मशीनों से काम, मजदूर बैठे हैं बेकार

तीन हजार से ज्यादा परिवार मजदूरी की तलाश में कर रहे जाने की तैयारी

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By: संजय तोमर

Published: 21 Jul 2021, 11:47 PM IST

कराहल. आदिवासी विकासखंड कराहल में मनरेगा के तहत हर दिन तीन से चार हजार मजदूरों को मजदूरी देने का दावा किया जा रहा है। हकीकत यह है कि मजदूरी न मिलने के कारण मजदूर पलायन करने को मजबूर हैं। कराहल क्षेत्र में अब तक तीन हजार आदिवासी परिवार पलायन कर गए। जबकि तीन हजार से ज्यादा परिवार मजदूरी की तलाश में पलायन करने की तैयारी कर रहे हैं।

बीते 20 दिन से डेढ़ से दो सैंकड़ा परिवार धान की पौध का रोपण करने के लिए पलायन कर चुके है। दरअसल मनरेगा में काम न मिलने पर मजदूरों ने किसानों से कोरोना महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन में धान की फ़सल रोपण करने एवज में एडवांस में मजदूरी का पैसा लेकर अपना गुजारा कर लिया था। अब मजदूरी के पैसे को अदा करने के लिए क्षेत्र के आदिवासी परिवार पलायन कर गए।
मनरेगा में चल रहे निर्माण कार्य ताल तलईया में हर दिन जिम्मेदार कागजो में चार से पांच हज़ार मजदूरों द्वारा मजदूरी करने का दावा कर रहे हैं। कागजी घोड़े दौड़ा कर हर रोज मनरेगा में मजदूरी के नाम मस्टररोल पर चढ़ाए जा रहे हैं। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि मनरेगा के काम मशीनों से कराए जा रहे हैं इनकी लगातार शिकायत भी अफसरों तक पहुंच रही हैं। बावजूद इसके जिम्मेदार अफसर मौन बैठे हुए हैं। जनपद पंचायत कराहल में 50 पंचायतों में 22 हजार के करीब एक्टिव जॉबकार्डधारी मजदूरों की हजारी कागजों में लगाई जा रही है। जनपद पंचायत कराहल की 50 पंचायतों में हर दिन जॉबकार्ड वाले मजदूरों के चार से पांच हजार मस्टर भरे जा रहे हैं।

एक साथ भीड़ में जा रहे है मजदूर

कोरोना महामारी की दूसरी लहर पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। दो गज की दूरी मास्क लगाए बिना लोग भीड़ के साथ में लोडिंग वाहनों में भरकर जा रहे है। कराहल वनांचल में धान की पौध का रोपण करने के लिए हर दिन मेटाडोर , पिकअप, ट्रैक्टर ट्रॉली से भरकर मजदूर जा रहे हैं। सोशल डिस्टेंशन मास्क का उपयोग नहीं किया जा रहा है। लोडिंग वाहनों पर भीड़ के साथ में मजदूर काम के लिए जा रहे हैं। मजदूर पप्पू आदिवासी का कहना है कि हम मजदूरों को कोरोना का ख़तरा भले ही हो लेकिन पेट की खातिर जाना पड़ता है।

अफसर बोले..हर बार जाते है धान की पौध रोपण करने
हर दिन चार से पांच हजार मजदूरों को मजदूरी मिल रही है। जहां तक पलायन की बात हैं तो धान पौध रोपण के लिए हर बार मजदूर जाते हैं। यह पलायन नहीं है वह वापस लौट आएंगे।
एसएस भटनागर, जनपद सीइओ,

संजय तोमर Desk
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