वेंटिलेटर पर है कछार के अस्पताल, नहीं हो रहा इलाज

Varanasi Uttar Pradesh

Publish: Sep, 16 2017 08:27:41 (IST) | Updated: Sep, 16 2017 08:27:42 (IST)

Siddharthnagar, Uttar Pradesh, India
वेंटिलेटर पर है कछार के अस्पताल, नहीं हो रहा इलाज

जिम्मेदारों की उदासीनता से बेमतलब बने है अस्पताल, कहीं पर नहीं है डॉक्टर तो कहीं पर है संसाधनों का आभाव

सिद्धार्थनगर. जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल है। कछार क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए बनाए गए अस्पतालों के भवन ही नहीं पूरी व्यवस्था वेंटीलेटर पर है। जिससे लोगों को इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है। ऐसे में मजबूर होकर लोग झोलाछाप डॉक्टरों की शरण ले रहे है जहां पर ठगी का शिकार होने के साथ ही बीमारियों का भी शिकार हो रहे हैं।

 

 

ग्रामीण क्षेत्र के डॉक्टरों की कमी के कारण कई अस्पातल बन्द चल रहे हैं, कई ऐसे हैं जिनका संचालन फार्मासिस्टों के सहारे किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को इलाज आदि की सुविधा मुहैया कराने के लिए बने अस्पतालों के भवन जरूरतमंदों को मुंह चिढ़ा रहे हैं। जिम्मेदारों की उदासीनता के कारण ही लोगों को इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 165 डॉक्टरों की जरूरत है जिसके सापेक्ष महज 68 डॉक्टर ही तैनात है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवा की समस्या खड़ा होना लाजिमी है। इटवा क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र चेतिया के अस्पताल पर तैनात डॉक्टर का स्थानान्तरण तीन वर्ष पहले हुआ तो उसके बाद यहां पर डॉक्टर की तैनाती नहीं होने से अस्पताल बन्द चल रहा है।

 

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भनवापुर ब्लॉक के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सोहना का ही यहीं हाल है। यहां पर डॉक्टर नहीं होने से फार्मासिस्ट के सहारे अस्पताल का संचालन हो रहा है। यहां पर आने वालों को दवाएं तो मिल जा रही है लेकिन उन्हें अन्य सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं हैं। इसको लेकर जिम्मेदार भी गम्भीर नहीं हैं। वहीं, खुनियांव के धोबहा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। यहां न तो चिकित्सक की तैनाती हैं और दवाओं का भी हमेशा टोटा बना रहता है। जिससे मरीजों की मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है। जबकि धोबहा में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की स्थापना एक दशक पहले की गई थी।

 

 

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स्वास्थ्य कर्मियों के रहने का नहीं है इंतजाम

ग्रामीण व कछार क्षेत्रों में बने नया प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर डॉक्टर व अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों के रहने का कोई इंतजाम नहीं है। जिसके चलते जो यहां पर तैनात हैं वह भी 24 घण्टे नहीं रहना चाहते हैं। शाम होते या दो बजे के बाद जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर सन्नाटा पसर जाता है। ऐसे में रात के समय में किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर लोगों को जिला अस्पताल या प्राइवेट चिकित्सकों की शरण में जाने को मजबूर होना पड़ता है। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर बने भवनों में बिजली, पानी का कोई इंतजाम नहीं है। कई स्वास्थ्य केन्द्र ऐसे है जहां पर अभी तक बिजली ही नहीं पहुंची, जिससे वहां पर अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

By Suraj Chauhan

 

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