दो अफसर व तीन शिक्षक के सहारे चल रहा सिद्धार्थ विश्वविद्यालय

दो अफसर व तीन शिक्षक के सहारे चल रहा सिद्धार्थ विश्वविद्यालय
Siddharth University

पिछले दो वर्ष से चल रही केवल बीकॉम की कक्षाएं, धन के अभाव में अधूरे हैं विवि के कई भवन

सिद्धार्थनगर. गौतम बुद्ध की क्रीड़ा स्थली कपितवस्तु में स्थित सिद्धार्थ विश्वविद्यालय अस्तित्व में आने के बाद से शिक्षकों व संसाधनों के अभाव से जूझ रहा है। भारत नेपाल सीमा पर स्थित विश्वविद्यालय को शिक्षक नहीं मिल पा रहे है तो धन के अभाव में संसाधनों का टोटा बना हुआ है। जबकि विवि से छह जिलों के 242 महाविद्यालय सम्बंद्ध है। अभी तक विवि में महज बीकॉम की ही कक्षाएं शुरू हो सकी हैं।


सपा सरकार की महत्वाकांक्षी योजना रही सिद्धार्थ विश्विविद्यालय की नींव मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सितम्बर 2013 में स्वयं रखी थी। दो वर्ष में विवि का प्रशासनिक भवन, वीसी आवास बनकर तैयार हुआ तो विवि अस्तित्व में आ गया। आनन फानन में यहां पर उधार के शिक्षकों से बीकॉम की कक्षाएं भी शुरू की गई। एक वर्ष तक उधार के शिक्षक से बीकॉम की कक्षाएं चली इसके बाद विवि को बीकॉम की कक्षा के लिए स्थायी शिक्षक मिल गए। लेकिन अन्य विषयों की कक्षाएं शुरू करने के लिए शिक्षकों की जरूरत है। जिसके लिए विवि द्वारा एक दो बार नहीं अलग-अलग समय में आधा दर्जन से अधिक बार विज्ञापन के माध्यम से शिक्षकों के लिए आवेदन मांगा गया। इसके बाद भी लोगों ने विवि में शिक्षक बनने के लिए रूचि नहीं दिखाई। जिसका परिणाम यह रहा कि अभी तक विवि को अन्य विषयों के शिक्षक भी नहीं  मिल सके है। जिससे अन्य विषयों की कक्षाएं शुरू नहीं हो पा रहीं है। जबकि विवि प्रशासन का दावा था कि इस वर्ष से अन्य विषयों की भी कक्षाओं का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। नया शैक्षिक सत्र शुरू हो गया लेकिन अभी तक अन्य विषयों की कक्षाएं शुरू नहीं की जा सकीं हैं। ऐसे में विवि कैम्पश में शिक्षा लेने की मंशा पाले जिले के युवाओं की भी मंशा धूल धूसरित हो रही है। लेकिन विवि को शिक्षक मिले इसे लेकर जिम्मेदारों की गम्भीरता नहीं दिख रही है।

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छह माह से खाली है परीक्षा नियंत्रक का पद
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में तैनात किए परीक्षा नियंत्रक के छह माह पहले रिटायर होने के बाद से अभी यहां पर किसी परीक्षा नियंत्रक की तैनाती नहीं की जा सकी है। जबकि परीक्षा नियंत्रक एक महत्पूर्ण पद होने के बाद भी तैनाती नहीं से विवि की महत्ता पर प्रश्न चिन्ह लग रहा है। विवि द्वारा छह जिलों के 242 महाविद्यालयों में आयोजित होने वाली सेमेस्टर व वार्षिक परीक्षा का नियंत्रण करना होता होता है।

विवि में है संसाधनों का अभाव
कपिलवस्तु स्थित सिद्धार्थ विवि में संसाधनों के अभाव के कारण भी यहां पर छात्र नहीं रूकते है। परीक्षा के दौरान यहां पर आने वाले परीक्षार्थियों को तमाम दुश्वारियां झेलनी पड़ती है। अभी तक विवि कैम्पस मे पोस्ट ऑफिस का इंतजाम नहीं हो सका है। बैंक तो भवन के अभाव में विवि के प्रशासनिक भवन में ही संचालित हो रहा है। इसके अलावा विवि में आने वाले लोगों के पीने के पानी का कोई इंतजाम नहीं है। ऐसे में बाहर से आने वाले महाविद्यालय से जुडे़ लोगों को पानी के लिए परेशान होना पड़ता है।

धन की कमी से अधूरे पड़े हैं कई भवन
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय धन की कमी से भी जूझ रहा है। धन के अभाव में विवि के कई भवन अभी भी अधूरे पडे़ हैं। विवि के प्रशासनिक भवन, कला संकाय व वीसी आवास को छोड़ विवि से जुडे किसी भी भवन का काम अभी तक पूरा नहीं हो सका है। जिससे विवि पूरी तरह से अस्तित्व में नहीं आ पा रहा है। छात्रावास के अभाव में यहां पर चाहकर भी छात्र नहीं रूक पा रहे है। विवि के भारत नेपाल सीमा से काफी सटा स्थित होने के कारण यहां पर विभिन्न प्रकार के सुरक्षा का भी खतरा बना हुआ है। सपा के शासनकाल में विवि के विभिन्न भवनों के निर्माण के लिए तो सरकार की ओर से पर्याप्त धन मिला लेकिन शासन सत्ता के जाने के बाद विवि को धन नहीं मिलने के कारण विवि के अधूरे भवनों का निर्माण भी अधर में लटक गया है। धन मितले की कोई उम्मीद भी नहीं दिख रही है।
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