जिले के विकास के लिए 361.43 करोड़ के बजट पर लगी मुहर

जिले के विकास के लिए 361.43 करोड़ के बजट पर लगी मुहर
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बीते वर्ष से 1.76 करोड़ कम है जिला योजना का बजट, प्रभारी मंत्री चेतन चौहान ने विभागवार मंथन के बाद लगाई मुहर

सिद्धार्थनगर. जिले के विकास के लिए विभिन्न विभागों द्वारा कराए जाने वाले कार्यों पर 361.43 करोड़ रूपया खर्च किया जाएगा। जो कि पिछले वर्ष की अपेक्षा 1.76 करोड़ कम का परिव्यय तैयार किया गया है। सोमवार को विकास भवन के अम्बेडकर सभा में हुई जिला योजना की बैठक के दौरान खेलकूल व व्यवसायिक शिक्षा मंत्री चेतन चौहान ने सभी विभागों द्वारा प्रस्तुत किए गए परिव्यय बजट की विस्तृत जानकारी लेने के बाद संस्तुति की मुहर लगाई। प्रभारी मंत्री ने अफसरों को चेताते हुए कहा कि जितना धन दिया जा रहा है पूरा खर्च बिना किसी मिलीभगत से होना चाहिए। कहीं से भी किसी भी प्रकार की शिकायत मिली तो सम्बंधित को बख्शा नहीं जाएगा।


कृषि विकास को बढ़ावा देने के लिए 20 लाख रूपए के परिव्यय की योजना तैयार की गई है। जिसमें गन्ना विकास पर पांच लाख व लघु सिंचाई पर धन खर्च किया जाएगा, साथ ही दलहनी व तिलहनी फसलों को बढ़ावा देने की योजना तैयार की गई है। उद्यान विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2016-17 में परिवव्यय के लिए कोई बजट तैयार किया गया। गन्ना विभाग द्वारा पांच लाख का परिव्यय प्रस्तुत किया गया। लघु सिंचाई के लिए 10 करोड़ 12 लाख का परिव्यय तैयार किया गया है। पशुपालन विभाग का 80 लाख इस दौरान शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने पशुओं के पोस्टमार्टम हाउस का निर्माण कराए जाने का प्रस्ताव बैठक में रखा। जिस पर प्रभारी मंत्री ने शिक्षक विधायक को अाश्वस्त भी किया। दुग्ध विकास विभाग ने समितियों के संचालन व अन्य कार्यों के लिए 84 लाख का परिव्यय प्रस्तुत किया।


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इस पर प्रभारी मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को महिलाओं को पशुपालन से जोड़ने के साथ ही दुग्ध विकास के कार्यों में लाने के लिए जन जागरण का कार्य कराने का निर्देश दिया इसके लिए धन का प्राविधान करने का प्रस्ताव किया। वन द्वारा पांच करोड़ का परिव्यय प्रस्तुत किया गया। जिसमें एक हजार ब्रिक गार्ड लगाया जाएगा, नए वित्तीय वर्ष में दो लाख से अधिक के पौधा लगाने का लक्ष्य रखा गया है। वन विभाग की जमींन पर कब्जे के मामले के मामले को लेकर चल रहे मुकदमे में पैरवी करने पर जोर दिया जिससे जमींन का मामला निपटाया जा सके। ग्राम विकास विभाग ने दो करोड़ का परिव्यय प्रस्तुत किया। मनरेगा के तहत 183 करोड़ 94 लाख रूपए का परिव्यय प्रस्तुत किया गया।


डीसी मनरेगा ने बताया कि इस वर्ष 63लाख 42 हजार मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है जबकि पिछले वर्ष 66 लाख मानव दिवस का सृजन किया गया था। इसके अलावा जल संचयन, जल सरंक्षण व सिंचाई पर भी रकम खर्च की जाएगी। ग्राम्य विकास विभाग ने एक करोड़ का बजट प्रस्तुत किया गया जिसमें 64 लाख रूपए की लागत से विकास भवन की मरम्मत व 52 लाख रूपए की लागत से सीडीओ के लिए नए आवासीय भवन का निर्माण कराया जाएगा। लघु सिंचाई पर 45 लाख रूपए खर्च किए जाएंगे। नेडा विभाग ने 716 सोलर लाइट लगाने के लिए 50 लाख की परियोजना का परिव्यय प्रस्तुत किया। साथ ही सांसद व विधायक निधि से होने वाले कार्यों को शामिल नहीं किया गया है। खादी ग्रामोद्योग विभाग को महज दो दो लाख रूपए ही प्रशिक्षण अदि के नाम पर दिए जाने की संस्तुति की गई। लोक निर्माण विभाग ने सड़कों की मरम्मत आदि के लिए 22 करोड़ रूपए का परिवव्यय प्रस्तुत किया। पर्यटन विभाग ने जिले के 13 पर्यटन स्थलों के विकास के लिए एक करोड़ रूपए का परिव्यय प्रस्तुत किया। इसके अलावा बेसिक शिक्षा विभाग ने रसोइयो के मानदेय आदि की व्यवस्था के लिए दो करोड़ 85 लाख का खर्च का ब्योरा रखा।


