नेशनल पार्क ईको सेंसेटिव जोन घोषित

शहरी क्षेत्र में 500 व ग्रामीण में 2 किमी क्षेत्र में नहीं होगी कोई गतिविधि

By: shyamendra parihar

Published: 12 Nov 2017, 11:38 PM IST

शिवपुरी. माधव नेशनल पार्क शिवपुरी को ईको सेंसटिव जोन घोषित करने के साथ ही उसका नोटिफिकेशन भी हो गया। अब शहरी क्षेत्र में 500 मीटर एवं ग्रामीण क्षेत्र में 2 किमी तक कोई भी ऐसी गतिविधि नहीं होगी, जिससे वन्यजीवों के लिए कोई खतरा हो। नोटिफिकेशन के साथ ही गतिविधियां भी चिह्नित की गईं हैं, जिन पर प्रतिबंध रहेगा। चिह्नित की गई गतिविधियों का पत्र अभी नेशनल पार्क प्रबंधन के पास शासन स्तर से आना है।


शिवपुरी माधव नेशनल पार्क सहित प्रदेशभर के सभी ऐसे क्षेत्र, जहां पर वन्यजीवों की बसाहट है, उन्हें ईको सेंसटिव जोन घोषित किया है। चूंकि माधव नेशनल पार्क के नजदीक करौंदी क्षेत्र में पहले से ही रिहायशी बस्ती बसी हुई है, इसलिए उन भवनों को तो नहीं हटाया जाएगा। लेकिन अब पार्क सीमा से 500 मीटर दूर तक कोई भी नया निर्माण नहीं किया जा सकेगा। इतना ही नहीं पार्क के नजदीक इस रिहायशी क्षेत्र में कोई भी ऐसा कारोबार या उद्योग नहीं लगाया जा सकेगा, जिससे ध्वनि अथवा वायु प्रदूषण होता हो। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में माधव नेशनल पार्क की सीमा से 2 किमी दूर तक किसी भी तरह की कोई ऐसी गतिविधि जैसे मायनिंग अथवा क्रेशर आदि नहीं लगाया जा सकेगा, जिससे होने प्रदूषण वन्यजीवों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
चूंकि सेंसटिव जोन का कुछ समय पूर्व ही नोटिफिकेशन हुआ है, इसलिए पार्क प्रबंधन को गाइड लाइन का इंतजार है। जैसे ही गाइड लाइन आएगी, तत्पश्चात उसके अनुरूप ही एरिया चिह्नित करके होने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जाकर उन पर प्रतिबंध भी लगाया जाएगा। इन हालातों के बीच कोटा-झांसी फोरलेन के आसपास संचालित क्रेशर व खदान क्षेत्रों पर सेंसटिव जोन की गाज गिर सकती है। क्योंकि इस एरिया में ध्वनि व वायु प्रदूषण फैलाने वाले कारोबार संचालित किए जा रहे हैं।


टाइगर सफारी का भेजा प्रस्ताव
शिवपुरी में टाइगर सफारी को शुरू किए जाने का प्रस्ताव शासन स्तर पर भेजा गया है। ज्ञात रहे कि प्रदेश में कई जगह टाइगर सफारी खोले जाने हैं, जिसमें ग्वालियर को भी शामिल किया गया था। चूंकि ग्वालियर में इतना अधिक जंगल व एरिया नहीं है, इसलिए वहां प्रस्तावित टाइगर सफारी को शिवपुरी के नेशनल पार्क में ट्रांसफर किया जाएगा। शिवपुरी नेशनल पार्क से टाइगर सफारी का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, अब निर्णय शासन को करना है।

ये हैं नेशनल पार्क क्षेत्र के हालात

नेशनल पार्क के दक्षिण क्षेत्र में करौंदी बस्ती बसी हुई है। यहां रहने वाले लोगों ने खुले में शौच जाने के लिए नेशनल पार्क की बाउंड्री को तोड़ दिया है, जिसके माध्यम से वहां के लोग पार्क के अंदर ही फ्रेश होने जाते हैं।
- पार्क की बाउंड्री जगह-जगह से क्षतिग्रस्त होने एवं जालियां टूटी होने की वजह से हर दिन सुबह से ही आवारा मवेशियों को पार्क के अंदर कर दिया जाता है। जिसके चलते वन्यजीवों के साथ-साथ मवेशी भी पार्क की हरियाली चर रहे हैं।
- माधव नेशनल पार्क के कुछ कर्मचारियों से सांठगांठ करके मछली का शिकार करने वाले शिकारी आए दिन रात के अंधेरे में अंदर जाकर जाल फैलाते हैं और मछली का शिकार करते हैं।
- पार्क एरिया में हवाई पट्टी सहित अन्य क्षेत्रों में से लकड़ी काटने वाले भी गुपचुप अंदर घुस जाते हैं तथा शाम को लकडिय़ों के गट्ठर लेकर निकलते हैं। हवाई पट्टी एरिया एवं सतनबाड़ा क्षेत्र में शाम होते ही इस तरह के नजारे आम हैं।


प्रदेश भर के पार्कों को ईको सेंसटिव जोन घोषित किया गया है, जिसका नोटिफिकेशन भी हो गया। नेशनल पार्क क्षेत्र में जो रिहायशी मकान पहले से बन गए हैं, उन्हें छोडक़र कोई नया निर्माण नहीं किया जा सकेगा।
एचएस मोहंता, डायरेक्टर माधव नेशनल पार्क

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