30 बिस्तर के अस्पताल में 15 साल में भर्ती नहीं हुआ एक भी मरीज

हर दिन आते हैं 6 0 से 70 मरीज, पंचकर्म मशीन भी महीनों से खराब

शिवपुरी. शहर के पुरानी शिवपुरी में स्थित जिला आयुर्वेद अस्पताल को 30 बिस्तरीय तो बनाया गया, लेकिन उसमें अभी तक एक भी मरीज भर्ती नहीं हुआ। इसकी मुख्य वजह यह है कि अस्पताल को अभी तक कोई स्थाई डॉक्टर नहीं मिल सका। इतना ही नहीं अभी तक एक भी बार रोगी कल्याण समिति की बैठक भी यहां नहीं हुई। पंचकर्म की मशीनें महीनों से खराब पड़ी हैं, लेकिन उनकी सुध किसी ने नहीं ली। अस्पताल में हर दिन 6 0 से 70 मरीज आते हैं, लेकिन कई बार भर्ती होने वाले मरीज को भी यहां नहीं रख पाते। यहां पर कुल पांच पद हैं, लेकिन इनमें से कोई भी नहीं भरा है, दूसरी तहसील में पदस्थ दो डॉक्टर तीन-तीन दिन अपनी सेवाएं यहां देकर मरीजों का उपचार कर रहे हैं।


शिवपुरी में जिला आयुर्वेद अस्पताल की बिल्डिंग वर्ष 2002 में बन गई थी और वर्ष 2004 में अस्पताल शुरू हो गया था, लेकिन इन 15 वर्षों में यहां कोई स्थाई डॉक्टर व स्टाफ पदस्थ नहीं किया जा सका। स्थाई डॉक्टर न होने से कई बार गंभीर मरीजों को भी यहां भर्ती नहीं किया जाता, क्योंकि उसकी मॉनीटरिंग के लिए कोई स्थाई चिकित्सक नहीं है। वर्तमान में यहां डॉ. अभिषेक तोमर तीन दिन सोम, मंगल व बुध को तथा डॉ. अभिषेक गोयल गुरु, शुक्र व शनिवार को अपनी सेवाएं देते हैं। डॉ. तोमर जहां खरैह में पदस्थ हैं, वहीं डॉ. गोयल सिरसौद में अपनी सेवाएं देते हैं, लेकिन जब यह डॉक्टर जिला अस्पताल में आ जाते हैं तो वहां सेवाएं ठप हो जाती हैं। अस्पताल में पांच पद स्वीकृत हैं, जिनमें एक विशेषज्ञ, एक आरएमओ, एक पुरुष व एक महिला चिकित्सक व स्वीपर के पद हैं। इनमें से कोई भी पद नहीं भरा जा सका। वर्तमान में यहां दो महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से सेवाएं ली जा रही हैं। यहां साफ-सफाई के लिए पार्ट टाइम कर्मचारी लगाया है, जो दो घंटे के लिए आकर सफाई करके चला जाता है। जबकि खल्लासी के पद पर पदस्थ बृजेश कोली को पिछले दो साल से जिला आयुष अधिकारी ने अपने ऑफिस में अटैच कर रखा है।


दो साल से रखा योगा का सामान
आयुर्वेद अस्पताल में आने वाले विभिन्न रोगों के मरीजों को योगा से स्वस्थ्य करने के लिए योगा का सामान दो साल पूर्व यहां आ चुका है, लेकिन वो अभी तक बोरियों से बाहर नहीं आया, क्योंकि अभी तक कोई योगा ट्रेनर की नियुक्ति ही नहीं की गई। जबकि आयुर्वेद में खान-पान व योगा का विशेष महत्व होता है।


2 रुपए रसीद के, 10 रुपए सीरप के
जिला आयुर्वेद अस्पताल के ओपीडी प्रभारी राकेश डागौर ने बताया कि यहां आने वाले मरीजों से 2 रुपए पर्चे के तथा सीरप के बदले में 10 रुपए की राशि ली जाती है। यहां सीनियर सिटीजन से भी उक्त राशि ली जाती है। डागौर ने बताया कि कई बार सीनियर सिटीजन इस बात को लेकर विवाद भी करते हैं,।


पंचकर्म की मशीन महीनों से खराब
विभिन्न रोगों से पीडि़त मरीजों के शरीर की सिकाई के लिए जिला आयुर्वेद अस्पताल पंचकर्म की मशीन भी हैं, लेकिन वो भी महीनों से खराब पड़ी है। जिसके चलते मरीजों को बाजार में सिकाई के लिए जाना पड़ता है, जिसमें उनसे 1 से डेढ़ हजार रुपए की राशि खर्च होती है, जबकि यहां पर यह सुविधा नि:शुल्क है। जिम्मेदार अधिकारियों ने अभी तक इस मशीन को सुधरवाने की दिशा में कोई पहल नहीं की।
हर माह जमा हो रही रोगी कल्याण में राशि
जिला आयुर्वेद अस्पताल में आने वाले मरीजों से ली जाने वाली राशि हर माह रोगी कल्याण समिति के खाते में जमा हो रही है, लेकिन अभी तक उक्त राशि को अस्पताल की किसी भी सुविधा में उपयोग नहीं किया गया। इतना ही नहीं अभी तक एक भी बार समिति की बैठक ही नहीं हुई, जिसमें अस्पताल से संबंधित समस्याओं पर कोई चर्चा की जा सके।

हर दिन 6 0 से 70 मरीज आते हैं, जिनमें से अधिकांश उदर रोग (पेट से संबंधित बीमारी) व जोड़ों के दर्द के अलावा चर्म रोग के मरीज भी आते हैं। एलोपैथी से निराश होकर व उसके साइड इफेक्ट झेल चुके कई मरीज आयुर्वेद से उपचार कराने आ रहे हैं। चूंकि इसका असर धीरे-धीरे होता है, लेकिन बीमारी पूरी तरह से खत्म हो जाती है।
डॉ. अभिषेक गोयल, जिला आयुर्वेद अस्पताल शिवपुरी


&यह बात सही है कि कोई स्थाई डॉक्टर न होने से मरीज भर्ती नहीं किए जा रहे। रोगी कल्याण समिति बैठक भी नहीं हुई है, लेकिन जो राशि जमा की जा रही है, उसकी ऑडिट होती है। पंचकर्म मशीन को सुधारने वाला कोई एक्सपर्ट यहां नहीं है। पूरे जिले में पांच डॉक्टर ही हैं, मैं खुद प्रभारी हूं। स्थाई स्टाफ के लिए हम पत्राचार कर रहे हैं। योगा के ट्रेनर की नियुक्ति हम नहीं कर सकते, यह भोपाल से ही होती है।
डॉ. आरके पचौरी, जिला आयुष अधिकारी

Rakesh shukla
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