कृष्ण जन्म पर देवकी वासुदेव की झांकी ने सभी को किया भाव विभोर

- भागवत कथा में देवकी वासुदेव विवाह व कृष्ण जन्म का प्रसंग सुनाया

By: Anoop Bhargava

Updated: 28 Feb 2021, 09:52 PM IST

ओछापुरा
श्रीमद भागवत कथा में हरीश शास्त्री बताते हैं कि अन्नदान, वस्त्रदान व द्रव्य यज्ञ से सत्संग यज्ञ सर्वश्रेष्ठ हैं। हिरणाकश्यप व प्रहलाद के चित्रण के माध्यम से बताया कि हिरणाकश्यप में तमो गुण, बुराई व दुष्ट था जबकि प्रहलाद सत्वगुणी थे। जिसकी लोभ में वृति हो गई वे हिरणाकश्यप बन गए। उन्होंने बताया कि जिस प्रकार पानी के बिना मछली नहीं रह सकती उसी प्रकार भागवत प्राणी ईश्वर के बिना अपने प्राण न्यौछावर कर देता हैं।
विपत्ति का अर्थ बताते हुए कहते हैं कि जहां ईश्वर का भजन नहीं वहां विपत्ति हैं। उन्होंने गृहस्थ जीवन के बारे में बताया कि गृहस्थ में विवाह पवित्र बंधन हैं। वे बताते हैं कि सूर्यास्त से पहले भोजन कर बीमारियों से दूर रह सकते हैं। कृष्ण अवतार के बारे में बताया कि कंस ने उनके माता-पिता को जेल में बंद किया व प्रजा पर जुल्म ढाने लगा। पृथ्वी को कंस के आतंक से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने कृष्ण अवतार लेकर कंस का नाश किया। इस दौरान कृष्ण जन्म की झांकी प्रस्तुत की गई जिसमें भक्तो ने वासुदेव देवकी की झांकी के दर्शन का आनंद लिया।

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