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डीइओ के गृह जिले में मनमानी चरम पर, कहीं स्कूल में मजदूर रोके, कहीं लड़ रहे शिक्षक शिक्षण व्यवस्था चारों खाने चित्त

डीइओ के गृह जिले में मनमानी चरम पर, कहीं स्कूल में मजदूर रोके, कहीं लड़ रहे शिक्षक शिक्षण व्यवस्था चारों खाने चित्त

बेपरवाह जिम्मेदारजिले के गांव के स्कूलों में निरीक्षण के दौरान मिले हालात

शिवपुरी

Published: September 22, 2022 02:42:04 pm

डीइओ के गृह जिले में मनमानी चरम पर, कहीं स्कूल में मजदूर रोके, कहीं लड़ रहे शिक्षक शिक्षण व्यवस्था चारों खाने चित्त

बेपरवाह जिम्मेदारजिले के गांव के स्कूलों में निरीक्षण के दौरान मिले हालात
डीइओ के गृह जिले में मनमानी चरम पर, कहीं स्कूल में मजदूर रोके, कहीं लड़ रहे शिक्षक शिक्षण व्यवस्था चारों खाने चित्त
डीइओ के गृह जिले में मनमानी चरम पर, कहीं स्कूल में मजदूर रोके, कहीं लड़ रहे शिक्षक शिक्षण व्यवस्था चारों खाने चित्त
शिवपुरी. जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था चारों खाने चित्त है। जनप्रतिनिधि जब स्कूलों का निरीक्षण करने जा रहे हैं तो उन्हें स्कूलों में कक्षाएं लगी मिलने की बजाय ताले लटके मिल रहे हैं। कहीं स्कूल में पढ़ाई की जगह शिक्षक ने मजदूर रुकवा दिए तो कहीं शिक्षक ही आपस में झगड़ रहे हैं। ऐसे हालातों में बच्चों की पढ़ाई तो दूर उन्हें स्कूल में शिक्षा का माहौल भी नहीं मिल पा रहा। जिले में शिक्षा विभाग के यह हालात इसलिए बन गए, क्योंकि जिला शिक्षा अधिकारी भी न केवल शिवपुरी के रहने वाले हैं, बल्कि बरसों तक यहीं शिक्षक भी रहे। स्थिति यह है कि डीइओ ने अब मोबाइल पर फोन रिसीव करना ही बंद कर दिया।
दो साल तक कोरोना संक्रमण काल के फेर में बंद रहे स्कूलों में इस वर्ष शिक्षण कार्य बेहतर होने की उम्मीद थी, लेकिन इस बार तो जिले में शिक्षा की नैया और भी अधिक डूबने की कगार पर आ गई। गांव के सरकारी स्कूलों में शिक्षक न होने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों के शिक्षकों को जिला मुख्यालय पर अटैच कर दिया, जिसके चलते शहर के स्कूलों में शिक्षकों की भरमार हो गई, जबकि गांव के स्कूलों में शिक्षक या तो हैं नहीं या फिर अतिथि शिक्षक ही स्कूल की कमान संभाले हुए हैं। शहर के स्कूलों में शिक्षकों की भरमार हो जाने से अटैचमेंट पर आए शिक्षक नियमित स्कूल नहीं आ रहे, क्योंकि वो पहले से ही स्कूल में अतिरिक्त हैं। शासकीय प्राथमिक विद्यालय सिद्धेश्वर व माध्यमिक विद्यालय सिद्धेश्वर के अलावा शहर में लगभग एक दर्जन स्कूलों में अतिरिक्त शिक्षक हो गए हैं।
सीधी बात : संजय श्रीवास्तव डीइओ शिवपुरीसवाल: आपका फोन नहीं उठता, क्या वजह है?

जवाब- मैं पिछले तीन दिन से हाईकोर्ट में तारीखें कर रहा हूं, व्यस्तता अधिक रहती है।

सवाल: स्कूल में शिक्षक मजदूरों को रोक रहे हैं, जनप्रतिनिधियों को ताले लटके मिल रहे हैं?
जवाब- प्राथमिक व माध्यमिक के लिए डीपीसी प्रभारी हैं, उन्हें स्कूलों की मॉनीटरिंग करनी चाहिए। यदि उनकी तरफ से कोई शिकायत आती है तो हम कार्रवाई करते हैं।

सवाल: आप जिले में शिक्षा विभाग के मुखिया हैं, क्या कार्रवाई की?
जवाब- हमारे पास जो शिकायत आती है, उसमें त्वरित एक्शन करते हैं। पिपलौदा के स्कूल में मजदूरों को रोके जाने की कोई शिकायत हमारे पास नहीं आई। हम कार्रवाई करते हैं, लेकिन उसका प्रचार-प्रसार नहीं करते।

● पोहरी के पिपलौदा गांव के शासकीय स्कूल में बच्चों की कक्षाओं में पिछले दिनों वहां पदस्थ शिक्षक ने अपने खेत के मजदूरों को स्कूल में बसा दिया था। जिन कक्षाओं में बच्चों को पढ़ना चाहिए था, वहां पर मजदूर अपना खाना बना रहे थे। चूंकि स्कूल में मजदूर टिके थे, इसलिए वहां पढ़ने आने वाले बच्चों को निराश होकर लौटना पड़ रहा था।
● जिला पंचायत के उपाध्यक्ष अमित पड़रया ने पिछले दिनों पिछोर के आधा दर्जन गांव में जाकर सरकारी स्कूलों का जब औचक निरीक्षण किया तो वहां पर उन्हें आधे से अधिक स्कूलों में ताले लटके मिले। वहीं कुछ स्कूलों में बच्चे बाहर खड़े होकर शिक्षक के आने का इंतजार कर रहे थे।
● जिला पंचायत अध्यक्ष नेहा यादव ने भी जब बीते दिनों बदरवास के सरकारी स्कूलों का औचक निरीक्षण करने पहुंचीं तो वहां उन्हें स्कूल तो खुले मिले, लेकिन वहां पदस्थ शिक्षक नदारद थे। इतना ही नहीं वहां पर बच्चों का शैक्षणिक स्तर भी कमजोर मिला। नेहा यादव ने व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए थे।
● शासकीय उमावि लुकवासा में पिछले दिनों एक महिला शिक्षक व पुरुष शिक्षक के बीच विवाद इतना गहरा गया था कि जब एसडीएम कोलारस स्कूल पहुंचे तो वो दोनों उनके सामने ही उलझने लगे। वहां पदस्थ अतिथि शिक्षक भी एसडीएम को नदारद मिले थे, जिन्हें हटाने के निर्देश दिए थे।
डीइओ से बात करने नजदीकियों को लगाते हैं फोन
जिला शिक्षा अधिकारी संजय श्रीवास्तव शिवपुरी की विवेकानंद कॉलोनी में निवास करते हैं तथा बरसों तक उत्कृष्ट विद्यालय में पदस्थ रहे। उनके भाई सहित परिवार के ही आधा दर्जन सदस्य भी शिक्षा विभाग में हैं। जब भी डीइओ से बात करना होती है तो वो अपना मोबाइल रिसीव नहीं करते, तब उनके नजदीकियों को फोन करके कहना पड़ता है कि उनसे बात करवा दो।

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