रैटहोल, रेनकट वाले जर्जर बांध बुद्ध भूमि पर लिखेंगे तबाही की इबारत

प्रशासन का बचाव व राहत कार्य पानी की धार के आगे नकाफी साबित हुआ था

By: Ashish Shukla

Published: 21 May 2018, 08:35 PM IST

सिद्धार्थनगर. बीते वर्ष की तरह इस बार भी जिले में जर्जर बाध तबाही की इबारत लिखेंगे। बीते वर्ष बाढ़ के कारण साढे़ तीन हजार से अधिक परिवारों ने कई दिनों तक खुले आसमान के नीचे बाढ़ में शरण ली थी। तथा दो सौ से अधिक मकान नेस्त नाबूत हो गए थे। जिले के इटवा, बढ़नी में बाढ़ टूटने के कारण तीन सौ से अधिक गांव पूरी तरह से पानी में डूब गए थे। प्रशासन का बचाव व राहत कार्य पानी की धार के आगे नकाफी साबित हुआ था।

15 जून को मानसून दस्तक दे सकता है जिसको लेकर बांध के किनारे बसे ग्रामीणों की धुकधुकी तेज हो गई कि इस बार बाढ़ आई तो उनका क्या होगा। लेकिन प्रशासनिक जिम्मेदारों को इसकी कोई चिंता नहीं है। अभी तक बांधों की मरम्मत को लेकर कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। जिससे आने वाले दिनों में जर्जर बांध, रैटहोल, रेनकट वाले बांध खराब व जर्जर रेगुलेटर से जिले में मचने वाली तबाही को रोकना प्रशासन के लिए काफी बड़ी चुनौती वाला काम होगा। नेपाल के पानी छोड़ने के कारण जिला एक दो बार नहीं बल्कि तीन से चार बार बाढ़ की जद में आता है। इसके बाद भी बांधों की स्थित को सुधारने को लेकर कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है।

बांधों की हालत पर रिपोर्ट एक दशक बाद भी नहीं भरा जा सका बांध का 300 मीटर गैप : बांध के गैप से हर वर्ष 25 हजार बीघा फसल होती है बर्बाद बाढ़ से सुरक्षा के उपायों को लेकर भले ही तमाम दावे किए जा रहे हों लेकिन जमीनी हकीकत की कहानी कुछ और है। जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण बांधों के गैप नहीं भरे जा रहे हैं।

इससे बांधों से सुरक्षा का मुगालता पाले लोगों को हर वर्ष बाढ़ के पानी की मार सहनी पड़ रही है। गांवों के लोग बाढ़ से मचने वाली त्रासदी को लेकर चिंतित हैं। कूड़ा-धोधी के किनारे बना केजी बांध रेनकट व रैटहोल से जर्जर हो चुका है। 48 किमी लंबाई वाले केजी बंाध में आठ दर्जन से अधिक रेनकट व हैटहोल बने हैं।

तुलसीपुर, मोहाना, देवपुर मस्जिदिया, बैरवां, परसौना, रमवापुर, देउरवां, गढ़मोर, लोटन, सोहांस के पास करीब पांच दर्जन स्थानों पर रेनकट से बांध क्षतिग्रस्त है। बांध में कई स्थानों पर रैट ***** भी हैं। इसके बावजूद तीन वर्षों से बांध पर मरम्मत के नाम पर कोई काम नहीं हुआ। अगर इस बार नदी पर पानी का दबाव बढ़ा तो तीन दर्जन गांवों के साथ बाढ़ का पानी जिला मुख्यालय तक तबाही की इबारत लिखेगा।

Ashish Shukla
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