पत्रिका में प्रकाशित खबर के बाद बच्चों को बांटा गया अनाज

इस पर पत्रिका ने पूरे मामले को प्रमुखता से उठाया और खाद्यान वितरण की हकीकत से रूबरू होने के लिए कई अलग-अलग इलाकों में जाकर पड़ताल की। पत्रिका में प्रकाशित खबर के उपरांत शुक्रवार से दर्जनों स्कूलों में बच्चों को खाद्यान वितरण किया गया।

By: rishi jaiswal

Published: 18 Apr 2020, 06:40 PM IST

शिवपुरी। शासन द्वारा सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों को लॉकडाउन की स्थिती में खाद्य सुरक्षा भत्ता मुहैया कराने के लिए शासन ने प्रत्येक बच्चे के लिए गेहूं व चावल भिजवाया है, परंतु शिवपुरी में यह गेहूं व चावल चुनिंदा स्कूलों को छोड़कर किसी को नहीं बांटा गया।

इस पर पत्रिका ने पूरे मामले को प्रमुखता से उठाया और खाद्यान वितरण की हकीकत से रूबरू होने के लिए कई अलग-अलग इलाकों में जाकर पड़ताल की। पत्रिका में प्रकाशित खबर के उपरांत शुक्रवार से दर्जनों स्कूलों में बच्चों को खाद्यान वितरण किया गया।

इन स्कूलों में शहर से लेकर गांव तक स्कूल शामिल हैं। खाद्यान वितरण के दौरान मोहिनी सागर स्कूल में समूह संचालक की चोरी पकड़ में आ गई है।

उल्लेखनीय है कि जिला पंचायत शिवपुरी से एक मध्हन भोजन कार्यक्रम जारी किया गया था, जिसके तहत मार्च-अप्रैल 2020 के शैक्षणिक कार्य दिवसों में छात्रों को खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के प्रावधान अनुसार मार्च के 11 दिनों और अप्रैल के 22 दिनों का खाद्यान स्कूल में दर्ज शत-प्रतिशत बच्चों को दिया जाना था।

15 अप्रैल बीत जाने बाद भी कुछ स्कूलों को छोड़कर कहीं खाद्यान वितरण नहीं किया गया। इस मामले को 16 अप्रैल के अंक में पत्रिका ने 'स्कूली बच्चों के लिए शासन ने भेजे गेहूं और चावल, नहीं पहुंचे उनके घर' नामक शीर्षक से हितग्राही बच्चों और उनके परिजनों की जुबानी ही पूरे मामले को प्रकाशित किया।

उक्त खबर के प्रकाशन के उपरांत आनन फानन में लीड संस्थाओं से खाद्यान स्कूलों तक भिजवाया गया। इसी क्रम में शुक्रवार को नयागांव, इंदरगढ़, चक रतनपुर, सईसपुरा, फतेहपुर, छावनी सहित कई अन्य स्कूलों में बच्चों को बुलवा कर खाद्यान का वितरण किया गया।

नयागांव में शिक्षकों ने सबसे पहले बच्चों के हाथ सेनेटाइज करवाए, मुंह पर कपड़े बंधवाए और स्वयं ग्लब्ज, मास्क आदि पहन कर बच्चों को खाद्यान वितरित किया। अधिकतर स्कूलों में खाद्यान वितरण के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया गया।

शनिवार को मोहिनी सागर स्कूल में प्राथमिक विद्यालय में अल्ला गवाह समूह ने खाद्यान वितरण किया तो माध्यमिक विद्यालय में पीताम्बरा स्व-सहायता समूह ने बच्चों को खाद्यान वितरण किया।

स्व-सहायता समूह की संचालक के पति रमेश राठौर ने सभी बच्चों की तरह तीन भाई बहनों नितिन, हनी, रागिनी सेन को भी एक डोंगे में भरकर खाद्यान दिया। तीनों बच्चों का खाद्यान 14 किलो 850 ग्राम होना चाहिए था, परंतु जब नंदकिशोर ने उक्त खाद्यान को तराजू पर तुलवाया तो प्रत्येक बच्चे को करीब डेढ़ किलो कम खाद्यान दिया गया था।

इस संबंध में जब नंदकिशोर से बात की गई तो उसका कहना था कि थोड़ा बहुत कम ज्यादा तो हो जाता है। यह खाद्यान सिर्फ तीन बच्चों को नहीं लगभग सवा सौ बच्चों को कम दिया गया है। इसी तरह से मोहिनी सागर के प्रायमरी स्कूल में भी खाद्यान कम बांटे जाने की बात भी बात भी सामने आ रही है।

शत-प्रतिशत खाद्यान मिलने पर उठे सवाल

इस पूरे मामले में जब स्कूल की प्रभारी सरला श्रीवास्तव से बात की गई तो उनका कहना था कि पीताम्बरा स्व-सहायता समूह को 80 प्रतिशत खाद्यान मिला था, जबकि अल्ला गवाह समूह को 60 प्रतिशत खाद्यान मिला था।

इस कारण उसने करीब एक-एक किलो खाद्यान बचा लिया होगा। वहीं दूसरी ओर एमडीएम प्रभारी सीमा उपाध्याय का दावा है कि सभी समूहों को शत प्रतिशत बच्चों के मान से खाद्यान आवंटित किया गया है।

ऐसे में विचारणीय पहलू यह है कि इस स्कूल में बच्चों का खाद्यान आखिर कौन खा गया ? अगर समूह संचालक का कहना सही है तो फिर यह चोरी जिलेभर के हजारों स्कूलों में की जा रही होगी।

ये बोले जिम्मेदार

मैंने समूह संचालक को नोटिस जारी कर उससे जबाब मांगा है कि आखिर उसने बच्चों को खाद्यान कम क्यों दिया। उक्त नोटिस की कॉपी बीआरसीसी कार्यालय में भी भिजवा दी गई है।

सरला श्रीवास्तव
स्कूल प्रभारी, मोहिनी सागर

-स्कूल प्रभारी और समूह संचालक का कहना गलत है कि उन्हें खाद्यान कम मिला है, भोपाल से पोर्टल पर दर्ज छात्र संख्या के मान से खाद्यान आवंटित किया गया है। बच्चों को खाद्यान बांटने का जो माप बनाया गया है वह भी इसी हिसाब से बनाया है कि शत प्रतिशत बच्चों को खाद्यान मिल जाए।

एचपी वर्मा, जिपं सीईओ

ये बोले अभिभावक

मैं अपने 3 बच्चों का गेहूं लेने के लिए गया था, तीनों बच्चों का गेहूं डोंगे में भर कर दिया। यह गेहूं जब मैंने चक्की पर जाकर तुलवाया तो कम निकला।

नंदकिशोर सेन
बच्चों के अभिभावक

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