देखरेख के अभाव में बदहाल हो रहे पर्यटन स्थल

ऐतिहासिक वाणगंगा कुंड के साथ भदैया कुंड भी हो रहा बदहाल, बेपरवाह जिम्मेदार

शिवपुरी. जिले में पर्यटन की अपार संभावनाएं होने के बावजूद यहां पर्यटन उद्योग शुरू नहीं हो सका। देखरेख के अभाव में पर्यटन स्थल सहित पर्यटकों के लिए बनाए गए स्पॉट खंडहर में तब्दील होते जा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार पूरी तरह से बेपरवाह बने हुए हैं। फिर चाहे भदैया कुंड हो या फिर पौराणिक कथाओं को अपने आपमें समेटे हुए वाणगंगा कुंड, सभी की हालत इतनी बदहाल है कि स्थानीय सैलानी अब जाते नहीं हैं और बाहर के सैलानी एक बार आने के बाद दूसरी बार इधर आने का रुख नहीं करते। प्रशासन की लापरवाही के चलते अब शहर के कुछ युवाओं ने पर्यटन को आगे ले जाने के लिए एक समिति गठित की है।


7 साल से इंतजार में पर्यटन स्वागत केंद्र

शहर के छत्री रोड पर लगभग सात साल पूर्व एक करोड़ रुपए से अधिक की लागत से पर्यटन स्वागत केंद्र बनाया गया था। चूंकि इस रोड से होकर ही प्राचीन पर्यटन स्थल सिंधिया छत्री, वाणगंगा व भदैया कुंड हैं, जहां तक जाने वाले पर्यटकों को बीच में आराम करने व मनोरंजन के लिए पर्यटन स्वागत केंद्र बनाया गया, जिसमें दुकानों के अलावा ओपन ऑडिटोरियम के अलावा बच्चों के लिए झूले व पार्क आदि बनाया गया। नगरपालिका की निष्क्रियता के चलते यह पर्यटन स्वागत केंद्र अभी तक शुरू नहीं हो सका तथा लंबे समय तक यह वीरान होने की वजह से खंडहर भी हो गया।


वाणगंगा कुंड

छत्री रोड पर स्थित वाणगंगा कुंड अपने आपमें पौराणिक कथाओं को समेटे हुए है। यहां पर बावन कुंड हैं और यह कुंड पांडवों ने बनाए थे। बताते हैं कि पांडवों ने अपना अज्ञातवास शिवपुरी के इसी स्थान पर गुजारा था और पानी की जरूरत महसूस होने पर अर्जुन ने अपने वाणों से पानी निकाला था, जिन्हें बाद में कुंड का स्वरूप दिया गया। इन बावन कुंडों में कभी साफ पानी हुआ करता था, लेकिन अब देखरेख के अभाव में इन कुंडों में भरा पानी न केवल गंदा होकर दूषित हो चुका है। स्थानीय प्रशासन ने भी इन कुंडों की नियमित सफाई आदि की कोई व्यवस्था नहीं की है।


भदैया कुंड

शहर से तीन किमी दूर स्थित यह शिवपुरी का प्राचीन पर्यटन स्थल है। भदैया कुंड का प्राकृतिक झरना हर साल बरसात में बहता है और इसे सभी मौसम में चलाने तथा सैलानियों को आकर्षित करने के लिए मोटर लगाकर कुंड के पानी को ऊपर से गिराने का सिस्टम बनाया गया था। लाखों रुपए खर्च करके यह सिस्टम लगाया गया, लेकिन कुछ दिन तक चलने के बाद यह झरना भी बंद हो गया। भदैया कुंड में चौतरफा गंदगी पसरी हुई है तथा सीढिय़ों के पत्थर तक टूट चुके हैं। अब यहां सैलानी कम और नशेडिय़ों का जमघट अधिक नजर आता है। यहां पर अब एंट्री के 10 रुपए तथा नीचे एक होटल संचालित है, यह सिर्फ कमाई का जरिया बने हुए हैं।

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महेंद्र राजोरे Desk
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