बकरी पालन के नाम पर पशु चिकित्सा विभाग में घोटाला..!

हितग्राहियों को नहीं मिला धेला, पौने चार लाख की सब्सिडी का हुआ बंदरबांट
शपथ पत्र देकर हितग्राही बोले, न मिले बकरा-बकरी न मिला लोन

शिवपुरी. जिले में पशु चिकित्सा विभाग में पदस्थ अधिकारी-कर्मचारी जहां बिना काम के वेतन लेकर जहां शासन को चूना लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विभिन्न योजनाओं के तहत हितग्राहियों को मिलने वाले लोन में भी सेंधमारी करके लाखों के बारे-न्यारे कर रहे हैं। ऐसा ही एक मामला गूगरीपुरा गांंव में सामने आया, जिसमें हितग्राहियों को धेला भर तक नहीं मिला, जबकि मिलने वाली पौने चार लाख रुपए की सब्सिडी को विभाग के लोगों ने बंदरबांट कर लिया। जब हितग्राहियों को पता चला कि हमारे नाम से लोन निकाला गया है तो उन्होंने शपथ-पत्र देकर बताया कि हमें न तो लोन मिला और न बकरा-बकरी।

ऐसे समझें पूरा गड़बड़झाला

शासन ने किसानों की आय बढ़ाने तथा उन्हें खेती के अलावा दूसरे संसाधनों से भी पेसा कमाने के लिए कुक्कुट विकास उत्प्रेरण राज्य सहायता के अंतर्गत लोन स्वीकृत किए जाने की योजना शुरू की, जिसमें ग्रामीण हितग्राही को 10 बकरी व एक बकरा खरीदने के लिए 78500 हजार रुपए प्रति हितग्राही को लोन दिया जाना था। उक्त लोन की राशि पर हितग्राही को 30892 की सब्सिडी मिलनी थी, यानि हितग्राही को मिली लोन की राशि में से महज 47318 रुपए जमा करने थे। विभाग के जिम्मेदारों ने 12 हितग्राहियों की सब्सिडी की कुल राशि 3 लाख 71 हजार 784 रुपए का बंदरबांट कर लिया।


इन हितग्राहियों ने दिया शपथ पत्र

शिवपुरी ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम गूगरीपुरा में रहने वाली रामबाई पत्नी नवल सिंह पाल, मीना पत्नी बलवीर बघेल, सोमवती पत्नी अजमेर पाल, भगवती पत्नी रामबरन पाल, रेवती पत्नी राजेंद्र बघेल, बुधिया पत्नी भरत, मनीषा पत्नी प्रताप सिंह बघेल, पिस्ता पत्नी उम्मेद पाल, सुशीला पत्नी बृजलाल कुशवाह, रामवती पत्नी रामहेत पाल, ममता पत्नी अतर सिंह कुशवाह, लीला पत्नी राजहंस बघेल, के नाम से बकरा-बकरी के लिए लोन स्वीकृत हुआ है। जबकि उक्त सभी हितग्राहियों ने शपथ पत्र देकर यह कहा है कि हमें न तो बकरा-बकरी मिले और न ही हमें लोन की राशि एक भी धेला मिला है। उक्त हितग्राहियों को वर्ष 2018-19 में बकरी पालन के लिए लोन स्वीकृत हुआ था।


ऐसे किया फर्जीवाड़ा

हितग्राहियों ने बताया कि हमने बकरी लोन के लिए फार्म भरा था। उसके बाद पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी ने एक शख्स के हाथ से कमजोर व ऐसी बकरियां भेजीं थीं, जो मरने वाली थीं। हमने उन बकरियों को लेने से मना करते हुए कहा था कि हमें राशि दिलवा दो, हम अपनी पसंद से बकरा-बकरी खरीद लेंगे, जिसमें आप लोग बाद में टेगिंग कर देना। इस पर विभाग के अधिकारी ने हमसे एक फार्म पर अंगूठा व हस्ताक्षर करवा लिए थे। उसके बाद से हम लोन की बात भूल गए, लेकिन कुछ समय पहले हमें पता चला कि हमारे नाम से लोन निकाल लिया गया है।


आरटीआइ में नहीं दे रहे जानकारी

शहरवासी प्रकाश सिंह गौर ने पशु चिकित्सा विभाग से बकरी लोन के संंंबंध में जानकारी मांगने के साथ ही यह भी मांगा है कि हमें बकरा-बकरी दिए जाने के बिल-व्हाउचर व टेगिंग नबर की जानकारी मांगी थी, लेकिन विभाग के जिम्मेदारों ने अभी तक इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी।


पशु चिकित्सा विभाग के उप संचालक ने दी सफाई

उक्त हितग्राहियों के नाम से बकरा-बकरी लोन स्वीकृत हुआ था, कुक्कुट विकास निगम ने 250 बकरी भी भेजी थीं, जिनमें से 100 बकरी ग्रामीणों को छांटनी थी। ग्रामीणों ने कहा कि बकरी तो हम घर की बता देेंगे, हमें पैसा दे दो। जबकि योजना में ऐसा नहीं होता। लोन की राशि बैंक देता है, जबकि सब्सिडी का केस हमारा विभाग बनाता है। हमने कोईसब्सिडी नहीं निकाली।
एमसी तमोरी, उप संचालक पशु चिकित्सा विभाग शिवपुरी

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महेंद्र राजोरे Desk
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