एक ही कमरे में लग रहीं कक्षा एक से 5 तक की कक्षाएं

शिक्षा का मखौल: कक्षा एक से पांच तक में 28 बच्चे, शिक्षक दो, खर्च एक लाख हर माह

By: shyamendra parihar

Published: 24 Jan 2018, 10:28 PM IST

शिवपुरी. जिला मुख्यालय पर ही सरकारी स्कूलों में शिक्षा के हालात कितने बदहाल हैं, उसकी नजीर शहर के वार्ड क्रमांक एक में स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय नौहरीखुर्द में नजर आए। इस प्राथमिक स्कूल में कक्षा 1 से 5 तक में कुल 28 बच्चे दर्ज हैं, तथा उन्हें पढ़ाने की जिम्मेदारी 2 शिक्षकों पर है। इनमें से एक शिक्षक तो अधिकांशत: स्कूल से गायब रहते हैं। इसलिए एक शिक्षक, पांचों कक्षाओं के बच्चों को एक कमरे में बिठाकर अपना समय गुजार रहे हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि दो शिक्षकों के वेतन पर हर माह शासन लगभग 1 लाख रुपए खर्च कर रही है, जबकि इसमें से आधी राशि खर्च करके इन बच्चों को शहर के बेहतर प्राइवेट स्कूल में पढ़ाया जा सकता है। चूंकि एक ही कमरे में सभी कक्षाओं के बच्चे बैठते हैं, तो उनके शैक्षणिक स्तर का अंदाजा लगाया जा सकता है।
इसलिए है शिक्षा का मखौल
शिवपुरी जिला मुख्यालय पर जब ऐसे प्राइवेट स्कूल ढूंढे गए, जिनमें वाहन चलते हैं, तो उनकी संख्या 35 से अधिक रही। जबकि इससे दुगने प्राइवेट स्कूल ऐसे संचालित हो रहे हैं, जिनमें वाहन सुविधा नहीं है। इतना ही नहीं ऐसे ही बिना मान्यता के कक्षाएं संचालित करने वाले 11 स्कूलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराए जाने के आदेश दो दिन पूर्व ही कलेक्टर ने जारी किए हैं। गली-मौहल्लों में खुले प्राइवेट स्कूल इस ओर इशारा कर रहे हैं कि इस कारोबार में लोगों को मुनाफा है और हर कोई अपने बच्चे को अच्छे प्राइवेट स्कूल में पढ़ाना चाहते हैं। क्योंकि सरकारी स्कूलों में हालात ऐसे ही हैं, जो जिला मुख्यालय के नौहरीखुर्द में हैं। जबकि सरकार न केवल थोकबंद शिक्षकों पर हर महीने करोड़ों रुपए वेतन पर तथा स्कूल भवन एवं नि:शुल्क डे्रस, पुस्तकों, मध्यान्ह भोजन व अन्य सामग्री में अरबों रुपए खर्च कर रही है। बावजूद इसके परिणाम वो नहीं आ रहा, जितना खर्च हो रहा।
कक्षाओं में दर्ज बच्चों के आंकड़े भी चौंकाने वाले : नौहरीखुर्द प्राथमिक स्कूल में कुल 28 बच्चे दर्ज हैं, जिनमें कक्षा 1 में 6 , कक्षा 2 में 6 , कक्षा 3 में 4, कक्षा 4 में 6 व पांचवी में भी 6 ही बच्चे दर्ज हैं। पांचों कक्षाओं के कुल बच्चे 28 हैं, जिन्हें पढ़ाने के लिए प्रभारी प्रधानाध्यापक वीरेंद्र शर्मा व दूसरे शिक्षक धर्मेंद्र जैन यहां पदस्थ हैं। जबकि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत यह नियम है कि 30 बच्चों पर एक शिक्षक पदस्थ होना चाहिए।

हमारे स्कूल में कुल 28 बच्चे दर्ज हैं, जिन्हें पढ़ाने के लिए मैं व एक अन्य धर्मेंद्र जैन हमारे साथी शिक्षक हैं। आज वो अवकाश पर गए हैं। हर कक्षा में बच्चे 4 से 6 हैं, इसलिए सभी को एक ही कमरे में बिठा लिया है।
वीरेंद्र, श्रीवास्तव शाला प्रभारी प्रावि नौहरीखुर्द

यह तो नियम ही नहीं है कि एक ही कमरे में सभी कक्षाओं को बिठाकर पढ़ाया जाए। यदि एक ही शिक्षक है, तो भी वो दो से तीन कमरों में अलग-अलग बच्चों को बिठाकर पढ़ा सकता है। शहर के नजदीक ही यह स्कूल है, तो इसमें हम पता करते हैं। यह बात सही है कि शासन शिक्षा पर बहुत राशि खर्च कर रही है।
शिरोमणि दुबे, डीपीसी जिला शिक्षा केंद्र शिवपुरी

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