जिला अस्पताल में डिस्चार्ज के 24 घंटे बाद मिली एंबुलेंस

वाहन का इंतजार करते हुए 24 घंटे गुजर गए, तब कहीं जाकर उसे एंबुलेंस मिल सकी। जबकि दूसरी ओर लॉकडाउन के दौरान कुछ एंबुलेंस सवारियों को सीमा पार करवाने के बदले मोटी रकम वसूल करने में लगी हुई हैं।

By: rishi jaiswal

Published: 18 Apr 2020, 09:15 PM IST

शिवपुरी। जिले की नरवर जनपद के अंतर्गत आने वाले ग्राम कोडर में रहने वाली एक महिला का पैर फैक्चर हो जाने से वो 14 अप्रैल को भर्ती कराई गई, लेकिन ऑपरेशन न होने की वजह से उसे कच्चा प्लास्टर चढ़ाकर शुक्रवार दोपहर डिस्चार्ज कर दिया।

वाहन का इंतजार करते हुए 24 घंटे गुजर गए, तब कहीं जाकर उसे एंबुलेंस मिल सकी। जबकि दूसरी ओर लॉकडाउन के दौरान कुछ एंबुलेंस सवारियों को सीमा पार करवाने के बदले मोटी रकम वसूल करने में लगी हुई हैं।

ग्राम कोडर निवासी गीता (30) पत्नी मुरारी जाटव, को अपने गांव में ही मवेशियों की लड़ाई में पैर में गंभीर चोट आ गई थी। गीता को बीते 14 अप्रैल को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन कोरोना के फेर में उसका ऑपरेशन नहीं किया गया। गीता के पैर में कच्चा प्लास्टर चढ़ाने के बाद उसे 17 अप्रैल दोपहर 12.27 बजे डिस्चार्ज का पर्चा थमा दिया गया।

चूंकि महिला के पैर में गंभीर चोट थी और कच्चा प्लास्टर होने की वजह से उसे बाइक या किसी साधन से नहीं ले जाया जा सकता था। अस्पताल प्रबंधन ने उसके पति को भरोसा दिलाया कि हम एंबुलेंस भिजवा रहे हैं, लेकिन वो नहीं आई।

वहीं दूसरी ओर रात में ड्यूटी नर्सों ने उसका डिस्चार्ज पर्चा देखकर कहा कि तुम यहां पलंग क्यों घेरे हुए हो, अपने घर जाओ। तब उसके पति ने कहा कि एंबुलेंस तो अभी तक आई नहीं, कैसे घर ले जाएं। आज सुबह 11 बजे एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई, तब कहीं जाकर गीता अपने घर रवाना हो सकी।

वहीं इसके उलट जिला अस्पताल से मरीजों को ले जाने वाली कुछ एंंबुलेंस इन दिनों अतिरिक्त कमाई के लिए सवारियों को मरीज बनाकर सीमा पार करवा रही हैं, इसके एवज में वे 5 हजार रूपए तक वसूल रहे हैं। चूंकि सीमा पर एंबुलेंस को नहीं रोका जाता, जिसका फायदा यह एंबुलेंस संचालक उठा रहे हैं।

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