कोरोना से वर्दी को मिला दम, डॉक्टरों को फिर मिला दूसरे भगवान का दर्जा

पिछले लंबे समय से कोई ऐसे हालात नहीं बने थे कि पुलिस को नियमों का पालन करवाने के लिए हाथ खोलने की छूट मिली हो, लेकिन कोरोना ने पुलिस को यह मौका दिया, तो कम हो चुका वर्दी का डर एक बार फिर वापस आया है। साथ ही लोगों की पुलिस के प्रति सोच में भी बदलाव आया है, क्योंकि अलसुबह जब लोग सोकर नहीं उठते, तब पुलिसकर्मी कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए शहर के नाकों पर तैनात होकर अपना फर्ज निभाते हैं।

By: shatrughan gupta

Updated: 18 Apr 2020, 07:46 PM IST

शिवपुरी। कोरोना वायरस से देश भर में हुए लॉकडाउन से जहां अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई, वहीं पुलिस की खाकी वर्दी के दम को एक बार फिर आमजन ने माना। इतना ही नहीं पिछले लंबे समय से दूसरे भगवान का दर्जा प्राप्त डॉक्टरों का जो सम्मान आमजन के बीच कम हो गया था, वो वापस लौटा है।

कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए किए गए लॉकडाउन में गरीबों का कामकाज ठप हो जाने से गरीबों ने इस महामारी का दर्द झेला, तो वहीं शहर सहित जिले भर में सैकडों हाथ भी सेवा के लिए आगे आ गए। पिछले 27 दिनों से सड़कें वीरान हैं, कॉलोनियों में सन्नाटा पसरा हुआ है और बाजार भी बेरौनक हो गए। इन सबके बीच शिवपुरी के लिए यह सुखद है कि दो पॉजीटिव केस मिलने के बाद पिछले 25 दिनों से कोई भी नया पॉजीटिव सामने नहीं आया, जिससे यह माना जा सकता है कि जिले के हालात अब तेजी से सुधार की ओर हैं।

पुलिस के प्रति बदली सोच

पिछले लंबे समय से कोई ऐसे हालात नहीं बने थे कि पुलिस को नियमों का पालन करवाने के लिए हाथ खोलने की छूट मिली हो, लेकिन कोरोना ने पुलिस को यह मौका दिया, तो कम हो चुका वर्दी का डर एक बार फिर वापस आया है। साथ ही लोगों की पुलिस के प्रति सोच में भी बदलाव आया है, क्योंकि अलसुबह जब लोग सोकर नहीं उठते, तब पुलिसकर्मी कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए शहर के नाकों पर तैनात होकर अपना फर्ज निभाते हैं।

इतना ही नहीं पिछले दिनों में कई पुलिसकर्मी भी अपनी ड्यूटी करते-करते संदिग्ध मरीजों की श्रेणी में आने से समझदार वर्ग का पुलिस के प्रति यह विश्वास भी बढ़ा है कि यह हमारी सुरक्षा के लिए अपनी जान भी जोखिम में डालने से नहीं चूकते।

डॉक्टरों का सम्मान बढ़ा

एक समय था कि जब शिवपुरी जिला अस्पताल में बाहर से आने वाले डॉक्टर डरते थे, क्योंकि मरीजों के परिजन कई बार उनके साथ दुव्र्यवहार कर मारपीट कर चुके थे, लेकिन कोरोना वायरस से संक्रमित हुए शिवपुरी के दो युवाओं के बीच रहते हुए उनका इलाज करके इस महामारी बीमारी से बचाकर पूरी तरह से स्वस्थ कर देने के बाद से आमजन में डॉक्टरों प्रति सम्मान बढऩे के साथ भरोसा भी बढ़ा है, क्योंकि वर्तमान हालातों के बीच, जहां दुनियां के कई देशों में इस महामारी ने हजारों की संख्या में लोगों की जान ले ली, वहीं शिवपुरी के डॉक्टरों ने पॉजीटिव मरीजों को नेगेटिव कर दिया।

डॉक्टर को धरती का दूसरा भगवान कहा जाता है, यह दर्जा फिर से डॉक्टरों को वापस मिला है।

सेवा के लिए आगे आए सैकड़ों हाथ

कोरोना वायरस ने एक बार फिर लोगों के बीच सेवा के जज्बे को बढ़़ाया है। अभी तक समाजसेवी संस्थाओं के काम नजर नहीं आते थे, लेकिन शिवपुरी में इन संस्थाओं ने आगे बढ़कर न केवल मानवता की सेवा को आगे बढ़ाया, बल्कि बाहर से आने वाले लोगों की भूख मिटाने के लिए खाने के पैकेट से लेकर राशन किट तक वितरित करवाईं।

रोटरी क्लब का लंगर लॉकडाउन से ही लगातार चल रहा है, वहीं शिवपुरी विधायक की टीम भी हर रोज सैकड़ों परिवारों को राशन की किट उपलब्ध करा रही है। समाजसेवा में जुटे इन लोगों का कहना है कि सच्ची सेवा यही है, जब किसी भूखे को हमने खाना खिलाया हो।

गेहूं की बालियां बीनकर भर रहे परिवार का पेट

संजीव जाट. बदरवास। कोरोना महामारी का दूसरा दु:खद पहलू यह है कि गरीब परिवारों को बीमारी से कम और भूख से मरने का डर सताने लगा है। प्रशासनिक इंतजामों के दावे करने के बावजूद कई ऐसे परिवार हैं, जो बेहद कठिन दौर से गुजर रहे हैं। इनमें शामिल बदरवास के वार्ड क्रमांक-4 में रहने वाले बिट्ठल नामदेव का परिवार इन दिनों संकट में है।

बिट्ठल कस्बे में जैकेट सिलने का काम करते थे, जबकि उनकी माँ दूसरे घरों में काम करती थीं, लॉकडाउन में सब कुछ बंद हो गया, जिसके चलते बिट्ठल व उनकी पत्नी अपने तीन बच्चों की भूख मिटाने के लिए हर सुबह उन खेतों में निकल जाते हैं, जहां गेहूं की फसल कटती है। थ्रेशिंग होने के बाद भी बहुत सारी गेहूं की बालियां खेत में गिर जाती हैं, जिन्हें बीनकर यह दंपत्ति पहले उन्हें साफ करता है और फिर उसे पिसवाकर आटा की व्यवस्था कर रहे हैं, लेकिन अब नरवाई जलाए जाने से उनकी यह व्यवस्था भी खत्म होती जा रही है। अभी तक इस परिवार को 5 किलो गेहूं दिया गया, जो कुछ दिन में ही खत्म हो गया।

एसपी ने माना : पुलिस के प्रति बदली लोगों की सोच

पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह चंदेल भी मानते हैं कि कोरोना से बचाव के लिए हुए लॉकडाउन में लोगों की पुलिस के प्रति सोच बदली है। आमजन को सुरक्षित रखने के लिए पुलिस जवान सुबह से लेकर रात तक पहरेदारी कर रहा है, जबकि उसे खुद के संक्रमित होने का खतरा बना हुआ है। नियमों का पालन करवाने के लिए पुलिस को कई बार सख्ती भी करनी पड़ती है। पुलिस के लिए यह दौर आमजन के बीच पॉजीटिव सोच को बढ़ाने में मददगार साबित हो रहा है।

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