दिहायला झील से रूठे विदेशी मेहमान, इस बार कम आए प्रवासी पक्षी

अतिक्रमणकारियों की वजह से दिहायला झील पर मंडराता संकट
जिम्मेदार अधिकारियों का नहीं ध्यान

करैरा. सर्दी के मौसम में प्रवासी पक्षियों के बसेरे के लिए प्रसिद्ध जिले के करैरा क्षेत्र के सोनचिडिय़ा अभ्यारण्य की दिहायला झील जो राजपुर व दिहायला गांव की सीमा में फैली हुई है। इस झील में हर साल बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते थे, लेकिन दिनों-दिन झील में हो रही पानी की कमी के कारण अब यहां पर आने वाले पक्षियों की संख्या कम हो गई है। इधर जिम्मेदार अधिकारी इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक करैरा अभयारण्य क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली दिहायला झील को दूर देशों से आने वाले प्रवासी परिंदों का हर साल इंतजार रहता है। पहले के कुछ सालों में जलक्रीड़ा तथा भोजन के लिए यहां हजारों की संख्या में विदेशी परिंदों का आना होता था, लेकिन झील में लगातार होती पानी की कमी तथा आसपास हुए अवैध अतिक्रमणों के चलते पिछले तीन-चार वर्षों से यहां आने वाले प्रवासी पक्षियों की संख्या में गिरावट आई है। यहां आने वाले विदेशी मेहमान पक्षियों की इस बेरुखी पर करैरा अभयारण्य तथा राजस्व अधिकारियों का अब तक ध्यान नहीं गया है। इस वर्ष बमुश्किल झील पर लगभग 1000 प्रवासी परिंदों का आगमन हो सका है, जिनमें विदेशी मेहमान पक्षियों की संख्या नाममात्र की है। यह पक्षी अक्टूबर माह में आकर करीब 4 माह तक यहां रुकते हैं। झील में पानी की कमी, अतिक्रमण के अलावा यहां पर पक्षियों का शिकार भी होता है जिस फेर में हर साल पक्षियों के आने की संख्या में गिरावट है।

झील में इन मेहमान परिंदों की होती रही है आवक

दिहायला झील पर विशेष तौर पर पेंटेड स्ट्रोक, लौह सारस, पैराडाइज, फ्लाईकैचर, गोल्डन औरियल, कामोरंट, मोरहंस जैकाना, ग्रैट स्पोटेड ईगल, किंगफिशर हेरोइन, आइबिस क्रेन, बारहेडेड गीज, पेलीकेन, फलाईमेनगो, साइबेरियन क्रेन कोमन टेल, स्पूनविल, सावकलर, विजियन विदेशी मेहमान तथा भारतीय पक्षियों में पनकौआ, खेरा, भारतीय सारस, सफेदबाज, कालाबाज, जांघिल, घोंचिला, गिरिया, पिट्टो, नीलकंठ, छोटा बाबुई बटन, गजपाउन, जंगली मैना, उल्लू आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं।

यह बोले जिम्मेदार

यह बात सही है कि इस साल प्रवासी पक्षी कम संख्या में आए हैं। हमें भी दिहायला झील की विजिट बर्ड फ्लू के चलते की है। इसमें 5 बाहर की प्रजातियां और लोकल के पक्षी थे। इस साल बारिश कम होने से हो सकता है संख्या कम रही हो। इसके अलावा भौगोलिक परिस्थितियां पक्षियों की हैबिट भी कम संख्या होने के कारण हो सकते हैं।
अनुराग तिवारी, रैंजर, वन विभाग व प्रभारी अभ्यारण करैरा

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महेंद्र राजोरे Desk
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