नेपाल से लौटे 17 ग्रामीण, सभी खांसी-जुकाम से पीडि़त

गुरुवार को पत्रिका रिपोर्टर ने गांव में कवरेज करने से पूर्व सीएमएचओ को अवगत कराया तो वे बोले कि हमें रात में ही पता चला है, टीम भेज रहे हैं, लेकिन यह टीम जब दोपहर 2 बजे तक नहीं पहुंची तो ग्रामीणों ने फिर पत्रिका रिपोर्टर से मोबाइल पर संपर्क किया।

By: shatrughan gupta

Published: 19 Mar 2020, 10:56 PM IST

शिवपुरी। शिवपुरी विकासखंड के ग्राम मालाखेड़ी में रहने वाले 17 महिला-पुरुष पैकेज पर होने वाली धार्मिक यात्रा करने नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर तक गए। जब ग्रामीण घर से रवाना हुए तो पूरी तरह स्वस्थ्य थे, लेकिन कुछ की तबियत यात्रा में ही बिगडऩे लगी तो कुछ वहां से लौटकर आने के बाद बीमार हो गए।

13 दिन से यह सभी ग्रामीण महिला-पुरुष खांसी व जुकाम से पीडि़त होने के साथ ही एक महिला को तो श्वांस लेने में भी परेशानी हो रही है। बावजूद इसके जिला प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग ने इनकी सुध नहीं ली। गुरुवार को पत्रिका रिपोर्टर ने गांव में कवरेज करने से पूर्व सीएमएचओ को अवगत कराया तो वे बोले कि हमें रात में ही पता चला है, टीम भेज रहे हैं, लेकिन यह टीम जब दोपहर 2 बजे तक नहीं पहुंची तो ग्रामीणों ने फिर पत्रिका रिपोर्टर से मोबाइल पर संपर्क किया।

सीएमएचओ को पुन: जब याद दिलाया, तब उन्होंने दोपहर 3 बजे जांच टीम को गांव में पहुंचाया। यह घटनाक्रम इस बात का उदाहरण है कि कागजों में अलर्ट प्रशासनिक व्यवस्थाएं धरातल पर पूरी तरह से लचर हैं।

पत्रिका रिपोर्टर को बुधवार की रात उक्त गांव में रहने वाले लोगों के नेपाल से लौटने की जानकारी मिली। गुरुवार की सुबह सीएमएचओ डॉ. एएल शर्मा को जब उक्त गांव के बारे में बताया, तो वे बोले कि हमारी टीम गांव पहुंच रही है। सुबह लगभग 8.30 बजे रिपोर्टर जब गांव में पहुंचा तो वहां पर सब कुछ सामान्य जैसा नजर आ रहा था |

लेकिन जैसे ही वहां रहने वाले लोगों से पूछा कि पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन करके कौन आए हैं तथा उनकी तबियत कैसी है, तो ग्रामीण बोले कि सभी खांसी-जुकाम से पीडि़त हैं। गांव में स्थित हनुमानजी के मंदिर के पास रहने सिरनाम सिंह रावत ने जब देखा कोई पूछताछ करने आया है, तो वे न केवल खुद बल्कि उन सभी को बुलवाया, जो उनके साथ धार्मिक यात्रा पर गए थे।

सिरनाम सिंह ने बताया कि हमारे गांव से 17 महिला-पुरुष यात्रा पर 4 फरवरी को गए थे और नेपाल में पशुपति नाथ मंदिर के भी दर्शन किए। सिरनाम ने बताया कि कोरोना वायरस के बारे में जानकारी है, क्योंकि किसी को मोबाइल लगाते हैं तो पहले उसी के बारे में बताया जा रहा है।

सिरनाम ने बताया कि जब हम यात्रा पर गए थे, तब न खांसी थी न जुकाम था, लेकिन वहां से लौटने के बाद दोनों ही चीज हो गईं।

हमें नहीं कोरोना, लेकिन खांसी बहुत है


इस धार्मिक यात्रा में शामिल रहे सरबन रावत ने बताया कि जब हम यात्रा पर गए तो कुछ नहीं था, लेकिन वहां से लौटकर आने के बाद सूखी खांसी इतनी आ रही है कि बेचैनी बढ़ जाती है। साथ ही जुकाम व बलगम भी आ रहा है। सरवन ने बताया कि कोरोना क्या है, यह हमें पता नहीं है, लेकिन वहां से लौटने के बाद तबियत जरूर खराब हो गई।

