बांधों की नहीं हुई मरम्मत, बाढ़ मचाएगी तबाही

बांधों की नहीं हुई मरम्मत, बाढ़ मचाएगी तबाही
Dam

धन के अभाव में नहीं हो पा रहा काम, ठेकेदारों का भी है बकाया, बढ़ी ग्रामीणों की बेचैनी

सिद्धार्थनगर. मानसून के दस्तक देने के साथ ही जर्जर बांधों के किनारे बसे लोगों की बेचैनी तेज हो गई है। हर वर्ष बाढ़ की तबाही का मंजर याद कर पीड़ित ही नहीं हर जानने वाला सहम जाता है। इसके बाद भी जिम्मेदार गम्भीर नहीं दिख रहे है। अभी तक जर्जर बांध को कौन कहें, बांधों के रेनकट व रैटहोल को भी अभी तक नहीं भरा जा सका है। ऐसे में बांधों की दशा को लेकर आसपास के ग्रामीणों की दहशत बढ़ गई है। लोगों का दहशत बढ़ना भी लाजिमी है कि कारण यह है कि पिछले तीन वर्षों से बांधों की मरम्मत नहीं कराई गई है, जबकि बाढ़ के दौरान जर्जर व रिसाव वाले बांधों पर काम कराने वाले ठेकेदारों का भुगतान भी अभी तक नहीं किया गया है।

सिद्धार्थनगर नेपाल की पहाड़ियों से निकली आठ बढ़ी व चार छोटी नदियों से घिरा हुआ है। मानसून के दौरान या फिर नेपाल में लगातार बारिश होने के बाद बाढ़ की पहली बार बुद्ध भूमि के लोग ही झेलते है। बाढ़ से जिले के विभिन्न हिस्सों को बचाने के लिए बनाए गए बांधों की स्थिति ठीक नहीं है। मरम्मत के लिए बांधों का सर्वे तो करा लिया गया है लेकिन अभी तब बांधों की मरम्मत का कार्य शुरू नहीं हो सका है। यहां तक कि संवेदनशील बांधों को भी लेकर जिम्मेदार गम्भीर नहीं है।

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उस्का-चित्तापुर, करछुलिया, नौखनियां, जोगिया व बांसी क्षेत्रों के बांधों की स्थिति एक जैसी है। ऐसे में बाढ़ के दौरान अगर बांधों पर दबाव बढ़ता है तो जर्जर बांध पानी का दबाव नहीं झेल पाएंगे इससे भारी तबाही मचेगी। लेकिन जिम्मेदारों को इसकी कोई चिन्ता नहीं है। स्थिति यह है कि इटवा क्षेत्र में शनिवार को जांच के दौरान एसडीएम ने भी इस पर चिन्ता जाहिर करते हुए मामले के सम्बंध में डीएम को रिपोर्ट प्रेषित किया है।

चिन्तित है बांधों के किनारे बसे ग्रामीण
जिले के जर्जर बांधों के किनारे बसे गांव के लोग बांधों पर काम नहीं कराए जाने व उसकी स्थिति को लेकर चिन्तित हो गए है। बाढ़ ग्रस्त इलाकों के लिए ग्रामीण तो अभी से ही सुरक्षित ठिकाने की तलाश में जुट गए है।  मौसम विभाग की मानें तो इस बार हर वर्ष की अपेक्षा अधिक बारिश होगी ऐसे में बाढ़ आना भी तय है। जिले में भले ही बारिश न हो लेकिन अगर नेपाल की पहाड़ियों में बारिश होती है तो भी जिला भयंकर बाढ़ की चपेट में आएगा। जिसकी मार जर्जर बांधों के किनारे बसे ग्रामीणों को झेलना पडे़गा।

बांध टूटे तो ठेकेदार भी खड़ा कर देंगे हाथ
बंधों की मरम्मत के लिए विभाग के पास पर्याप्त धन नहीं होने के कारण ठेकेदार भी काम कराने से कन्नी काट रहे है। तीन वर्ष पूर्व बाढ़ के दौरान बांधों की मरम्मत कराने वाले ठेकेदारों को भुगतान नहीं हो पाया है। जिसको लेकर ठेकेदारों ने तत्कालीन सिंचाई मंत्री शिवपाल यादव से कई बार मुलाकात की थी। इसके बाद भी उनका भुगतान नहीं हो सका था। विभाग को धन मिलने के बाद कुछ ही ठेकेदारों का भुगतान हो सका है। अभी तक कई ठेकेदारों का भुगतान लम्बित पड़ा हुआ है। ऐसे में बाढ़ के दौरान बांधों की मरम्मत के लिए काम कराने की जरूरत पड़ती है तो ठेकेदार हाथ खड़ा कर देंगे जिससे जिले में स्थिति भयावह हो सकती है। 
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