शहर के आसपास बसे हैं गांव, फिर भी प्रशासनिक दायरा विकासखंड कराहल का

श्योपुर जनपद पंचायत या शहरी सीमा में शामिल करने की कई बार कर चुके हैं मांग

श्योपुर. जिला मुख्यालय की शहरी सीमा के 2 से 4 किलोमीटर के दायरे में बसे होने के बावजूद इन गांवों के वाशिंदों को अपने शासकीय कामकाज और ग्रामीण विकास की योजनाओं का लाभ लेने के लिए 45 किलोमीटर दूर कराहल जाना पड़ता है। ऐसे में ग्रामीणों का समय और रुपए दोनों ही बर्बाद होते हैं। ये स्थिति है शहर से सटी चार ग्राम पंचायतों के उन आधा दर्जन गांवों की, जो न तो नगरपालिका की सीमा में है और न ही श्योपुर जनपद पंचायत के अधीन हैं, बल्कि शासन ने इन गांवों को विकासखंड कराहल में शामिल किया हुआ है, जिसके कारण यहां के वाशिंदों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।


ग्राम सलापुरा, कलारना, बगवाज, चैनपुरा, आनंदनगर, ढेंगदा, रामपुरा, सेमल्दा आदि गांव श्योपुर शहर से लगभग 2 से 4 किमी के दायरे में बसे हुए हैं। पिछले एक दशक के दौरान इन गांव की आबादी तेजी से बढ़ रही है। वर्तमान में इन गांव में 10 हजार से ज्यादा लोग रह रहे हैं, लेकिन ये सभी छह गांव श्योपुर विकासखंड के बजाय कराहल विकासखंड में आते हैं। यही वजह है कि इन गांव के लोग बसते जिला मुख्यालय पर हैं, लेकिन अपने शासकीय कामकाज और ग्रामीण विकास की योजनाओं के कामकाज के लिए कराहल जाना पड़ता है, जबकि यहां से कराहल 45 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इन गांवों के वाशिंदों को प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, मनरेगा सहित अन्य जनपद स्तरीय कार्यों के लिए कराहल के चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ता है। हालांकि ग्रामीण कई बार इन गांवों को शहरी सीमा में या श्योपुर जनपद में शामिल करने की मांग उठा चुके हैं, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया।


प्रशासन भी कराहल ब्लॉक की बगवाज पंचायत में


पूरे जिले की व्यवस्था संभाल रहा जिला प्रशासन भी शहरी सीमा में नहीं बल्कि आदिवासी विकासखंड कराहल की ग्राम पंचायत बगवाज में ही बैठता है। कलेक्ट्रेट, जिला पंचायत, जिला कोर्ट, जिला अस्पताल सहित ज्यादातर सरकारी कार्यालय नगरपालिका की सीमा में स्थित नहीं हैं। यह तमाम सरकारी कार्यालय भौगोलिक रूप से कराहल ब्लॉक की ग्राम पंचायत बगवाज के क्षेत्र में शामिल हैं। कलेक्टर-एसपी के आवास सहित अन्य प्रशासनिक अफसरों के आवास भी इसी क्षेत्र में आते हैं।


न शहरी सीमा में आए न श्योपुर जनपद में


इन आधा दर्जन गांवों के वाशिंदों को कराहल मुख्यालय तक आने-जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, लिहाजा शहरी सीमा और श्योपुर जनपद में शामिल किए जाने की मांग उठ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सलापुरा और बगवाज तो शहरी सीमा में शामिल होने के लिए प्रस्तावित किए गए थे, जबकि ढेंगदा, कलारना और सेमल्दा गांव श्योपुर जनपद में शामिल होने थे, लेकिन इस दिशा में शासन-प्रशासन ध्यान नहीं दे रहे हैं।


ये बोले लोग...


ढेंगदा ग्राम पंचायत कलेक्ट्रेट के ठीक सामने होने के बावजूद कराहल विकासखंड में शामिल है, जबकि कराहल की दूरी यहां से 45 किलोमीटर है। ऐसे में ढेंगदा सहित छह गांव श्योपुर जनपद में शामिल होने चाहिए।
लालचंद गुर्जर, ग्राम ढेंगदा
बगवाज कस्बा पूरी तरह शहर से सटा हुआ है, बावजूद इसके कराहल विकासखंड में शामिल होना कहीं से भी व्यवहारिक नहीं है, जिसके चलते ग्रामीण योजनाओं का लाभ भी पूरा नहीं मिल पाता है।
नरेंद्र कुमार, बगवाज
सेमल्दा गांव श्योपुर जिला मुख्यालय से महज 4 किलोमीटर दूर है, जबकि हमें कामकाज के लिए कराहल जाना पड़ता है। सेमल्दा को कराहल की बजाय श्योपुर विकासखंड में शामिल किया जाना चाहिए।
छीतर सिंह, सेमल्दा

यह सही बात है कि शहर से सटी कुछ पंचायतें कराहल ब्लॉक में आती हैं, लेकिन ब्लॉक का सीमांकन पूर्व में केंद्र से हुआ है, लिहाजा इसमें बदलाव केंद्र सरकार के स्तर से ही हो सकता है।
एसएस भटनागर, सीइओ, जनपद पंचायत कराहल

महेंद्र राजोरे Desk
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