नेशनल पार्क में बाघ की दहाड़ से शहर में खुलेंगे रोजगार के द्वार

जिले के माधव नेशनल पार्क में बाघ की दहाड़ के साथ ही रोजगार के अवसर भी खुल जाएंगे। क्योंकि बाघ आने के बाद नेशनल पार्क में छाई वीरानी सैलानियों की आमद से दूर हो जाएगी। जब पर्यटक आएंगे तो फिर शहर में टूरिज्म उद्योग शुरू होने से हर वर्ग के लोगों को रोजगार मिलेगा।

By: rishi jaiswal

Published: 09 Jun 2021, 11:08 PM IST

शिवपुरी. जिले के माधव नेशनल पार्क में बाघ की दहाड़ के साथ ही रोजगार के अवसर भी खुल जाएंगे। क्योंकि बाघ आने के बाद नेशनल पार्क में छाई वीरानी सैलानियों की आमद से दूर हो जाएगी। जब पर्यटक आएंगे तो फिर शहर में टूरिज्म उद्योग शुरू होने से हर वर्ग के लोगों को रोजगार मिलेगा। ट्रेवलिंग एजेंसी से लेकर गाइड व होटल संचालकों का कारोबार भी चल निकलेगा।

शिवपुरी जो पहले कभी पर्यटन नगरी के नाम से जानी जाती थी, वहां अब पर्यटन पूरी तरह से वेंटीलेटर पर आ गया। जबसे नेशनल पार्क में टाइगर सफारी खत्म हुई, विदेशी सैलानियों के साथ-साथ देशी सैलानियों ने भी मुंह मोड़ लिया। शिवपुरी मध्यप्रदेश के मध्य भारत पठार का हिस्सा है, जहां 75 सेंटीमीटर औसत वर्षा होती है। साथ ही मिट्टी और जलवायु खेती के लिए मालवा की तुलना में अच्छी नहीं है, इसलिए ना तो बहुत अच्छी खेती होती है और न ही यहां पर इंडस्ट्रियल डवलपमेंट ही हुआ है। खनिजों की बात की जाए तो शिवपुरी में पत्थर व रेत का कारोबार भी बड़े पैमाने पर होता है, लेकिन इसमें कुछ चिह्नित जनप्रतिनिधियों ने माफिया के साथ मिलकर इस पर एकाधिकार कर लिया है। जिसके चलते शिवपुरी में रोजगार के नाम सिर्फ फांकाकशी है।

पर्यटन से सुधर सकती है आर्थिक स्थिति
अब एक मात्र पर्यटन ही वह विकल्प है जिसे हम हमारे आर्थिक आधार के रूप में देख सकते हैं। विश्व के मानचित्र में कई देश ऐसे हैंं, जिनकी अर्थव्यवस्था केवल और केवल पर्यटन पर ही आधारित हैं। शिवपुरी जिला अपने आप में पर्यटन के दर्जनों स्पॉट लिए हुए है, जिनमें प्राकृतिक, स्थापत्य एवं ऐतिहासिक पर्यटन की बड़ी संभावना हो सकती है। इस बीच में माधव राष्ट्रीय उद्यान में बाघ के आने की खबर निश्चित ही पर्यटन को बढ़ावा देने वाली है। यदि एक सम्मिलित प्रयास के द्वारा पर्यटन के लिए सुगम वातावरण उत्पन्न होता है तो निश्चित ही शिवपुरी जिला आर्थिक आधार पर मजबूत होगा।

विदेशियों को पसंद है खुले में घूमता शेर
विदेशी सैलानियों को खुले जंगल में घूमता हुआ शेर देखना पसंद है। नेशनल पार्क के पूर्व डायरेक्टर शरद गौड़ का कहना था कि शिवपुरी से रूठे विदेशी सैलानियों को वापस लाने के लिए नेशनल पार्क में बाघ को लाना जरूरी है। उनका कहना था कि जिन वन्य प्राणी उद्यान व नेशनल पार्क में बाघ हैं, वहां विदेशी सैलानियों की आवाजाही रहती है। शिवपुरी नेशनल पार्क में बाघ आने के बाद विदेशी सैलानियों की फिर से शिवपुरी में आमद बढ़ जाएगी। जिससे ट्रेवलिंग एजेंसियों के अलावा आइटीआइ से गाइडिंग की ट्रेनिंग ले चुके युवाओं को भी गाइड का काम मिल जाएगा। इतना ही नहीं शहर में होटल खोलने के बाद भी हाथ पर हाथ धरे बैठे व्यवसायियों को भी सैलानियों के आने से अच्छी आमदनी का रास्ता भी खुलेगा।

rishi jaiswal
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned