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जाओ पहले फोटो जमा कराकर आओ! फिर...

locationशिमलाPublished: Feb 01, 2024 11:24:49 pm

Submitted by:

satyendra porwal

हिमाचल: प्रवासी मजदूर की पहचान और सत्यापन आवश्यक
शिमला. जिला दंडाधिकारी ने यहां मानव जीवन एवं सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा के मद्देनजर दंड प्रक्रिया की धारा-144 के तहत आपातकालीन उपाय के रूप में आदेश पारित किए हैं। कोई भी नियोक्ता, ठेकेदार तथा व्यापारी जिला शिमला में आने वाले किसी भी प्रवासी मजदूर को छोटी-मोटी गैर-औपचारिक नौकरी या सेवा या अनुबंध श्रम में नहीं लगाएंगे। जब तक ऐसे प्रवासी मजदूर थाना अधिकारी के पास फोटो के साथ विवरण प्रस्तुत नहीं करते हैं।

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आगामी दो महीने की अवधि के लिए प्रभावी रहेंगे आदेश
आदेशों के अनुसार शिमला जिला का दौरा करने वाला कोई भी व्यक्ति संबंधित थाना प्रभारी को इस आशय की जानकारी दिए बिना किसी भी प्रकार के स्व-रोजगार, गैर-औपचारिक व्यापार, सेवाओं में अथवा रोजगार की तलाश में संलिप्त नहीं होगा। उल्लंघन करने वाले ऐसे प्रवासी मजदूरों और उनके नियोक्ता पर भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू होकर आगामी दो महीने की अवधि के लिए प्रभावी रहेंगे।
..... एक पक्ष यह भी: पहचान-सत्यापन क्यों जरूरी
गौरतलब है कि देश के सबसे विकसित राज्यों में से एक तमिलनाडु में बिहार और अन्य राज्यों के प्रवासी मजदूरों की समस्याओं का खुलासा हुआ था। राज्य में वास्तव में कई जगह प्रवासी मजदूरों के साथ मारपीट हुई। संयोग है कि जिस समय तमिलनाडु में हिंदी भाषी मजदूरों के साथ मार-पीट का कथित वीडियो आया, उसी समय कर्नाटक की राजधानी बेंगलूरु का भी वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ। इसमें ऑटो ड्राइवर हिंदी बोलने वाली महिला से बदतमीजी कर रहा था। ड्राइवर का दावा था है कि कर्नाटक उसकी जमीन है, वहां आने वालों को कन्नड़ बोलना होगा। तमिलनाडु और कर्नाटक की घटनाएं अपवाद नहीं हैं, बल्कि प्रवासी मजदूरों की मुश्किल बताने वाली प्रतिनिधि घटनाएं हैं।
भारत सबसे ज्यादा घरेलू प्रवासियों वाला देश
उल्लेखनीय है कि भारत सबसे ज्यादा घरेलू प्रवासियों वाला देश है। 140 करोड़ की आबादी वाले भारत में अंतरराज्यीय प्रवासी मजदूरों की संख्या 45.6 करोड़ है। यह आंकड़ा 12 साल पुराने 2011 की जनगणना के मुताबिक है। अभी तक 2021 में होने वाली जनगणना शुरू नहीं हुई है। इसी तरह देश के कुल वर्कफोर्स में करीब 13 फीसदी संख्या अंतरराज्यीय प्रवासी मजदूरों की है। अगर राज्य के भीतर होने वाले प्रवास को जोड़ें तो भारत का कुल 88 फीसदी मजदूर प्रवासी है। इससे यह साबित नहीं होता है कि भारत में विकास की जो गाड़ी चल रही है उसे खींचने और चलाने वाले प्रवासी मजदूर हैं!
प्रवासी मजदूरों की गिनती और सर्वेक्षण की जरूरत
चूंकि ज्यादातर प्रवासी मजदूर अकेले रहते हैं इसलिए भी वे आसान टारगेट होते हैं। पुलिस उनको अलग परेशान करती है। इन समस्याओं को देखते हुए सबसे पहले प्रवासी मजदूरों की गिनती और सर्वेक्षण की जरूरत है। किस राज्य में कितने प्रवासी मजदूर हैं, वे मूल रूप से कहां के रहने वाले हैं और किस सेक्टर में काम करते हैं, इसका वास्तविक आंकड़ा सरकार के पास होना चाहिए। सरकार राष्ट्रीय प्रवासी मजदूर नीति बनाने वाली है। उसके मसौदा दस्तावेज में सारे वास्तविक और अद्यतन आंकड़े होने चाहिए।

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