लॉकडाउन से कुछ नुकसान तो फायदे अधिक

एक कॉलेज प्रोफेसर का तो यहां तक कहना है कि तमाम प्रयास करने के बाद भी आगामी 20 साल में पर्यावरण इतना पॉजीटिव नहीं हो पाता, जितना 20 दिन के लॉकडाउन में हो गया।

By: rishi jaiswal

Published: 18 Apr 2020, 06:52 PM IST

शिवपुरी। कोरोना को लेकर देशभर में किए गए लॉकडाउन से धंधा-कारोबार ठप हो जाने से जहां लोगों को नुकसान हुआ है, वहीं दूसरी ओर इतने दिनों में प्राकृतिक पर्यावरण में बहुत अधिक सुधार हो गया।

एक कॉलेज प्रोफेसर का तो यहां तक कहना है कि तमाम प्रयास करने के बाद भी आगामी 20 साल में पर्यावरण इतना पॉजीटिव नहीं हो पाता, जितना 20 दिन के लॉकडाउन में हो गया। शिवपुरी जिले में भी प्रदूषण 50 फीसदी से भी कम हो गया, वहीं तेजी से घट रही ओजोन परत भी इस दौरान काफी हद तक रिपेयर हो गई।

सुबह से चौतरफा पसरे सन्नाटे में पक्षियों की चहचाहट सुनाई देती है तथा माधव नेशनल पार्क के वन्यजीवों को भी प्रदूषण से काफी हद तक राहत मिली है।

देशभर में किए गए लॉकडाउन के चलते वाहनों की आवाजाही 5 फीसदी से भी कम रह गई, जिसके चलते वाहनों से धुएं के रूप में निकलने वाला क्लोरोफ्लोरो कॉर्बन ना केवल पर्यावरण को दूषित कर रहा था, बल्कि ओजोन परत को भी बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा रहा था।

पीजी कॉलेज के प्रोफेसर ने बताया कि वातावरण में पहले कॉर्बन डाईऑक्साइड की मात्रा तेजी से बढ़ रही थी, जो लॉकडाउन में काफी हद तक नियंत्रित हो गया। इसके अलावा इंडस्ट्रीज व वाहनों से निकलने वाला प्रदूषण भी अब बंद हो जाने से पूरा क्लाइमेट ही चेंज हो गया है।

इस लॉकडाउन में क्लाइमेंट में इतना अधिक सुधार हो गया कि वो आने वाले कई वर्षों तक इस देश को सुरक्षित रखेगा। वहीं मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के शिवपुरी प्रभारी का कहना है कि पहले जो प्रदूषण के मानक तय किए गए इस लॉकडाउन में वो 50 फीसदी कम हो गया।

माधव नेशनल पार्क के वन्यजीव भी बेहतर

शिवपुरी में स्थित माधव नेशनल पार्क के पास से झांसी रोड के अलावा ग्वालियर रोड भी निकला हुआ है। जहां से गुजरने वाले वाहनों का प्रदूषण भी नेशनल पार्क में रहने वाले वन्यजीवों के लिए खतरा बना हुआ था।

वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण एवं उनकी आवाज से वन्यजीव पार्क की सीमा से बहुत अंदर तक रहते थे, लेकिन अब वे इस सीमा से भी बाहर आ रहे हैं। जिसके चलते पिछले दिनों एक तेंदुआ भी ऐसे ही एक हादसे का शिकार हो गया था।

नेशनल पार्क में इन दिनों पर्यटकों की एंट्री भी नहीं है तथा कोई घूमने भी नहीं आ रहा, जिसके चलते नेशनल पार्क के अंदर वाहनों का प्रदूषण भी नहीं हो रहा, जिससे वन्यजीव भी वायु व ध्वनि प्रदूषण से मुक्त हैं।

यह बोले कॉलेज के प्रोफेसर

लॉकडाउन से क्लाइमेट बहुत हद तक क्लीयर हो गया। जो प्रदूषण सभी तरीकों के बावजूद 20 साल में साफ नहीं हो पाता, वो इन 20 दिनों में हो गया। ओजोन परत जो तेजी से घट रही थी, वो इस दौरान रिपेयर हो गई तथा कॉर्बन डाईऑक्साइड की लेयर वातावरण में बन जाने से शिवपुरी जैसी ग्रीष्मकालीन राजधानी भी तपने लगी थी। क्लाइमेट ने खुद को क्लीयर कर लिया।

आनंद मिश्रा, प्रोफेसर, पीजी कॉलेज, शिवपुरी

50 फीसदी कम हो गया प्रदूषण

लॉकडाउन होने के बाद पर्यावरण में बढ़ता प्रदूषण न केवल कम हुआ, बल्कि मानक पैमाने में भी 50 फीसदी की गिरावट आई है। अभी नदियों का सैंपल भी लिया जा रहा है, तथा लॉकडाउन से पहले व उसके बाद हुए पर्यावरणीय बदलाव व प्रदूषण के पैमाने में आई कमी का आंकलन कर रिपोर्ट बनाई जा रही है।

केबी शर्मा, जिला प्रभारी, शिवपुरी, मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

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