वास्तविक गरीब हितग्राहियों को किया अपात्र

गरीब परिवार कलेक्ट्रेट से लेकर कंट्रोल तक हर जगह अपात्र हैं और उन्हें राशन नहीं मिल पा रहा है।

कलेक्ट्रेट से लेकर कंट्रोल तक लगा रहे चक्कर नहीं हो रही सुनवाई

 

By: Rakesh shukla

Published: 23 Apr 2020, 06:29 PM IST

शिवपुरी। शासन व प्रशासन इस कोरोना संक्रमण के दौर में यह दावा करते नहीं अघा रहे हैं कि उनके पास खाद्यान्न के भंडार भरे पड़े हैं, किसी भी जरूरतमंद को न तो भूखा सोने दिया जाएगा और न ही उसे खाद्यान की कोई कमी आने दी जाएगी। दावा तो यहां तक किया जा रहा है कि जिन लोगों के नाम बीपील सूची में नहीं हैं, जिनकी पात्रता पर्ची भोपाल से जारी नहीं हुई है, ऐसे 26 हजार से अधिक लोगों के नामों की सूची जारी की गई है, उन्हें भी खाद्यान दिया जाएगा। जिनके पास कुछ भी नहीं है उन्हें भी खाद्यान दिया जाएगा। परंतु वास्तविकता यह है कि जो गरीब परिवार है वह कलेक्ट्रेट से लेकर कंट्रोल तक हर जगह अपात्र हैं और उन्हें राशन नहीं मिल पा रहा है।


ज्ञात रहे कि बीते मंगलवार को विभिन्न क्षेत्रों की दर्जनों महिलाएं राशन की आस में कलेक्ट्रेट पहुंची थीं। यहां अधिकारियों ने उन्हें राशन उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया और फूड विभाग ने उनके नाम लिख लिए। यहां से उन्हें नगरपालिका भेज दिया गया, नगर पालिका में भी राशन के लिए उनके नाम लिख लिए गए। उन्हें आश्वस्त किया गया कि एक दो दिन में उन्हें राशन मिल जाएगा। महिलाओं ने सोचा कि उन्हें राशन लेने के लिए कंट्रोल जाना तो वह अपने-अपने राशन कार्ड लेकर कंट्रोल पहुंच गईं। इन महिलाओं में लुधावली, गौशाला क्षेत्र की महिलाओं और अन्य लोगों को चिह्नित कर पत्रिका ने जब प्रशासनिक अधिकारियों के दावों, वादों और जमीनी हकीकत का फ्लोर टेस्ट किया तो जो हालात सामने आए वह बेहद चौंकाने वाले थे। महिलाओं को कंट्रोल से अपात्र बताकर दुत्कार का भगा दिया गया, नगर पालिका से भी उन्हें अपात्र करार दे दिया गया और आज जब वह फिर से फूड ऑफिस पहुंचीं तो वहां से भी उनकी परिवार आईडी चैक कर उन्हें अपात्र बता दिया गया। कुल मिलाकर हालात यह थे कि अधिकारियों के प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत में जमीन आसमान का अंतर है।

कंट्रोल पर तो पात्रों को भी नहीं दे रहे गेहूं
पत्रिका ने जब गुरूवार को कंट्रोल पर जाकर हालातों को देखा तो वहां पर तो जो हितग्राही पात्र थे और उनका राशन भी कंट्रोल पर पहुंचा था। उन लोगों को राशन महज इसलिए नहीं दिया गया क्योंकि कभी मशीन उनकी आईडी को एक्सेप्ट नहीं कर रही थी तो कभी फिंगर प्रिंट को। कंट्रोल संचालक का कहना था कि भले ही यह पात्र हितग्राही है परंतु जब तक यह सब मेल नहीं खाएगा, मैं इन्हें राशन नहीं दूंगा। इसके अलावा जिन लोगों को वर्ष 2019 के अंतिम महीनों में भी कंट्रोल से राशन मिला है, उन्हें भी आईडी अब आईडी गलत बताकर उन्हें अपात्र बताया जा रहा है। खास बात यह रही कि जब मौके से ही अधिकारियों को फोन लगाया गया तो वह गरीब हितग्राही की पीड़ा और बात को समझने की बजाय कंट्रोल संचालक की बात को तवज्जो दे रहे थे। जिन हितग्राहियों की आईडी में कहीं कोई दिक्कत आ गई है, उसमें सुधार कराने की मंशा अधिकारियों की बिलकुल भी नहीं नजर आई।

26 हजार की सूची का नहीं कोई आधार
जिपं सीईओ भले ही दावा कर रहे हैं कि जो पात्र हैं उन्हें भी राशन मिलेगा, जिनकी पात्रता पर्ची नहीं आई है ऐसे 26 हजार से अधिक लोगों की सूची शासन ने जारी की है। खाद्य अधिकारी के अनुसार ये 26 हजार से अधिक लोग वे हैं जिन्हें आज तक कभी भी कंट्रोल की दुकान से राशन नहीं मिला है। ऐसे में विचारणीय पहलू यह है कि आखिर इन लोगों की पात्रता का चयन किस आधार पर किया गया, क्योंकि इस सूची में ऐसे लोगों के नाम भी शामिल हैं जो आलीशान मकानों में रहते हैं और ऐसे लोगों के नाम गायब हैं जो झोंपड़ी में बमुश्किल गुजारा कर रहे हैं।


ये बोले हितग्राही

मुझे इससे पहले तक इसी कंट्रेाल से राशन मिल रहा था, अब यह कह रहे हैं कि आपकी आईडी गलत है, आप राशन लेने के लिए अपात्र हो।
कल्याण, हितग्राही

मुझे अब से पहले तक राशन मिल रहा था, अब कह रहे हैं मशीन आपकी आईडी को गलत बता रही है, मैं आपको राशन नहीं दे सकता
शांकरदे आदिवासी, हितग्राही


ये बोले जिम्मेदार
नगर पालिका में खाद्यान ही नहीं बचा है, 15 तारीख से कोई खाद्यान नहीं आया है। हमने अधिकारियों को बता भी दिया और उन्हें पत्र भी दे दिया। खाद्यान आ जाएगा तो दे देंगे, नहीं आएगा तो कहां से देंगे।
पूरन कुशवाह, आरआई, नपा

मैं सभी महिलाओं की आईडी चैक करवा लेता हूं, वह पात्र हैं या नहीं। अगर पहले खाद्यान मिलता था और अब नहीं मिल रहा है तो इन्होंने आई में कोई छेड़छाड़ करवाई होगी।
नारायण शर्मा, फूड ऑफिसर

Rakesh shukla
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