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माध्यमिक शिक्षा ने 53लाख  76 हजार का बजट संस्तुति के लिए प्रस्तुत किया। स्वास्थ्य विभाग द्वारा डुमरियागंज में महिला अस्पताल के निर्माण, चाहरदीवारी के निर्माण आदि के लिए 366 लाख रूपए की मांग की गई। इसके अलावा विकलांग कल्याण विभाग, समाज कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा प्रस्तुत किए परिवव्यय पर भी प्रभारी मंत्री ने सरसरी तौर पर जानकारी लेते हुए योजना पर अपनी संस्तुति की मुहर लगाई। प्रभारी मंत्री ने सभी अधिकारियों को सात दिन का समय देते हुए कहा है कि सात दिनों के अन्दर सभी अधिकारी अपनी कार्यशैली सुधार ले तथा जो योजना तैयार की गई तथा पूर्व में कराए गए कार्यों का पूरा ब्योरा विधायकों को सौंप दे जिससे कि पूर्व में कराए गए कार्यों का सत्यापन हो सके। जहां पर भी गड़बड़ी की शिकायत होगी उसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए उन्होंने जिलाधिकारी को कड़ी हिदायत देते हुए कहा कि प्रत्येक कार्यांे व मामले की स्वयं निगरानी करें।

जिपं के 85 परियोजनाओं की होगी जांच
जिला योजना की बैठक के दौरान जिला पंचायत द्वारा पूर्व के वर्ष में कराए गए कार्यों की शिकायत सामने आने पर प्रभारी मंत्री ने मामले की जांच का आदेश दिया है। मामला पहले से ही जानकारी होने के कारण प्रभारी मंत्री ने जिला पंचायत द्वारा निर्मित 212 परियोजना जिनकी लागत 284 करोड़ रूपए की है के सम्बंध में डीएम को जांच का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि परियोजना की जांच रिपोर्ट सीधे उन्हें भेजी जाय जिससे कि शासन स्तर से कार्रवाई सुनिश्चित की जाय। इस दौरान विधायक व जिला पंचातय सदस्यों ने यह भी शिकायत की कि जिला पंचायत द्वारा जिन 213 परियोजना को पूरा कराया गया है उसमें 85 परियोजना ऐसी है जिस पर दोबारा काम कराया गया है। जबकि उस पर काम कराने की कोई जरूरत ही नहीं थी। ऐसे सभी कार्यों की जांच कराकर रिपोर्ट भेजने को कहा है। उन्होने कहा कि जिला पंचायत के किसी भी कार्य में मनमानी नहीं चलने पाएगी। गड़बड़ी मिलने पर एफआईआर दर्ज कराने का भी निर्देश दिया।

छुट्टी पर चल रहे अधिशासी अधिकारी का होगा मेडिकल सत्यापन
बैठक के दौरान जिला पंचायत के एमए के मेडिकल अवकाश होने का मामला तूल पकड़ लिया। प्रभारी अधिकारी के रूप में बैठक में उपस्थित प्रशासनिक अधिकारी अर्जुन सिंह ने बताया कि एक माह से मेडिकल अवकाश पर है। जबकि सदस्यों ने बताया कि दो माह से गायब चल रहे हैं। जिला पंचायत के कार्यों में गडबड़ी के कारण वह फरार चल रहे है। साथ ही सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के के मामले में अभी तक टेण्डर प्रक्रिया शुरू नही किए जाने पर भी मंत्री ने नराजगी जताई। प्रभारी मंत्री ने डीएम को निर्देश दिया कि मेडिकल अवकाश पर चल रहे अधिकारी की जांच की जाय अगर मामला फर्जी मिले तो उनके खिलाफ केस दर्ज कराया जाय। इसके लिए डीएम को 15 दिन के भीतर रिपेार्ट प्रस्तुत करने को कहा। जिससे कि कार्रवाई सुनिश्चि की जा सके।

मंत्री की संस्तुति पर बढ़ा स्वच्छता का बजट
जिले के प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में हुई जिला योजना की बैठक में स्वच्छता अभियान पर धन कम पड़ने पर जिलाधिकारी से विचार करने को कहा। जिस पर डीएम ने मनरेगा के तहत मिलने वाले 53 लाख रूपए अतिरिक्त स्वच्छता योजना में जोड़ने की सिफारिस की जिस पर मंत्री ने अपनी मुहर लगा दी। अब जिले में स्वच्छता अभियान पर109 करोड़ रूपया अतिरिक्त खर्च किया जाएगा।

