किस अनुच्छेद को भारतीय संविधान की आत्मा बताया गया है...?

विधिक साक्षरता कार्यक्रम के तहत आयोजित हुआ क्विज कॉम्पटीशन

शिवपुरी. शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के विधि विभाग में सोमवार को विधिक साक्षरता कार्यक्रम के तहत संविधान के संबंध में छात्रों की समझ को जानने के लिए एक क्विज कॉम्पटीशन का आयोजन किया गया। इस कॉम्पटीशन में, किस अनुच्छेद को भारतीय संविधान की आत्मा कहा गया है, अस्पृश्यता उन्मूलन के लिए भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद प्रावधान करता है...जैसे संविधान आधारित 50 प्रश्न पूछे गए। सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले तीन विद्यार्थियों को डीजे ने प्रमाण पत्र वितरित किए।
जानकारी के अनुसार कानून के छात्रों में कानून की समझ विकसित करने के साथ उन्हें कानून की पढ़ाई का महत्व समझाने के लिए जबलपुर हाईकोर्ट ने विधिक सहायता अधिकारियों को लॉ कॉलेजों में संविधान आधारित प्रश्नों का एक क्विज कॉम्पटीशन आयोजित करने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में सोमवार को लॉ कॉलेज में यह कॉम्पटीशन आयोजित किया गया। कॉम्पटीशन में 120 बच्चों ने सहभागिता निभाई। सभी बच्चों को प्रश्न-पत्र सॉल्व करने के लिए एक घंटे का समय दिया गया। छात्र किसी प्रकार की चिटिंग न कर सकें इसके लिए एडवोकेट्स की ड्यूटी भी क्लासों में लगाई गई। निर्धारित समय के उपरांत सभी छात्रों से कॉपी कलेक्ट कर वहीं बैठकर उनका मूल्यांकन किया गया। इस मूल्यांकन के दौरान प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली छात्रा सत्यभामा राजपूत (39/50), द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले वैशाखी दांगी, अरविंद जाटव (33/50), तीसरा स्थान प्राप्त करने वाले रविंद्र जाटव (32/50) को डीजे अवनीश वर्मा व प्रमोद कुमार ने प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम जिला विधिक अधिकारी शिखा शर्मा के मार्गदर्शन में हुआ। इसके अलावा एडवोकेट्स की एक टीम बनाई गई थी, जिसमें एडवोकेट्स दीवान सिंह रावत, अंकुर चतुर्वेदी, जय गोयल, श्रेय शर्मा आदि शामिल थे।
संवैधानिक और तार्किक दृष्टिकोण करो विकसित
विधिक जागरूकता कार्यक्रम दो सत्रों में आयोजित किया गया। दूसरे सत्र में डीजे अवनीश शर्मा ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि आप कानून की पढ़ाई सिर्फ अपने लिए नहीं अपितु समाज के लिए कर रहे हैं, इसलिए अपनी संवैधानिक और तार्किक दृष्टिकोण को विकसित करो, क्योंकि अगर आपके पास संविधान की जानकारी और तार्किक दृष्टिकोण होगा तो आप आपके विरोध में खड़े सौ लोगों को भी अपनी बात मानने पर मजबूर कर देंगे। उनका कहना था कि इस समय देश में गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी है, ऐसे में आप सौभाग्यशाली हो कि इस माहौल में आपको कानून पढऩे और सीखने का मौका मिल रहा है। ऐसे में आपको यह संकल्प लेना है कि संविधान का लाभ अंतिम छोर के हर व्यक्ति को दिलाना है, क्योंकि अगर संविधान से गरीब व्यक्ति को लाभ नहीं हुआ तो संविधान का कोई लाभ नहीं है।
आप कानून के दूत हो, कंधों पर समाज का भार
कार्यक्रम के पहले सत्र में एडीजे प्रमोद कुमार ने छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आप लोग संविधान के वह दूत हो जिनके कंधों पर समाज और देश का भार है। आप लोगों को गरीब बस्तियों, गांवों, तहसीलों आदि स्थानों पर जाकर अशिक्षित व गरीब लोगों को संविधान प्रदत्त उनके अधिकार व कर्तव्यों की जानकारी देनी है। उनका कहना था कि अगर किसी भी गरीब व्यक्ति को कानून का लाभ नहीं मिल पा रहा है तो आप लोग उनके बीच जाकर उन्हें यह बता सकते हो कि आप विधिक सहायता के कार्यालय जाओ, वहां से आपको हर लाभ प्राप्त हो जाएगा। इस दौरान उन्होंने मौजूद छात्र-छात्राओं को पीसीएसओ एक्ट के संबंध में भी जानकारी दी।


कॉलेज को समय दो, दिल्ली, इंदौर नहीं जाना पड़ेगा


कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य महेंद्र कुमार ने बच्चों को बताया कि शिवपुरी प्रदेश में एक मात्र ऐसा जिला है, जिसने प्रदेश को सर्वाधिक सीजे, एडीपीओ दिए हैं। आपके सामने जिला विधिक सहायता अधिकारी शिखा शर्मा, आपके प्रो. दिग्विजय सिंह और ये सारे वकील बैठे हैं, वह सब इसी कॉलेज से निकले हैं। इन्होंने कॉलेज को पूरा समय दिया था और अब यहां हैं। अगर आप कॉलेज को पूरा समय देंगे तो यह तय है कि आपको जज और एडीपीओ की तैयारी के लिए दिल्ली, इंदौर नहीं जाना पड़ेगा।

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महेंद्र राजोरे Desk
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