हांफती हुईं आईं अशरफी


तीर्थ यात्रियों में शामिल अशरफी बाई को जब पता चला कि कोई तबियत की पूछने आया है तो वे मंदिर परिसर में हांफती हुई आईं। अशरफी ने बताया कि हम घर से तो पूरी तरह से स्वस्थ्य गए थे, लेकिन रास्ते में ही हमारी तबियत बिगडऩे लगी। यात्रा के दौरान ही 2-3 हजार रुपए दवाई में खर्च हो गए, खांसी के साथ जुकाम व बुखार भी आ गया था। अभी भी अशरफी की तबियत पूरी तरह से ठीक नहीं है।

यात्रा पर ये गए थे ग्रामीण


ग्राम मालाखेड़ी से धार्मिक यात्रा पर जाने वाले ग्रामीणों में पूरन सिंह रावत, देवेंद्र, अशरफी, गंगावती, सरदार सिंह, केसरबाई, सिरनाम सिंह, दुलारी, रणवीर सिंह, गिन्नी बाई, सरवनलाल रावत, गीता बाई, खचेरा, कटोरी बाई, सुरेश, पार्वती, मचला बाई व छोटी बालिका रागिनी शामिल हैं। उक्त सभी लोग बीमार हैं तथा छोटी बच्ची को भी बुखार आ रहा है।

स्वास्थ्य विभाग के अलर्ट पर सवाल


चूंकि पत्रिका रिपोर्टर वहां रहने वाले सिरनाम रावत को अपना मोबाइल नंबर देने के साथ ही उन्हें यह आश्वस्त करके आया कि जल्दी ही स्वास्थ्य विभाग की टीम आने वाली है। दोपहर 12 बजे सिरनाम ने फोन करके बताया कि अभी तक तो कोई नहीं आया, तो फिर सीएमएचओ से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि हमारी टीम तो रवाना हो गई, लेकिन शायद वो दूसरे गांव निकल गई।

सीएमएचओ ने महामारी नियंत्रक लालजू शाक्य जो, टीम के साथ रवाना हुए। इस दौरान सिरनाम सिंह का एक बार फिर फोन आ चुका था। जिसमें उसने बताया कि यात्रा से लौटे सरबन की हालत अधिक खराब हो रही है। सीएमएचओ ने फिर टीम से संपर्क किया होगा, तो ड्राइवर सहित तीन सदस्यीय टीम दोपहर 3 बजे गांव पहुंची।

टीम की कारस्तानी, सिरनाम की जुबानी


खांसी-जुकाम से पीडि़त सिरनाम रावत ने पत्रिका को बताया कि ड्राइवर सहित तीन लोग आए थे, लेकिन उनके पास जांच करने की कोई मशीन नहीं थी। न ही उनके पास खांसी-जुकाम की कोई गोली-दवा थी। उन्होंने सभी को बुलाकर बातचीत कर ली और सरवन को अधिक खांसी होने की वजह से उससे कहा कि तुम्हे हम ग्वालियर में चेकअप के लिए भेज देते हैं, यदि तुम्हे कोरोना होगा तो पता चल जाएगा।

डर की वजह से सरवन ग्वालियर नहीं गया और टीम ऐसे ही वापस लौट गई। सिरनाम काकहना था कि यह कैसी जांच टीम है, जो बिना मशीनों के आई और गोली-दवा दिए बगैर ही चली गई। कुछ नहीं तो कम से कम खांसी-जुकाम की दवा ही दे जाती।

टीम प्रभारी आउट ऑफ कवरेज, सीएमएचओ ने नहीं उठाया फोन


स्वास्थ्य विभाग की इस लचर कार्यप्रणाली के संबंध में जब महामारी नियंत्रक व टीम प्रभारी लालजू शाक्य से मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया तो उनका मोबाइल आउट ऑफ कवरेज एरिया का मैसेज देता रहा।

जबकि सीएमएचओ डॉ. अर्जुनलाल शर्मा ने फोन ही रिसीव नहीं किया। संभवत: जिम्मेदारों ने संदिग्ध मरीजों के बावजूद उनके लिए सुरक्षा के उपाय नहीं किए, इसीलिए उन्होंने जवाब देने से परहेज कर लिया।


मालाखेड़ी गांव के मंदिर पर बैठे यात्रा से लौटे कुछ ग्रामीण अपनी ब्यथा सुनाते हुए, साफी डालकर बैठे सरवन रावत, जिन्हें अधिक खांसी आने से तबियत खराब हैं

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