहीं है। वन समितियों से लेकर डीएफओ तक अवैध पेड़ कटाई को दरकिनार कर रहे हैं। मशीनों से हुई पेड़ कटाई के बाद रेंजर से लेकर वनसमिति के कार्यकर्ता संदेह के घेरे में आ गए हैं।

खैर के हरे पेड़ों की जंगल में कटाई हुई है। इसकी जांच के लिए ग्वालियर से टीम गठित कर भेज रहे हैं। जांच के बाद दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। ऐसी जानकारी लगी है कि स्थानीय वन विभाग ने इस पर ध्यान नहीं दिया।


बीएस अन्नागिरी, सीसीएफ, ग्वालियर

Vivek Shrivastav Desk
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