15 जून तक हर हाल में गड्ढा मुक्त हो सड़कें
बैठक के दौरान प्रभारी मंत्री ने 15 जून तक हर हाल में सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का निर्देश दिया। इसके लिए विभागवार सड़कों का ब्योरा भी बैठक में मांगा साथ ही सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के सम्बंध में धन के उपलब्धता की भी जानकारी ली। जिससे कि समय से सड़कों को गड्ढा मुक्त किया जा सके। गन्ना विभाग, लोग निर्माण विभाग व एनएच के कुछ हिस्सों की सड़कों को गड्ढा मुक्त करने में धन की कमी की समस्या पर लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियन्ता को निर्देश दिया कि जिन विभाग के पास धन नहीं होगा उनकी सड़कों की मरम्मत लोक निर्माण विभाग द्वारा कराया जाएगा। इसके लिए उन्हें बाद में धन मुहैया करा दिया जाएगा। मंत्री ने कहा कि 15 जून तक सड़कों के गड्ढा मुक्त नहीं होने की दशा में सम्बंधित जिम्मेदार पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इसको लेकर मुख्यमंत्री काफी गम्भीर है।

राशन के गोदामों व दुकानों पर लगेगा सीसी कैमरा
जिला योजना समिति की बैठक में बजट के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कोटेदारों की शिकायत आम होने तथा राशन के गोदाम व दुकानों पर की जाने वाली घटतौली की शिकायत विधायकों ने की। विधायकों ने बताया कि कोटेदारों को कम राशन मिलने के कारण ही दुकानों से लोगों को कम राशन दिया जाता है। इसके लिए प्रभारी मंत्री ने डीएम को निर्देश दिया कि जिले में जितने भी राशन के दुकान हैं वहां पर सीसीटीवी लगाया जाय तथा दुकानों पर भी वितरण के दौरान सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से निगरानी की जाय। विपणन अधिकारी व डीएसएओ को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर गोदाम व दुकान पर दलाल दिखे तो सबसे पहले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। क्योंकि इसके लिए वहीं जिम्मेदार हैं।

पर्यटन स्थल से बाहर हुआ हल्लौर का कर्बला

पर्यटन विभाग द्वारा जिले में 13 पर्यटन स्थलों के बारे में जानकारी दी गई। जिसमें हल्लौर के कर्बला को भी शामिल किया गया था। बैठक में विधायकों द्वारा इसका विरोध किए जाने पर उसे पर्यटन स्थल की श्रेणी से बाहर करने का फैसला किया गया। साथ ही सदर विधायक श्यामधनी राही के प्रस्ताव पर शहर के सिहेश्वरी मंदिर को पर्यटन स्थल की श्रेणी में शामिल करने की संस्तुति की गई। हल्लौर के कर्बला को पर्यटन क्षेत्र में शामिल किए जाने को लेकर सदस्यों ने भी विरोध किया था। इस दौरान सांसद जगदम्बिका पाल ने कपिलवस्तु के विकास को लेकर प्रभारी मंत्री को गम्भीर होने तथा अतिरिक्त बजट देने की मांग की। जिससे कि कपिलवस्तु का आपेक्षित विकास हो सके।

बैठक में सांसद व विधायकों का सही जवाब नहीं दे पाए अफसर
जिला योजना समिति की बैठक के दौरान अफसर सांसद व विधायक के सवालों का जवाब नहीं दे पाए। बैठक के दौरान कैबिनेट मंत्री जय प्रताप सिंह, सांसद जगदम्बिका पाल, इटवा विधायक डॉ.सतीश द्विवेदी, डुमरियागंज विधायक राघवेन्द्र प्रतापि सिंह, शोहरतगढ़ विधायक चौधरी अमर सिंह व सदर विधायक श्यामधनी राही ने पशुपालन, विद्युत विभाग, सिंचाई, लोक निर्माण विभाग, आपूर्ति विभाग, दुग्ध विकास विभाग, बेसिक शिक्षा विभाग, जिला पंचायत, जिला पंचायत राज, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा की जा रही मनमानी की शिकायतों को लेकर सवाल किया तो विभागों से सम्बंधित अफसर बगल झांकते रहे। सभी ने मामले की दिखवाने की बात कहीं जिस पर प्रभारी मंत्री ने अधिकारियों पर कड़ी नराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि विधायकों तक शिकायत न जाने पाए उससे पहले ही लोगों को राहत मिले। ताकि वाजिब कामों को लिए विधायकों को सामने न आना पडे़।

सांसद व विधायकों की बातों में दिखा विरोधाभास
जिला पंचायत के मामले को लेकर बैठक के दौरान मंत्री के सामने ही सांसद व विधायक की बातों में विरोधाभास दिखा। जिला पंचायत सहित विभिन्न विभागीय कार्यों को लेकर विचारों में विरोधाभास होने को लेकर दो बार आपस में हल्की नोक झोक भी हुई। लेकिन बात में मंत्री ने सभी मामलों की जांच का आदेश देकर मामले को शांत करा दिया। डुमरियागंज मे वन विभाग की जमींन के मामले को लेकर भी सांसद व विधायक में विरोधभास रहा।
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